भक्ति के लिए उम्र बाधा नहीं होती – पंडित गौरव जोशी
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बिलासपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
श्रीमद्भागवत कथा में ध्रुव चरित्र के माध्यम से दी भक्ति और धैर्य का संदेश, समाज सुधार के लिए कथा को बताया आवश्यक
बिलासपुर जिले के ग्राम टेकर में स्मृतिशेष चंद्र भूषण वर्मा की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस कथाव्यास पंडित गौरव जोशी ने भक्तों को भक्ति, धैर्य और संयम का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं होती और बच्चों को बचपन से ही ईश्वर भक्ति के संस्कार दिए जाने चाहिए क्योंकि बचपन कच्ची मिट्टी की तरह होता है जिसे जिस रूप में ढालना चाहें उसी रूप में ढाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि आत्म कल्याण के लिए भगवान के नाम का स्मरण सबसे बड़ा साधन है और मनुष्य को हर परिस्थिति में ईश्वर का जाप करते रहना चाहिए।
कथाव्यास पंडित गौरव जोशी ने भक्त ध्रुव के प्रसंग का वर्णन करते हुए बताया कि राजा उत्तानपाद की दो रानियां थीं जिनमें सुनीति और सुरुचि का उल्लेख मिलता है। सुनीति के पुत्र ध्रुव और सुरुचि के पुत्र उत्तम थे। राजा का झुकाव सुरुचि की ओर अधिक था जिससे परिवार में भेदभाव की स्थिति बन गई। एक दिन राजा उत्तानपाद अपने पुत्र उत्तम को गोद में लेकर सिंहासन पर बैठे थे तभी बालक ध्रुव भी अपने पिता की गोद में बैठने की इच्छा लेकर उनके पास पहुंचा लेकिन सुरुचि ने उसे रोकते हुए कहा कि यदि उसे राजा की गोद में बैठना है तो उसे उसकी कोख से जन्म लेना होगा और इसके लिए भगवान की कठोर तपस्या करनी पड़ेगी। इस अपमान से आहत होकर बालक ध्रुव वन में चले गए और भगवान की कठोर तपस्या की। उनकी तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें दर्शन दिए और मनचाहा वरदान प्रदान किया। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने बताया कि किसी भी व्यक्ति के साथ भेदभाव नहीं करना चाहिए और ईश्वर भक्ति के मार्ग में किसी प्रकार का विघ्न नहीं डालना चाहिए।
कथा के दौरान सती प्रसंग का वर्णन करते हुए कथाव्यास ने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण के जाने से पहले यह अवश्य विचार करना चाहिए कि वहां आपके गुरु, आपके इष्ट या आपके सम्मान का अपमान तो नहीं होगा। यदि ऐसा होने की संभावना हो तो वहां जाने से बचना चाहिए चाहे वह स्थान अपने जन्मदाता पिता का ही घर क्यों न हो। उन्होंने बताया कि भगवान शिव की आज्ञा को न मानने के कारण सती को पिता के घर अपमान सहना पड़ा और अंततः उन्होंने स्वयं को अग्नि में समर्पित कर दिया।
कथाव्यास पंडित गौरव जोशी ने कहा कि समाज में नैतिकता और सदाचार को बनाए रखने के लिए श्रीमद्भागवत कथा जैसे आध्यात्मिक आयोजनों की आवश्यकता है। ऐसी कथाएं समाज को सही दिशा देने के साथ लोगों के जीवन में भक्ति और सद्भाव का संचार करती हैं। ग्राम टेकर में आयोजित इस कथा के मुख्य यजमान श्रीमती कामिनी रोशन वर्मा हैं और कथा प्रतिदिन दोपहर तीन बजे से भक्तों के लिए प्रवाहित हो रही है जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित होकर धर्म लाभ ले रहे हैं।
प्रदीप मिश्रा
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