अब गांव का फैसला गांव में! 2 अक्टूबर से ग्राम सभाओं में बनेगी विकसित ग्राम पंचायत योजना
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
बस्ती और वार्ड स्तर पर ग्रामीणों से सीधे लिए जाएंगे सुझाव, दिसंबर में ग्राम सभा करेगी योजना पर अंतिम मुहर
रायपुर ACGN:- गांव का विकास किस दिशा में होना चाहिए, वहां सबसे पहले कौन-सा काम जरूरी है और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किस तरह किया जाए—इन सवालों का जवाब अब ग्राम सभा में ग्रामीणों की भागीदारी से तय करने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है। प्रदेश में 2 अक्टूबर से विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू होगी। इस योजना के जरिए ग्रामीण अपने गांव की जरूरतों, समस्याओं और विकास की प्राथमिकताओं को सामने रख सकेंगे और इन्हीं सुझावों के आधार पर ग्राम पंचायत की आगामी विकास कार्ययोजना तैयार की जाएगी।
विकसित ग्राम पंचायत योजना को वीबी-जी राम जी अधिनियम, 2025 के अंतर्गत ग्राम पंचायत स्तर पर विकास कार्यों की योजना तैयार करने का प्रमुख माध्यम बनाया गया है। इसके तहत गांव में उपलब्ध प्राकृतिक एवं भौतिक संसाधनों, मौजूदा परिसंपत्तियों और विकास संबंधी कमियों का आकलन किया जाएगा। ग्रामीणों की भागीदारी से जरूरी कार्यों की पहचान होगी और ग्राम सभा से अनुमोदन मिलने के बाद इन योजनाओं को विकासखंड तथा जिला स्तर पर समेकित किया जाएगा।
2 अक्टूबर को ग्राम सभाओं से होगी शुरुआत
2 अक्टूबर को प्रदेश की ग्राम पंचायतों में आयोजित ग्राम सभाओं के दौरान योजना निर्माण की औपचारिक शुरुआत होगी। ग्रामीणों को ग्राम पंचायत से जुड़े आधारभूत आंकड़ों, मानचित्रों, अनुमेय कार्यों और योजना तैयार करने की पूरी प्रक्रिया की जानकारी दी जाएगी।
ग्राम सभा में गांव की विकास संबंधी कमियों के साथ-साथ जल बजट और ई-जल पोर्टल से प्राप्त अनुशंसित कार्यों की जानकारी भी साझा की जाएगी। इसके अलावा ऐसी परिसंपत्तियों की पहचान की जाएगी, जो गांव में भौतिक रूप से मौजूद हैं, लेकिन अभी तक डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं हो पाई हैं।
इसी दौरान बस्ती, वार्ड और ग्राम स्तर पर सहभागी ग्रामीण मूल्यांकन तथा सामुदायिक परामर्श की प्रक्रिया और उसकी समय-सीमा तय की जाएगी, ताकि अधिक से अधिक ग्रामीण योजना निर्माण से जुड़ सकें।
अक्टूबर-नवंबर में गांव-गांव सुनी जाएगी ग्रामीणों की बात
सितंबर माह में योजना निर्माण से जुड़ी प्रारंभिक तैयारियां पूरी की जाएंगी। संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाएगा तथा युक्तधारा पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न मानचित्र परतों के आधार पर ग्राम पंचायतों का आधारभूत डेटा तैयार किया जाएगा।
इसके बाद अक्टूबर और नवंबर में बस्ती एवं वार्ड स्तर पर ग्रामीणों के साथ बैठकें आयोजित की जाएंगी। इन बैठकों में ग्रामीण अपने गांव की समस्याओं, जरूरी सुविधाओं, उपलब्ध संसाधनों और प्रस्तावित विकास कार्यों को लेकर सुझाव दे सकेंगे।
इस प्रक्रिया के दौरान गांव में मौजूद परिसंपत्तियों का स्थल सत्यापन भी होगा। जो परिसंपत्तियां डिजिटल अभिलेखों में दर्ज नहीं हैं, उन्हें युक्तधारा पोर्टल पर दर्ज किया जाएगा। ग्रामीणों से मिले सुझावों और स्थानीय जरूरतों के आधार पर विकास की कमियों को चिन्हित किया जाएगा तथा प्रस्तावित कार्यों के संभावित स्थानों को डिजिटल मानचित्र पर दर्ज किया जाएगा।
दिसंबर में ग्राम सभा के सामने आएगा पूरा प्रारूप
दिसंबर माह में भूमि एवं क्षेत्र परिचय के आधार पर तैयार विकसित ग्राम पंचायत योजना का प्रारूप ग्राम सभा के सामने रखा जाएगा। इसमें प्रस्तावित विकास कार्यों, उनके संभावित स्थानों और संबंधित विवरण की जानकारी ग्रामीणों को दी जाएगी।
व्यक्तिगत लाभार्थियों से जुड़े प्रस्तावित कार्यों पर भी ग्राम सभा में चर्चा होगी। ग्रामीणों के सुझाव और विचार-विमर्श के बाद आवश्यक संशोधन किए जाएंगे और योजना को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद ग्राम सभा औपचारिक प्रस्ताव पारित कर विकसित ग्राम पंचायत योजना को अनुमोदित करेगी।
ग्राम सभा से मंजूर योजना को आगे की डिजिटल समेकन प्रक्रिया के लिए विकासखंड स्तर पर भेजा जाएगा।
15 जनवरी तक विकासखंड और जिला स्तर पर जुड़ेगी पूरी तस्वीर
ग्राम पंचायतों से अनुमोदित योजनाएं प्राप्त होने के बाद 15 जनवरी तक विकासखंड और जिला स्तर पर योजनाओं के समेकन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विकासखंड स्तर पर अलग-अलग ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को एकीकृत किया जाएगा। इसमें संबंधित क्रियान्वयन एजेंसियों और विभिन्न योजनाओं के अभिसरण से जुड़ी जानकारी भी शामिल की जाएगी।
इसके बाद विकासखंड स्तर पर तैयार समेकित योजनाओं को जिला स्तर पर एकीकृत किया जाएगा। इससे गांव की स्थानीय जरूरतों को विकासखंड और जिला स्तर की व्यापक विकास कार्ययोजनाओं से जोड़ने में मदद मिलेगी।
जल, रोजगार और अधोसंरचना पर रहेगा जोर
विकसित ग्राम पंचायत योजना में गांव की जरूरत के अनुसार जल सुरक्षा, ग्रामीण अधोसंरचना, आजीविका से जुड़ी अधोसंरचना और प्रतिकूल मौसमीय घटनाओं के प्रभाव को कम करने वाले कार्यों को प्राथमिकता देने की बात कही गई है।
योजना बनाते समय गांव में उपलब्ध प्राकृतिक और भौतिक संसाधनों का आकलन किया जाएगा। ग्रामीणों के सुझावों के आधार पर ऐसे कार्यों की पहचान होगी, जो स्थानीय जरूरतों को पूरा करने के साथ गांव के विकास को गति दे सकें।
ग्राम सभा की सहमति से तय होगा कौन-सा काम जरूरी है
इस पूरी प्रक्रिया में ग्राम सभा की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। ग्रामीणों की राय और स्थानीय प्राथमिकताओं के आधार पर प्रस्तावित कार्यों में जरूरत के मुताबिक नए कार्य जोड़े जा सकेंगे और अनुपयुक्त कार्यों को हटाया जा सकेगा।
प्रत्येक प्रस्तावित कार्य का स्थल सत्यापन किया जाएगा। इसके बाद समुदाय के साथ चर्चा कर कार्यों को अंतिम अनुमोदन के लिए ग्राम सभा के सामने रखा जाएगा।
विकास की योजना, गांव की जरूरत के हिसाब से
विकसित ग्राम पंचायत योजना का उद्देश्य ग्राम पंचायतों की विकास योजनाओं को केवल ऊपर से तय करने के बजाय ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों, स्थानीय संसाधनों और प्राथमिकताओं के अनुरूप तैयार करना है। योजना निर्माण में ग्राम सभा की सक्रिय भागीदारी से गांव के विकास से जुड़े फैसलों में स्थानीय लोगों की भूमिका बढ़ाने और प्रक्रिया को अधिक सहभागी एवं पारदर्शी बनाने का प्रयास किया जाएगा।
अब आने वाले महीनों में गांव की बस्ती और वार्ड स्तर पर होने वाली बैठकों में यह सामने आएगा कि ग्रामीण अपने गांव के लिए किन समस्याओं को सबसे पहले हल होते देखना चाहते हैं। 2 अक्टूबर से शुरू होने वाली यह प्रक्रिया दिसंबर में ग्राम सभा के अनुमोदन और 15 जनवरी तक विकासखंड एवं जिला स्तर पर समेकन के साथ अगले चरण में पहुंचेगी।
प्रदीप मिश्रा
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