महानदी विवाद पर फिर मंथन, समाधान की दिशा में बढ़ी बातचीत
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज, ओड़िशा ब्यूरो
अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ और ओड़िशा के मुख्यमंत्रियों की उच्चस्तरीय बैठक, जल बंटवारे और भविष्य की जरूरतों पर चर्चा
भुवनेश्वर ACGN:- छत्तीसगढ़ और ओड़िशा के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को लेकर नई दिल्ली में उच्चस्तरीय बैठक हुई। बैठक में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और ओड़िशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने अपने-अपने राज्यों के हितों, जल जरूरतों और भविष्य की योजनाओं से जुड़े मुद्दे रखे। बैठक में केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल, केंद्रीय जल आयोग के अध्यक्ष तथा दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे।

बैठक के बाद ओड़िशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि छत्तीसगढ़ के साथ लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल बंटवारे के मुद्दे का बातचीत और सहयोग के जरिए रचनात्मक समाधान निकालने की दिशा में प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि बैठक में ओड़िशा के हितों, किसानों के भविष्य और राज्य के जल संसाधनों की सुरक्षा से जुड़े विषयों को मजबूती से रखा गया।

मुख्यमंत्री माझी ने महानदी को ओड़िशा की जीवनरेखा बताते हुए कहा कि यह नदी करोड़ों लोगों की आजीविका से जुड़ी है। उन्होंने राज्य के जल संसाधनों की सुरक्षा को महत्वपूर्ण बताया और कहा कि दोनों राज्यों के बीच आंकड़ों के आदान-प्रदान तथा आपसी विचार-विमर्श की प्रक्रिया तय कार्यक्रम के अनुसार आगे बढ़ रही है।
माझी के अनुसार इस मामले में प्रगति के लिए केंद्रीय जल आयोग को दी गई तीन महीने की समयसीमा में दो महीने बीत चुके हैं। इसी अवधि में दोनों राज्यों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत और आंकड़ों के आदान-प्रदान की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है।

इससे पहले 30 जुलाई 2026 को केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने भी छत्तीसगढ़ और ओड़िशा के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक के बाद कहा था कि महानदी विवाद के समाधान के लिए बातचीत, तकनीकी सहयोग और सहकारी संघवाद के माध्यम से प्रयास जारी हैं। मंत्रालय के अनुसार दोनों राज्यों ने तकनीकी विचार-विमर्श को रचनात्मक भावना से आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई थी।
केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय ने जुलाई में यह भी बताया था कि केंद्रीय जल आयोग की अध्यक्षता में विस्तारित तकनीकी समिति गठित की गई है, जिसमें दोनों राज्यों के प्रतिनिधि शामिल हैं। समिति की पहली बैठक 29 जुलाई 2026 को हुई थी और शेष तकनीकी मुद्दों पर विचार-विमर्श आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की गई थी।
ओड़िशा के मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र और ओड़िशा सरकार के प्रयासों से दशकों पुराने इस विवाद को बातचीत के जरिए आगे बढ़ाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि ओड़िशा सरकार बातचीत, सहयोग और आपसी समझ के माध्यम से महानदी विवाद के समाधान के लिए प्रतिबद्ध है।
वहीं महानदी जल विवाद का अंतिम समाधान केवल राजनीतिक बातचीत से नहीं, बल्कि दोनों राज्यों की जल जरूरतों, उपलब्ध आंकड़ों, तकनीकी आकलन और कानूनी प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए निकलना है। ऐसे में नई दिल्ली में हुई बैठक और दोनों राज्यों के बीच जारी तकनीकी विचार-विमर्श को आगे की प्रक्रिया की एक महत्वपूर्ण कड़ी के तौर पर देखा जा रहा है।
अब आने वाले समय में केंद्रीय जल आयोग और दोनों राज्यों के बीच चल रही तकनीकी बातचीत किस निष्कर्ष तक पहुंचती है और महानदी जल बंटवारे से जुड़े लंबित मुद्दों पर क्या सहमति बनती है, इस पर दोनों राज्यों की नजर रहेगी।
प्रदीप मिश्रा
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