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दशहरा विवाद में आरोपों का नया मोड़! अनिल चौरसिया ने एसपी से लगाई निष्पक्ष जांच की गुहार

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

रजगामार निवासी अधिवक्ता अनिल चौरसिया ने गौरीशंकर और उनके परिजनों की शिकायतों को निराधार बताते हुए पुलिस अधीक्षक को आवेदन सौंपा। सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने, स्वतंत्र गवाहों के बयान लेने और शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की।


कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के रजगामार क्षेत्र में दशहरा के दिन हुए विवाद को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का मामला सामने आया है। जिला एवं सत्र न्यायालय कोरबा में पंजीकृत अधिवक्ता अनिल चौरसिया ने पुलिस अधीक्षक कोरबा को शिकायत पत्र देकर अपने, अपने बड़े भाई कौशल चौरसिया और दिनेश चौरसिया के विरुद्ध लगाए गए कथित छेड़छाड़ के आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखने और स्वतंत्र गवाहों के बयान दर्ज कराने की मांग की है।


अनिल चौरसिया का आरोप है कि दशहरा के दिन 20 अक्टूबर 2026 को हुए विवाद के बाद उनके परिवार के विरुद्ध शिकायतें की गई हैं। उनका दावा है कि गौरीशंकर और उनके परिजनों पर पहले से मारपीट, गाली-गलौज तथा अन्य गंभीर आरोपों को लेकर शिकायतें दर्ज हैं। अनिल का कहना है कि इन मामलों की कार्रवाई से बचने के लिए उनके विरुद्ध भी शिकायत की गई है। हालांकि, इन आरोपों और शिकायतों की सत्यता का निर्धारण पुलिस जांच के बाद ही हो सकेगा।
         दशहरा मैदान की घटना को लेकर क्या कहा?
अपने आवेदन में अनिल चौरसिया ने दशहरा मैदान ओमपुर में हुई घटना का विवरण देते हुए बताया कि 20 अक्टूबर की रात राम, लक्ष्मण और हनुमान की भूमिका में बच्चे एक पिकअप वाहन में सवार होकर रावण दहन कार्यक्रम में पहुंचे थे। उनके अनुसार, उनका बेटा दक्ष चौरसिया लक्ष्मण की भूमिका में था और वह बच्चों की सुरक्षा के लिए पिकअप वाहन के पीछे खड़े थे।
अनिल का आरोप है कि रात करीब 9:55 बजे दशहरा मैदान के पास गजेन्द्र भार्गव पिकअप वाहन पर चढ़ गए और बच्चों के पास बैठकर पटाखा जलाने लगे। उनके मुताबिक, स्थिति को देखते हुए उनके बड़े भाई कौशल चौरसिया ने बच्चों को वाहन से नीचे उतारा, जिसके बाद गजेन्द्र भार्गव और उनके चाचा उमाशंकर तथा शिवशंकर के साथ कथित तौर पर गाली-गलौज, धक्का-मुक्की और मारपीट हुई।


अनिल ने दावा किया है कि पुलिस की मौजूदगी में रावण दहन के बाद वह अपने भाई कौशल और बेटे दक्ष के साथ मोटरसाइकिल से घर लौट गए थे। उन्होंने कहा कि घटना के समय मौजूद पुलिसकर्मियों, सार्वजनिक युवा दुर्गा एवं दशहरा उत्सव समिति ओमपुर के सदस्यों तथा अन्य प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ कर घटनाक्रम की पुष्टि की जा सकती है। उन्होंने संबंधित सीसीटीवी फुटेज की जांच कराने की भी मांग की है।
          पहले से दर्ज शिकायतों का भी किया उल्लेख
अनिल चौरसिया ने अपने आवेदन में बताया कि उनके बड़े भाई कौशल चौरसिया ने गजेन्द्र भार्गव, शिवशंकर और उमाशंकर के विरुद्ध मारपीट एवं गाली-गलौज के मामले में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने इसके लिए अपराध क्रमांक 627/2026 का उल्लेख किया है।
इसी तरह, अर्चना चौहान द्वारा गजेन्द्र भार्गव और उनके परिवार के कुछ सदस्यों के विरुद्ध कथित जातिगत टिप्पणी, गाली-गलौज, मारपीट और मोटरसाइकिल चढ़ाने से संबंधित शिकायत के संबंध में अपराध क्रमांक 624/2026 का उल्लेख भी आवेदन में किया गया है।
अनिल का यह भी कहना है कि उनके भाई कौशल चौरसिया ने 21 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन देकर आशंका जताई थी कि पूर्व विवाद के चलते उनके परिवार के विरुद्ध झूठी शिकायत की जा सकती है।

              वीडियो साक्ष्य प्रस्तुत करने का भी दावा
अनिल चौरसिया ने अपने पक्ष में कुछ वीडियो साक्ष्य भी प्रस्तुत किए हैं। उनका दावा है कि इन वीडियो में गजेन्द्र भार्गव को मारपीट करते हुए देखा जा सकता है। अनिल के अनुसार, इस तरह की घटनाएं बार-बार होने का आरोप है। उन्होंने मांग की है कि प्रस्तुत वीडियो की निष्पक्ष जांच कर उसकी सत्यता और घटनाक्रम में उसकी प्रासंगिकता का परीक्षण किया जाए। हालांकि, वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि और उसमें दिखाई देने वाली घटना की परिस्थितियों की जांच के बाद ही इस संबंध में किसी निष्कर्ष पर पहुंचा जा सकता है।
    नाबालिग से छेड़छाड़ की शिकायत पर भी उठाए सवाल
मामले में एक 16 वर्षीय नाबालिग लड़की से कथित छेड़छाड़ के आरोप भी सामने आए हैं। अनिल चौरसिया ने अपने आवेदन में इन आरोपों का स्पष्ट खंडन किया है। उनका दावा है कि उन्हें संबंधित लड़की के साथ किसी तरह की घटना की जानकारी नहीं है और उन्होंने किसी महिला या लड़की से छेड़छाड़ नहीं की है।
अनिल के अनुसार, नाबालिग की ओर से शिकायत दिए जाने और पुलिस स्तर पर कार्रवाई को लेकर भी कुछ सवाल हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में 22 अक्टूबर 2026 को पुलिस अधीक्षक कार्यालय में आवेदन दिए जाने की जानकारी उन्हें है। दूसरी ओर, नाबालिग से जुड़े आरोप गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए उनकी जांच संबंधित साक्ष्यों और नियमानुसार प्रक्रिया के आधार पर किया जाना आवश्यक है। इस मामले में संबंधित पक्षों के आरोपों और पुलिस की आधिकारिक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि अभी आवश्यक है।
निष्पक्ष जांच और साक्ष्य सुरक्षित रखने की मांग
अनिल चौरसिया ने पुलिस अधीक्षक से मांग की है कि उनके और उनके परिजनों के विरुद्ध की गई शिकायतों की तारीख, घटनाक्रम, उपलब्ध दस्तावेजों और स्वतंत्र साक्ष्यों का निष्पक्ष परीक्षण कराया जाए। उन्होंने संबंधित स्थानों के सीसीटीवी फुटेज, प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी और अन्य प्रासंगिक साक्ष्यों को नियमानुसार सुरक्षित रखने की मांग भी की है।
उन्होंने कहा कि यदि जांच में जानबूझकर झूठे आरोप लगाने या आपराधिक षड्यंत्र के पर्याप्त साक्ष्य मिलते हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने निष्पक्ष और विधिसम्मत जांच में सहयोग करने की बात कही है।
फिलहाल, इस मामले में दोनों पक्षों की ओर से लगाए गए आरोपों की सत्यता जांच का विषय है। नाबालिग से संबंधित आरोपों की गंभीरता को देखते हुए आवश्यक है कि पुलिस सभी पक्षों के बयान, उपलब्ध दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और स्वतंत्र गवाहों के आधार पर निष्पक्ष जांच करे। पुलिस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और जांच की स्थिति सामने आने के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।


प्रदीप मिश्रा
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