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सच की तह तक

गांव की मिट्टी ने खींचा सात समंदर पार से! लमना पहुंच ब्रिटेन के मेहमानों ने देखा छत्तीसगढ़ का असली रंग

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गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


हाट-बाजार, खेत-खलिहान और ग्रामीण परिवारों के बीच बीता समय, संस्कृति और अपनत्व ने विदेशी मेहमानों को बनाया मुरीद

गौरेला-पेंड्रा-मरवाही ACGN:- छत्तीसगढ़ की पहचान अब केवल जंगल, जलप्रपात और बड़े पर्यटन स्थलों तक सीमित नहीं रह गई है। प्रदेश के गांवों की मिट्टी की खुशबू, सादगी भरी जिंदगी, लोक संस्कृति, स्थानीय खान-पान, हस्तशिल्प और लोगों का आत्मीय व्यवहार भी देश-दुनिया के पर्यटकों को अपनी ओर खींच रहा है।          इसी बदलती पर्यटन तस्वीर की खूबसूरत झलक गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के लमना विलेज स्टे में देखने को मिली, जहां ब्रिटेन से पहुंचे विदेशी मेहमानों ने गांव के जीवन को केवल देखा ही नहीं, बल्कि कुछ समय उसके बीच रहकर महसूस भी किया।
ब्रिटेन से आए श्री फ्रैंक रोजर मार्सटन और श्रीमती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन का लमना गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने पारंपरिक आत्मीयता के साथ तिलक लगाकर और ढोल-नगाड़ों की थाप के बीच स्वागत किया। विदेशी मेहमानों ने भी इस स्वागत को सहजता से स्वीकार किया और ग्रामीणों के साथ घुल-मिलकर छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को करीब से जानने का आनंद लिया।


         जब गांव की गलियों में उतरे विदेशी मेहमान
लमना में उनका अनुभव केवल विलेज स्टे में ठहरने तक सीमित नहीं रहा। उन्हें गांव की गलियों, खेत-खलिहानों और पारंपरिक ग्रामीण परिवेश से परिचित कराने के लिए ‘विलेज वॉक’ कराया गया। इस दौरान उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की, स्थानीय जीवनशैली को समझा और गांव के प्राकृतिक एवं सहज वातावरण का आनंद लिया।
ग्रामीण परिवारों, बच्चों, महिलाओं और स्थानीय लोगों के साथ बातचीत करते हुए विदेशी मेहमानों ने गांव की रोजमर्रा की जिंदगी को करीब से देखा। शहरों की तेज रफ्तार से अलग गांव का शांत वातावरण और लोगों की सहज आत्मीयता उनके लिए खास अनुभव बनकर सामने आई।


ग्रामीण हाट में दिखा गांव की अर्थव्यवस्था का असली रंग
लमना प्रवास के दौरान ग्रामीण हाट विदेशी मेहमानों के आकर्षण का विशेष केंद्र रहा। उन्होंने हाट में स्थानीय दुकानदारों और ग्रामीणों से बातचीत की तथा मिट्टी के बर्तन, बांस से बने सामान, घरेलू उपयोग की वस्तुएं, स्थानीय खाद्य सामग्री, सब्जियों और अन्य ग्रामीण उत्पादों को करीब से देखा।
हाट की चहल-पहल, स्थानीय उत्पादों की विविधता और ग्रामीणों के सहज व्यवहार ने विदेशी मेहमानों को भारतीय गांव के वास्तविक जीवन की एक अलग तस्वीर दिखाई। उनके लिए यह किसी पर्यटन स्थल को देखने से अलग ऐसा अनुभव था, जिसमें गांव की रोजमर्रा की जिंदगी सीधे सामने थी।


        यहां पर्यटक सिर्फ घूमता नहीं, गांव को जीता है
लमना विलेज स्टे की खासियत अनुभव आधारित ग्रामीण पर्यटन से जुड़ी दिखाई देती है। यहां आने वाला पर्यटक केवल किसी स्थान को देखकर वापस नहीं लौटता, बल्कि स्थानीय लोगों के साथ समय बिताकर ग्रामीण जीवन को समझने का अवसर प्राप्त करता है।
ब्रिटिश अतिथियों ने ग्रामीण परिवेश में समय बिताया, स्थानीय लोगों के साथ बैठकर बातचीत की और गांव की परंपराओं तथा जीवनशैली को नजदीक से जाना। ग्रामीणों की सादगी, प्राकृतिक वातावरण और आत्मीय व्यवहार ने उनके प्रवास को एक अलग अनुभव दिया।


छत्तीसगढ़ के पर्यटन में जुड़ रहा अनुभव का नया अध्याय
पर्यटन का बदलता स्वरूप अब केवल प्रसिद्ध स्थलों के भ्रमण तक सीमित नहीं है। पर्यटक स्थानीय खान-पान, लोक संस्कृति, हस्तशिल्प, ग्रामीण जीवन और समुदाय के साथ जुड़ने वाले अनुभवों को भी महत्व दे रहे हैं। ऐसे में होमस्टे और ग्रामीण पर्यटन पर्यटन अर्थव्यवस्था के नए अवसरों से जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।
इससे स्थानीय परिवारों, छोटे व्यवसायों, हस्तशिल्पकारों, ग्रामीण बाजारों, स्थानीय गाइडों और होमस्टे संचालकों के लिए आय और रोजगार के नए अवसर बनने की संभावना है।


            प्रकृति और संस्कृति के बीच बसा लमना
गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिला प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन की विविध संभावनाओं से समृद्ध है। यहां मैकल पर्वत श्रृंखला, जंगल, जलप्रपात और धार्मिक स्थलों के साथ शिवघाट मनौरा, जलेश्वर धाम, लक्ष्मणधारा, झोजा जलप्रपात और धनपुर जैसे स्थल पर्यटकों को आकर्षित करते हैं।
ऐसे परिवेश में लमना विलेज स्टे ग्रामीण जीवन और प्राकृतिक पर्यटन के बीच एक सेतु की भूमिका निभाता दिखाई देता है। यहां आने वाले पर्यटकों को प्रकृति के साथ-साथ स्थानीय समाज और संस्कृति से जुड़ने का अवसर मिलता है।


     बस्तर से लमना तक बदल रही पर्यटन की तस्वीर
छत्तीसगढ़ में बस्तर से लेकर लमना तक अनुभव आधारित पर्यटन की संभावनाएं लगातार सामने आ रही हैं। पर्यटकों की रुचि अब केवल किसी जलप्रपात, जंगल या ऐतिहासिक स्थल की तस्वीर लेने तक सीमित नहीं है। वे यह भी जानना चाहते हैं कि उस क्षेत्र के लोग कैसे रहते हैं, क्या खाते हैं, क्या बनाते हैं और उनकी संस्कृति किस तरह पीढ़ियों से आगे बढ़ रही है।
लमना में ब्रिटेन से आए मेहमानों का अनुभव इसी बदलाव की एक झलक है। उन्होंने गांव के बीच जाकर लोगों से मुलाकात की, ग्रामीण हाट में स्थानीय गतिविधियों को देखा और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण जिंदगी की सहजता को करीब से महसूस किया।
विदेशी मेहमानों के लिए यादगार बना ग्रामीण अपनापन
लमना प्रवास के दौरान श्री फ्रैंक रोजर मार्सटन और श्रीमती जेनिफर मार्गरेट रेनफ्रू मार्सटन ग्रामीणों के साथ तस्वीरें खिंचवाते, बच्चों से बातचीत करते और स्थानीय परिवारों के साथ समय बिताते नजर आए। ग्रामीण महिलाओं और बच्चों के साथ उनका सहज संवाद गांव के लोगों के लिए भी यादगार अनुभव बना।
विदेशी पर्यटकों का गांव तक पहुंचना ग्रामीण पर्यटन की उन संभावनाओं की ओर संकेत करता है, जहां स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक वातावरण खुद पर्यटन की ताकत बन सकते हैं। यदि ऐसे मॉडल को स्थानीय समुदाय की भागीदारी, पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय उत्पादों के बाजार से जोड़ा जाए, तो पर्यटन के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी गति मिल सकती है।
लमना में ब्रिटेन के मेहमानों की यह यात्रा केवल दो विदेशी पर्यटकों का गांव में प्रवास भर नहीं रही। यह उस बदलती सोच की तस्वीर भी है, जिसमें दुनिया के पर्यटक अब चमकते शहरों के साथ गांव की सादगी को भी अनुभव करना चाहते हैं।
प्रकृति के बीच संस्कृति, संस्कृति के बीच अपनापन और अपनत्व के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था-लमना विलेज स्टे में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण पर्यटन की यही तस्वीर विदेशी मेहमानों के अनुभव में दिखाई दी।


प्रदीप मिश्रा
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