झटका तार की चपेट में आया नन्हा हाथी, मौत के बाद रातभर गूंजती रही चिंघाड़
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सरगुजा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता:- संतोष यादव
अलकापुरी जंगल में 27 हाथियों के दल के बीच दर्दनाक हादसा, पूरी रात दहशत में रहे ग्रामीण; बढ़ते मानव-हाथी संघर्ष ने फिर खड़े किए कई सवाल
सरगुजा ACGN:- उदयपुर वन परिक्षेत्र के अलकापुरी जंगल से एक दर्दनाक घटना सामने आई है। बुधवार रात करीब 10 बजे अलकापुरी कक्ष क्रमांक पी-2027 के समीप फसल की सुरक्षा के लिए लगाए गए झटका तार की चपेट में आने से एक हाथी के शावक की मौत हो गई। घटना के बाद हाथियों के दल में ऐसी बेचैनी मची कि उनकी चिंघाड़ से पूरी रात अलकापुरी क्षेत्र गूंजता रहा। ग्रामीणों के मुताबिक अचानक लगातार सुनाई दे रही हाथियों की आवाज से लोग सहम गए और कई परिवार रातभर दहशत में रहे।
जानकारी के अनुसार अलकापुरी क्षेत्र के जंगल में पिछले कई दिनों से करीब 27 हाथियों का दल लगातार विचरण कर रहा है। हाथियों से फसल को बचाने के लिए खेतों के आसपास झटका तार लगाए जाने की बात सामने आई है। इसी दौरान हाथियों के दल में शामिल एक शावक तार की चपेट में आ गया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार तार में फंसने के बाद करंट लगने से उसकी मौत हो गई।
घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारी और वन अमला मौके पर पहुंच गया। वन विभाग की टीम द्वारा घटना स्थल का निरीक्षण कर पूरे मामले की जांच की जा रही है। जिस खेत के आसपास झटका तार लगाए जाने की बात सामने आई है, वह झिरमिटी सरपंच चंदन एक्का के परिवार से संबंधित भूमि बताई जा रही है। हालांकि तार किस तरह लगाया गया था, उसमें सुरक्षा मानकों का पालन हुआ था या नहीं और घटना की वास्तविक वजह क्या थी, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
शावक की मौत के बाद रातभर गूंजती रही हाथियों की चिंघाड़
स्थानीय लोगों के अनुसार हादसे के बाद हाथियों का दल काफी देर तक चिंघाड़ता रहा। रात करीब 10 बजे हुई घटना के बाद हाथियों की लगातार आवाजों से अलकापुरी मोहल्ले में रहने वाले लोगों की नींद उड़ गई। ग्रामीणों का कहना है कि पूरी रात हाथियों की चिंघाड़ सुनाई देती रही और लोग अपने घरों में ही दुबके रहे।
हाथियों के व्यवहार को लेकर स्थानीय लोगों में भी चिंता बनी रही, क्योंकि मृत शावक के आसपास उसका झुंड मौजूद था। वन विभाग की टीम ने मौके पर पहुंचकर स्थिति पर निगरानी रखी और हाथियों की गतिविधियों पर भी नजर रखी।
खेत बचाने का उपाय कहीं वन्यजीवों के लिए खतरा तो नहीं?
ग्रामीण क्षेत्रों में फसलों को जंगली जानवरों से बचाने के लिए खेतों के आसपास झटका तार लगाने का चलन बढ़ता जा रहा है। किसानों के लिए फसल बचाना बड़ी चुनौती है, लेकिन यदि बिजली या करंट वाले तार निर्धारित सुरक्षा मानकों के विपरीत लगाए जाएं तो यह इंसान और वन्यजीव दोनों के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।
अलकापुरी की घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि हाथियों के लगातार आवागमन वाले क्षेत्रों में खेतों के आसपास लगाए गए झटका तारों की निगरानी कौन कर रहा है और उनकी जांच कितनी नियमित रूप से होती है।
जंगल, खदान और बदलता हाथियों का रास्ता
इलाके में बढ़ती मानवीय गतिविधियों, जंगल के आसपास खेती और मकानों के विस्तार तथा कई क्षेत्रों में खनन गतिविधियों के कारण वन्यजीवों के आवागमन को लेकर लगातार चिंता जताई जाती रही है। जब जंगल का क्षेत्र और हाथियों के पुराने आवागमन वाले रास्ते प्रभावित होते हैं तो भोजन और पानी की तलाश में हाथियों का झुंड खेतों और बस्तियों के आसपास पहुंच सकता है।
इस स्थिति में किसान अपनी फसल बचाने के लिए सुरक्षा के अलग-अलग तरीके अपनाते हैं, वहीं हाथियों के लिए भी यह क्षेत्र लगातार जोखिम भरा होता जा रहा है। परिणाम यह है कि इंसान और हाथी दोनों आमने-सामने आने लगे हैं और छोटी-सी लापरवाही भी बड़ी घटना का कारण बन सकती है।
अब सबसे बड़ा सवाल क्या?
अलकापुरी में एक नन्हे हाथी की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या खेत के आसपास लगाए गए झटका तार में सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था? क्या हाथियों के लगातार विचरण की जानकारी होने के बावजूद ऐसे तारों की जांच की गई थी? क्या वन विभाग को खेतों में लगाए गए इन तारों की जानकारी थी?
जब क्षेत्र में करीब 27 हाथियों का दल लगातार घूम रहा था, तब हाथियों के संभावित रास्तों की सुरक्षा के लिए क्या व्यवस्था की गई थी? क्या हाथियों के पारंपरिक आवागमन वाले रास्तों को चिन्हित कर वहां इस तरह की जानलेवा बाधाओं को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था है?
हाथी के शावक की मौत वास्तव में खेत में लगाए गए झटका तार से हुई या किसी अन्य विद्युत तार/विद्युत स्रोत के संपर्क में आने से? क्या वन विभाग और विद्युत विभाग की संयुक्त जांच में तार, करंट के स्रोत और घटनास्थल की तकनीकी जांच कर यह स्पष्ट किया जाएगा कि मौत का वास्तविक कारण क्या था?
वहीं यह भी जांच का विषय है कि खेत में लगाया गया झटका तार किस माध्यम से संचालित हो रहा था, सामान्य बिजली कनेक्शन से, किसी अन्य विद्युत स्रोत से या बैटरी से? क्या झटका तार की वोल्टेज, कनेक्शन और सुरक्षा व्यवस्था की तकनीकी जांच की जाएगी, ताकि यह साफ हो सके कि शावक की मौत किन परिस्थितियों में हुई?
सबसे अहम सवाल क्या इस दर्दनाक घटना के बाद खेतों के आसपास लगाए गए झटका तारों की व्यापक जांच होगी? क्या जिम्मेदारी तय होगी? और क्या ऐसी व्यवस्था बनाई जाएगी कि किसान की फसल भी सुरक्षित रहे और जंगल से निकलने वाले बेजुबान वन्यजीव की जान भी खतरे में न पड़े?
इन सवालों के जवाब अब वन विभाग की जांच और प्रशासन की आगामी कार्रवाई से ही सामने आएंगे।
वन विभाग, प्रशासन एवं विद्युत विभाग से प्राप्त जानकारी और जांच के बाद ही हाथी के शावक की मौत के वास्तविक कारणों की स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी। जैसे-जैसे जांच से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आएगी, अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ आपको उससे अवगत कराता रहेगा।
मामले की आगे की जानकारी के लिए जुड़े रहिए हमारे साथ।
प्रदीप मिश्रा
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