कब्जे के विवाद में पार्षद पति पर घर में घुसकर धमकी का आरोप, नोटिस के बाद भी कार्रवाई पर सवाल
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
1 सितंबर को नोटिस, 30 सितंबर को विवाद—आखिर अतिक्रमण हटाने की अगली कार्रवाई कब?
कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के दर्री तहसील क्षेत्र के ग्राम खम्हरिया एवं वैशाली नगर में शासकीय एवं एसईसीएल से संबंधित भूमि पर कथित अतिक्रमण, आम रास्ता बाधित करने और सड़क-नाली की जगह को लेकर चल रहा विवाद अब घर में पहुंचकर गाली-गलौज और धमकी के आरोप तक पहुंच गया है। ग्रामीणों के अनुसार मामले की शिकायत कलेक्टर कार्यालय, नगर पालिक निगम, एसईसीएल कुसमुण्डा प्रबंधन, तहसील कार्यालय और थाना स्तर तक की जा चुकी है। जनदर्शन में भी शिकायत दिए जाने की बात कही गई है।

ग्रामीणों के मुताबिक ग्राम बरपाली के विस्थापित परिवारों को वैशाली नगर में बसाया गया था। आजाद पथ और वीर कुंवर पथ से तालाब तथा आसपास के मोहल्लों तक आम लोगों का आवागमन होता है। आरोप है कि रास्ते के हिस्से में ईंट और निर्माण सामग्री रखकर कथित कब्जा किया जा रहा है, जिससे आवागमन के साथ जल निकासी प्रभावित हो रही है। बारिश के दौरान घरों में पानी घुसने की स्थिति बनने की बात भी शिकायत में कही गई है।
मामले में नगर निगम की ओर से 1 सितंबर 2026 को चंद्रिका यादव पति संतलाल यादव, निवासी खम्हरिया और पुष्पा यादव पति विष्णु यादव, निवासी चुनचुनी को नोटिस दिए जाने की बात शिकायत में कही गई है। नोटिस में मलबा और ईंट हटाकर जगह को बराबर करने के निर्देश दिए गए थे। तहसील कार्यालय की ओर से भी नोटिस दिए जाने का उल्लेख है।

इसी विवाद के बीच 30 सितंबर 2026 को करीब दो बजे शिकायतकर्ता गंगोत्री यादव पति महेत्तर यादव, निवासी वैशाली नगर, वीर कुंवर पथ, कुसमुण्डा के घर पहुंचकर वार्ड 61 की पार्षद भानुमति के पति माधव जायसवाल, गोरेलाल यादव निवासी पाली पड़निया, चंद्रिका यादव पति संतलाल यादव और पुष्पा यादव पति विष्णु यादव द्वारा कथित रूप से गाली-गलौज, दबंगई और धमकी देने का आरोप लगाया गया है। शिकायतकर्ता सरिता यादव पति राजकुमार, निवासी वैशाली नगर, वीर कुंवर पथ, कुसमुण्डा का नाम भी आवेदन में प्रार्थी के रूप में दर्ज है। दोनों ने पुलिस अधीक्षक से जांच और कार्रवाई की मांग की है।

इस पूरे मामले में नगर निगम से सीधा सवाल है, जब 1 सितंबर को अतिक्रमण हटाने का नोटिस जारी किया गया था, तो क्या उसके बाद मौके पर जाकर यह जांच की गई कि नोटिस का पालन हुआ या नहीं? यदि कथित कब्जा नहीं हटाया गया, तो आगे की कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या केवल नोटिस जारी कर देना ही नगर निगम की जिम्मेदारी पूरी कर देता है, या सार्वजनिक रास्ते और नाली को बाधामुक्त कराने के लिए अगली कार्रवाई भी नियमानुसार की जानी चाहिए?
फिलहाल 1 सितंबर के नोटिस के बाद हुई कार्रवाई और 30 सितंबर की कथित घटना में पुलिस की कार्रवाई स्पष्ट होना बाकी है। लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही होगी। संबंधित पक्षों और नगर निगम का पक्ष सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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