“शरीर से परे भी है कुछ? मानव ऊर्जा और आभामंडल के रहस्य पर विशेषज्ञों ने समझाया विज्ञान”
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मानव ऊर्जा और आभामंडल का रहस्य
रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संदर्भ में विशेषज्ञों ने समझाई मानव शरीर, मन, चेतना और ऊर्जा की अवधारणा; कार्यशाला में अधिकारियों एवं विशेषज्ञों की रही विशेष उपस्थिति
रायपुर ACGN:- मानव शरीर को हम जितना बाहर से देखते और समझते हैं, क्या उसके भीतर उससे कहीं अधिक गहरी कोई ऊर्जा और चेतना की व्यवस्था भी मौजूद है? मन, शरीर और चेतना के बीच आखिर किस तरह का संबंध है? भारतीय ज्ञान परंपरा में सदियों से इन सवालों पर चिंतन होता रहा है। इसी विषय को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संदर्भ से जोड़ते हुए रायपुर में ‘स्वयं से साक्षात्कार’ विषय पर विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया, जहां पंचकोश, षट्चक्र और आभामंडल जैसी अवधारणाओं पर विस्तार से चर्चा हुई।
छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग एवं छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यशाला में स्वामी महेश एवं डॉ. अनिल गुप्ता ने भारतीय परंपरा में वर्णित ऊर्जा, चेतना एवं आभामंडल की अवधारणाओं को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया। कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सदस्य श्री विवेक गनोदवाले, सचिव श्री सूर्यप्रकाश शुक्ला तथा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के प्रबंध निदेशक श्री एस.के. कटियार, श्री राजेश कुमार शुक्ला एवं श्री भीम सिंह कंवर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
अपरा से परा विद्या तक, ज्ञान की दो अलग दिशाएं
कार्यशाला में स्वामी महेश ने भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित अपरा विद्या और परा विद्या की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि अपरा विद्या वह ज्ञान है, जिसे इंद्रियों के माध्यम से देखकर, पढ़कर और समझकर जाना जा सकता है, जबकि परा विद्या का संबंध सूक्ष्म एवं आंतरिक अनुभूति से जोड़ा जाता है।
उन्होंने बताया कि भारतीय परंपरा में आत्मा और मन के माध्यम से शरीर की तंत्रिका प्रणाली तथा इंद्रियों के बीच समन्वय स्थापित होने की अवधारणा बताई गई है। इसी संदर्भ में उन्होंने मानव शरीर में वर्णित पंचकोश की अवधारणा को भी विस्तार से समझाया।
अन्नमय से आनंदमय कोष तक मानव अस्तित्व की अवधारणा
स्वामी महेश ने पंचकोश के पांच स्तरों, अन्नमय कोष, प्राणमय कोष, मनोमय कोष, विज्ञानमय कोष और आनंदमय कोष के बारे में जानकारी दी। भारतीय ज्ञान परंपरा में पंचकोश को मानव अस्तित्व को विभिन्न स्तरों पर समझने की अवधारणा के रूप में देखा जाता है।

कार्यशाला में बताया गया कि यह अवधारणा केवल भौतिक शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि प्राण, मन, ज्ञान और आनंद जैसे आंतरिक पक्षों को भी मानव जीवन की समझ से जोड़ती है। ‘स्वयं से साक्षात्कार’ के विषय के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने शरीर, मन और चेतना को एक व्यापक दृष्टिकोण से देखने की दिशा में जानकारी दी गई।
षट्चक्र और शरीर में ऊर्जा के संचार पर चर्चा
डॉ. अनिल गुप्ता ने मानव शरीर में ऊर्जा के संचार और भारतीय परंपरा में वर्णित षट्चक्र की अवधारणा पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति का अपना आभामंडल होता है और भारतीय परंपरा में आंतरिक ऊर्जा तथा चेतना के विकास को लेकर विस्तार से चर्चा की गई है।
उन्होंने मानव शरीर में ऊर्जा के संचार से जुड़ी अवधारणाओं को समझाते हुए बताया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में शरीर और चेतना को समझने के लिए विभिन्न सूक्ष्म अवधारणाओं का उल्लेख मिलता है। कार्यशाला में इन्हीं अवधारणाओं को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संदर्भ में समझाने का प्रयास किया गया।
क्या है आभामंडल की अवधारणा?
कार्यशाला में आभामंडल यानी व्यक्ति के चारों ओर माने जाने वाले ऊर्जा क्षेत्र की अवधारणा पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने भारतीय परंपरा में आंतरिक ऊर्जा, चेतना और व्यक्ति के सूक्ष्म अनुभवों से जुड़े विचारों की जानकारी दी।
इस दौरान प्रतिभागियों के सामने यह विषय रखा गया कि भारतीय ज्ञान परंपरा में मानव शरीर को केवल भौतिक संरचना के रूप में नहीं, बल्कि शरीर, मन और चेतना के व्यापक समन्वय के रूप में देखने की परंपरा रही है।
भारतीय परंपरा और आधुनिक विज्ञान के बीच संवाद का प्रयास
‘स्वयं से साक्षात्कार’ कार्यशाला का उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित मानव ऊर्जा एवं चेतना से संबंधित अवधारणाओं को आधुनिक संदर्भ में समझने का अवसर उपलब्ध कराना रहा। पंचकोश, षट्चक्र, मन, तंत्रिका प्रणाली, ऊर्जा और आभामंडल जैसे विषयों के माध्यम से मानव शरीर और आंतरिक चेतना को लेकर विभिन्न दृष्टिकोणों पर चर्चा की गई।
कार्यशाला में अधिकारियों और कर्मचारियों ने भी विषय से जुड़ी जानकारी प्राप्त की। इस तरह का आयोजन भारतीय परंपरा में मौजूद आत्मचिंतन और मानव जीवन से जुड़े विचारों को समकालीन संदर्भ में समझने के लिए संवाद का माध्यम बना।
इन अधिकारियों की रही विशेष मौजूदगी
कार्यशाला में छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत नियामक आयोग के सदस्य श्री विवेक गनोदवाले, सचिव श्री सूर्यप्रकाश शुक्ला तथा छत्तीसगढ़ स्टेट पावर कंपनीज़ के प्रबंध निदेशक श्री एस.के. कटियार, श्री राजेश कुमार शुक्ला एवं श्री भीम सिंह कंवर विशेष रूप से उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संचालन उपमहाप्रबंधक (जनसंपर्क) श्री गोविन्द पटेल ने किया। आयोग की संयुक्त निदेशक श्रीमती प्राची श्रीवास्तव ने कार्यशाला में उपस्थित अतिथियों एवं विशेषज्ञों का परिचय कराया।
‘स्वयं से साक्षात्कार’ कार्यशाला में पंचकोश से लेकर षट्चक्र और आभामंडल तक मानव शरीर, मन और चेतना से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। भारतीय ज्ञान परंपरा में वर्णित इन अवधारणाओं को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के संदर्भ में समझाने का यह प्रयास प्रतिभागियों के लिए मानव जीवन और स्वयं को समझने के एक अलग दृष्टिकोण का अवसर बना।
प्रदीप मिश्रा
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