डिग्री के बाद भी बेरोजगारी? हुनर और अनुभव को मिले मौका तो बदलेगी तस्वीर! कौशल और अनुभव से बदलते छत्तीसगढ़ की तस्वीर
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
नवा रायपुर में करीब 200 करोड़ की लागत से एनएसटीआई की स्थापना की तैयारी, 45 वर्ष तक के अभ्यर्थियों के लिए अवसरों का दायरा बढ़ाने का फैसला
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ की पहचान लंबे समय तक ‘धान के कटोरे’ के रूप में रही है, लेकिन बदलते समय के साथ प्रदेश की विकास यात्रा में नए आयाम जुड़ रहे हैं। खेती के साथ उद्योग, तकनीक के साथ कौशल और रोजगार के साथ उद्यमिता अब विकास की नई जरूरत बन चुके हैं। ऐसे में प्रदेश के युवाओं को आधुनिक कौशल से जोड़ने और अनुभवी लोगों की कार्यक्षमता का बेहतर उपयोग करने की दिशा में सरकार के हालिया निर्णय महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद के हालिया फैसलों में एक ओर नवा रायपुर अटल नगर में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट यानी एनएसटीआई की स्थापना का रास्ता साफ हुआ है, वहीं दूसरी ओर विभिन्न शासकीय एवं संबद्ध संस्थाओं में कार्यरत वर्गों के लिए अधिकतम आयु सीमा 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष किए जाने का निर्णय लिया गया है। इन फैसलों को कौशल और अनुभव दोनों को अवसर देने की दिशा में उठाए गए कदम के रूप में देखा जा रहा है।
अब डिग्री के साथ हुनर भी जरूरी
आज के दौर में केवल शैक्षणिक डिग्री रोजगार की गारंटी नहीं मानी जाती। उद्योगों की जरूरतें तेजी से बदल रही हैं और व्यावहारिक कौशल का महत्व लगातार बढ़ रहा है। इसी जरूरत को देखते हुए ग्राम तेंदुवा में नेशनल स्किल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट की स्थापना के लिए भारत सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता निदेशालय को 10 एकड़ भूमि निःशुल्क आवंटित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
करीब 200 करोड़ रुपए की लागत से विकसित होने वाले इस संस्थान में आधुनिक शैक्षणिक, प्रशासनिक और छात्रावास सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। यहां दीर्घकालीन पाठ्यक्रमों में हर वर्ष करीब एक हजार और अल्पकालीन प्रशिक्षण कार्यक्रमों में लगभग तीन हजार प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।
इसका मतलब यह है कि आने वाले समय में हजारों युवाओं को आधुनिक तकनीकी प्रशिक्षण हासिल करने का अवसर मिल सकता है। कोई प्रशिक्षण लेकर उद्योगों में रोजगार की राह तलाशेगा तो कोई अपने कौशल के आधार पर स्वरोजगार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
कौशल सिर्फ नौकरी नहीं, आत्मनिर्भरता का रास्ता
एनएसटीआई जैसे संस्थान की उपयोगिता केवल प्रशिक्षण तक सीमित नहीं है। बदलती तकनीक और उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप युवाओं को तैयार करना आज रोजगार की बड़ी चुनौती का हिस्सा है। यदि प्रशिक्षण बाजार की वास्तविक मांग से जुड़ा हो तो युवा नौकरी तलाशने वाले के साथ नौकरी देने वाले उद्यमी की भूमिका भी निभा सकता है।
गांव और छोटे कस्बों के युवाओं के लिए भी आधुनिक कौशल हासिल करने के अवसर बढ़ने से उनकी रोजगार क्षमता मजबूत हो सकती है। कौशल आधारित प्रशिक्षण उन्हें स्थानीय स्तर पर व्यवसाय शुरू करने और दूसरे युवाओं के लिए भी रोजगार के अवसर पैदा करने की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
38 से 45 वर्ष की आयु सीमा, अनुभव को मिला नया अवसर
दूसरा महत्वपूर्ण निर्णय अधिकतम आयु सीमा को 38 वर्ष से बढ़ाकर 45 वर्ष करना है। यह फैसला उन लोगों के लिए अवसरों का दायरा बढ़ा सकता है, जिनके पास वर्षों का कार्य अनुभव, व्यावहारिक ज्ञान और जिम्मेदारियों को संभालने की क्षमता है।
उम्र के साथ व्यक्ति के पास केवल वर्षों की संख्या नहीं बढ़ती, बल्कि काम को समझने और कठिन परिस्थितियों से निपटने का अनुभव भी बढ़ता है। किसी भी संस्था के लिए ऐसा अनुभव महत्वपूर्ण संसाधन हो सकता है। इसलिए अनुभवी लोगों को अधिक अवसर मिलने से उनकी क्षमता का बेहतर उपयोग संभव हो सकता है।
युवा ऊर्जा और अनुभवी सोच का मेल जरूरी
विकास की मजबूत व्यवस्था तब तैयार होती है, जब युवा ऊर्जा और अनुभवी सोच एक साथ काम करती है। युवा वर्ग नई तकनीक, नए विचार और नई कार्यशैली लेकर आता है, जबकि अनुभवी लोग जमीनी परिस्थितियों और चुनौतियों से निपटने की व्यावहारिक समझ रखते हैं।
एक ओर एनएसटीआई युवाओं को आधुनिक कौशल का मंच देने की दिशा में कदम है, तो दूसरी ओर आयु सीमा बढ़ाने का निर्णय अनुभवी वर्ग की क्षमता को अधिक अवसर देने की कोशिश के रूप में देखा जा सकता है। दोनों पहल मिलकर प्रदेश की मानव पूंजी को मजबूत करने की दिशा में भूमिका निभा सकती हैं।
क्या हुनर और अनुभव से बदलेगा रोजगार का भविष्य?
छत्तीसगढ़ का भविष्य केवल उसकी प्राकृतिक संपदा से तय नहीं होगा। असली ताकत प्रदेश के लोगों की क्षमता, कौशल, मेहनत और अनुभव में होगी। जब युवाओं को आधुनिक प्रशिक्षण मिलेगा, अनुभवी लोगों को अपनी क्षमता साबित करने का अवसर मिलेगा और कौशल को उद्योग तथा बाजार से जोड़ा जाएगा, तभी विकास का असर आम लोगों के जीवन में दिखाई देगा।
नवा रायपुर में प्रस्तावित एनएसटीआई और 45 वर्ष तक अवसरों का विस्तार इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा सकते हैं। अब चुनौती इन फैसलों को प्रभावी ढंग से जमीन पर उतारने की होगी, ताकि प्रशिक्षण वास्तव में रोजगार से जुड़े, अनुभव का सही उपयोग हो और गांव-कस्बों के युवाओं तक अवसर पहुंच सकें। तभी कौशल से रोजगार, अनुभव से अवसर और अवसर से आत्मनिर्भरता की राह मजबूत होगी।
प्रदीप मिश्रा
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