मवेशी की मौत के बाद जंगल में बाघ की आहट! पगमार्क मिले, गांवों में बढ़ी सतर्कता
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सुकमा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
सुकमा वन क्षेत्र में संभावित बाघ की आवाजाही पर वन विभाग की नजर, कैमरा ट्रैप से निगरानी और ग्रामीणों को शाम के बाद जंगल से दूर रहने की सलाह
सुकमा ACGN:- सुकमा वनमंडल के सुकमा वन परिक्षेत्र में मवेशी के मारे जाने के बाद वन क्षेत्र में बाघ की संभावित मौजूदगी को लेकर वन विभाग सतर्क हो गया है। घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। पशु चिकित्सकों की टीम ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया। मौके पर बाघ के संभावित पगमार्क मिलने के बाद विभाग ने क्षेत्र में उसकी संभावित आवाजाही की निगरानी तेज कर दी है। हालांकि, बाघ की मौजूदगी की अंतिम पुष्टि के लिए विभाग द्वारा आगे निगरानी और साक्ष्यों का परीक्षण किया जा रहा है।

डीएफओ श्री अक्षय भोंसले के नेतृत्व में वन विभाग का अमला संभावित आवागमन वाले इलाकों का लगातार निरीक्षण कर रहा है। कोयाबेकुर, नीलावरम, फूलबगड़ी और केरलपाल पंचायत सहित आसपास के वन क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरती जा रही है। राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण द्वारा निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुरूप निगरानी और आवश्यक कार्रवाई की जा रही है।
संभावित प्रभावित क्षेत्रों में वन विभाग की टीमें तैनात की गई हैं। ग्रामीणों को सावधान करने के लिए मुनादी कराई जा रही है, वहीं बाघ की गतिविधियों की पुष्टि और निगरानी के लिए कैमरा ट्रैप भी लगाए गए हैं। पुलिस और जिला प्रशासन के सहयोग से क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है, ताकि किसी भी संभावित स्थिति से समय रहते निपटा जा सके।

वन विभाग ने ग्रामीणों से अपील की है कि शाम 4 बजे के बाद जंगल में जाने से बचें। यदि किसी जरूरी काम से जंगल जाना आवश्यक हो तो अकेले जाने के बजाय समूह में जाने की सलाह दी गई है। विभाग ने विशेष रूप से कहा है कि यदि बाघ दिखाई देता है तो उसके पास जाने, उसका पीछा करने, भीड़ लगाने, उसे भगाने या स्वयं पकड़ने का प्रयास बिल्कुल न किया जाए। ऐसी स्थिति में तत्काल वन विभाग को सूचना देना सुरक्षित कदम होगा।

विभाग ने ग्रामीणों से अपुष्ट फोटो, वीडियो या सूचनाओं को सोशल मीडिया पर प्रसारित नहीं करने की भी अपील की है। अधिकारियों का कहना है कि वन्यजीव की गतिविधियों को लेकर अफवाहों से अनावश्यक भय और खतरा दोनों बढ़ सकते हैं। इसलिए ग्रामीण केवल वन विभाग और जिला प्रशासन की आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें और किसी भी संदिग्ध घटना की सूचना तत्काल संबंधित अधिकारियों को दें।
वन विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जांच में मवेशी की मौत बाघ के हमले से होना प्रमाणित होता है तो शासन के प्रचलित नियमों के अनुसार पात्र पशुपालक को उचित मुआवजा दिया जाएगा। बाघ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची में संरक्षित वन्यजीव है और उसके शिकार, हत्या या शिकार के प्रयास पर कठोर दंड का प्रावधान है, जिसमें अधिकतम सात वर्ष तक के कारावास और जुर्माने का प्रावधान शामिल है।
फिलहाल वन विभाग की टीमें संभावित बाघ की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। विभाग ने ग्रामीणों से घबराने के बजाय सतर्क रहने, जंगल में सावधानी बरतने और किसी भी तरह की अफवाह पर विश्वास करने के बजाय तत्काल वन विभाग को सूचना देने की अपील की है।
प्रदीप मिश्रा
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