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जंगल की पगडंडी बनी पर्यटन की पाठशाला – 90 विद्यार्थियों ने करीब से जाना बैगा संस्कृति का अनकहा वैभव

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


विश्व पर्यटन सप्ताह में आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों ने जंगल, अमरावती गंगा और ‘माई का मंडप’ तक किया ट्रैकिंग अनुभव, समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल को समझा


थाड़पथरा ACGN:- किताबों में पर्यटन की परिभाषा पढ़ना अलग बात है, लेकिन जब वही पर्यटन जंगल की पगडंडियों, नदी के किनारे और किसी जनजातीय समुदाय के बीच जाकर समझ में आए तो उसका अनुभव पूरी तरह अलग हो जाता है। विश्व पर्यटन सप्ताह के अवसर पर ग्राम पंचायत थाड़पथरा स्थित मडहाउस परिसर में आयोजित ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन कार्यशाला एवं फील्ड विजिट में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जहां इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक के पर्यटन प्रबंधन विभाग के 90 विद्यार्थियों ने प्रकृति, संस्कृति और समुदाय के बीच पर्यटन की वास्तविक तस्वीर को करीब से समझा।
21 से 27 सितंबर तक मनाए जा रहे विश्व पर्यटन सप्ताह के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को ग्रामीण एवं जनजातीय पर्यटन की संभावनाओं से परिचित कराने के साथ स्थानीय संस्कृति और प्राकृतिक विरासत को समझने का व्यावहारिक अवसर देना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने केवल पर्यटन स्थल देखने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्थानीय परिवेश, समुदाय और प्रकृति के साथ पर्यटन के रिश्ते को भी करीब से महसूस किया।


       जंगल से ‘माई का मंडप’ तक बनी अनुभव की राह
फील्ड विजिट के दौरान विद्यार्थियों ने मडहाउस परिसर से घने जंगलों और अमरावती गंगा नदी के प्राकृतिक परिवेश से गुजरते हुए कमरापथरा मार्ग से ‘माई का मंडप’ तक ट्रैकिंग की। हरियाली से घिरे जंगल, शांत वातावरण और प्राकृतिक परिवेश विद्यार्थियों के लिए पर्यटन प्रबंधन की पुस्तकीय जानकारी को जमीन से जोड़ने का माध्यम बने।
ट्रैकिंग के दौरान विद्यार्थियों ने यह समझने का प्रयास किया कि किसी प्राकृतिक क्षेत्र को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करते समय केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ाना ही उद्देश्य नहीं होना चाहिए, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों और स्थानीय जीवनशैली को सुरक्षित रखते हुए पर्यटन गतिविधियों को आगे बढ़ाना भी जरूरी है।


            बैगा संस्कृति के करीब पहुंचे विद्यार्थी
थाड़पथरा की यात्रा विद्यार्थियों के लिए केवल प्रकृति दर्शन तक सीमित नहीं रही। उन्हें बैगा जनजाति की पारंपरिक जीवनशैली, रहन-सहन, खान-पान और गोदना परंपरा को करीब से समझने का अवसर मिला। प्रकृति के साथ बैगा समुदाय के सामंजस्यपूर्ण जीवन और पारंपरिक ज्ञान ने विद्यार्थियों के सामने जनजातीय संस्कृति की एक अलग तस्वीर रखी।
स्थानीय समुदाय से संवाद के दौरान विद्यार्थियों ने जाना कि जनजातीय पर्यटन को केवल जंगल, पहाड़ या प्राकृतिक स्थलों तक सीमित रखने के बजाय वहां की लोक परंपराओं, खान-पान, कला, संस्कृति और जीवनशैली से जोड़कर एक समृद्ध पर्यटन अनुभव तैयार किया जा सकता है।


        जब स्थानीय स्वाद से हुआ मेहमानों का स्वागत
थाड़पथरा पर्यटन समिति ने आईजीएनटीयू के विद्यार्थियों का आत्मीय स्वागत किया। समिति के सदस्यों ने उन्हें स्थानीय पारंपरिक व्यंजनों से परिचित कराया। स्थानीय भोजन के माध्यम से विद्यार्थियों ने ग्रामीण जीवनशैली और क्षेत्र की खाद्य परंपराओं को समझने का अवसर भी प्राप्त किया।
इस अनुभव ने यह भी सामने रखा कि समुदाय आधारित पर्यटन में स्थानीय लोगों की भूमिका केवल पर्यटकों की मेजबानी तक सीमित नहीं रहती। स्थानीय भोजन, परंपरा, संस्कृति और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण में समुदाय की भागीदारी पर्यटन अनुभव को अलग पहचान दे सकती है।


पर्यटन से गांव की अर्थव्यवस्था तक कैसे पहुंचेगा फायदा?
कार्यक्रम के दौरान पर्यटन नोडल अधिकारी डॉ. राहुल गौतम, ग्रामीण आजीविका मिशन के ब्लॉक मिशन प्रबंधक श्री अभिषेक जायसवाल और पर्यटन समन्वयक श्री हर्ष सोनी ने विद्यार्थियों को समुदाय आधारित पर्यटन मॉडल की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन को मजबूत बनाने के लिए स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी महत्वपूर्ण है। जब स्थानीय लोग पर्यटन गतिविधियों से जुड़ते हैं तो संस्कृति और प्राकृतिक विरासत के संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने तथा रोजगार और आजीविका के अवसर विकसित करने की संभावनाएं भी बढ़ती हैं।
विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग, सामुदायिक सहभागिता, जिम्मेदार पर्यटन और ग्रामीण एवं जनजातीय क्षेत्रों में पर्यटन विकास की संभावनाओं से भी अवगत कराया गया।
     किताब से निकलकर जमीन पर उतरी पर्यटन की पढ़ाई
विश्व पर्यटन सप्ताह के दौरान आयोजित यह फील्ड विजिट पर्यटन प्रबंधन के विद्यार्थियों के लिए कक्षा और किताबों से बाहर निकलकर वास्तविक परिस्थितियों को समझने का अवसर बना। प्रकृति के बीच ट्रैकिंग, स्थानीय समुदाय से संवाद और बैगा संस्कृति को करीब से देखने के अनुभव ने विद्यार्थियों को पर्यटन के सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक पहलुओं को समझने का व्यावहारिक आधार दिया।
कार्यक्रम का आयोजन पर्यटन प्रबंधन विभागाध्यक्ष डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. रोहित रविंद्र बोरलिकर, डॉ. जयप्रकाश नारायना एवं डॉ. दिनेश कुमार परस्ते के मार्गदर्शन में किया गया। इसमें थाड़पथरा पर्यटन समिति के सदस्यों की सक्रिय सहभागिता रही।
        थाड़पथरा में पर्यटन से ज्यादा मिली एक सीख
थाड़पथरा में आयोजित यह आयोजन प्रकृति, जनजातीय संस्कृति, पर्यटन शिक्षा और स्थानीय समुदाय को एक साथ जोड़ने वाली पहल के रूप में सामने आया। 90 विद्यार्थियों ने यहां केवल जंगल और प्राकृतिक स्थलों को नहीं देखा, बल्कि बैगा संस्कृति की विशिष्टता, स्थानीय जीवनशैली और समुदाय आधारित पर्यटन की संभावनाओं को करीब से समझा।
ऐसे प्रयास यह सवाल भी सामने रखते हैं कि क्या ग्रामीण और जनजातीय क्षेत्रों की असली ताकत केवल पर्यटन स्थल हैं, या फिर वहां की संस्कृति, परंपरा और स्थानीय लोगों की भागीदारी ही पर्यटन की सबसे बड़ी पहचान बन सकती है। जिम्मेदार और समुदाय आधारित दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ाया जाए तो पर्यटन स्थानीय विरासत को बचाने के साथ गांवों के लिए रोजगार और आजीविका का माध्यम भी बन सकता है।


प्रदीप मिश्रा
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