नशे के नेटवर्क पर शिकंजा कसने पुलिस को मिशन मोड में काम करने के निर्देश
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कवर्धा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
एनडीपीएस मामलों की विवेचना मजबूत करने राजनांदगांव रेंज स्तरीय कार्यशाला, उप मुख्यमंत्री ने कहा – स्रोत से लेकर अंतिम तस्कर तक पहुंचे पुलिस
कवर्धा ACGN:- छत्तीसगढ़ में नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पुलिस को अब केवल छोटे तस्करों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहने, बल्कि नशे के पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़कर उसके स्रोत और अंतिम संचालकों तक पहुंचने पर जोर दिया गया है। इसी उद्देश्य से कवर्धा स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट विद्यालय में एनडीपीएस एक्ट से जुड़े मामलों की विवेचना को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए राजनांदगांव रेंज स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई।
कार्यशाला का शुभारंभ उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री तथा कवर्धा विधायक विजय शर्मा ने भारत माता और छत्तीसगढ़ महतारी के तैलचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान राजनांदगांव रेंज के पुलिस महानिरीक्षक अजय यादव, पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव सहित रेंज के पुलिस अधिकारी और विवेचना अधिकारी मौजूद रहे।

गिरफ्तारी से आगे बढ़कर नेटवर्क तोड़ने पर जोर
उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि नशीले पदार्थों के निर्माण, बिक्री, परिवहन, आयात-निर्यात और भंडारण से जुड़े पूरे नेटवर्क को तोड़ना जरूरी है। उनका जोर इस बात पर रहा कि एनडीपीएस के मामलों में कार्रवाई केवल आरोपी को पकड़ने तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि विवेचना इतनी मजबूत हो कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय में दोषसिद्धि सुनिश्चित हो सके।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों से कहा कि गवाह उपलब्ध नहीं होने जैसी परिस्थितियों में भी वैज्ञानिक और तकनीकी साक्ष्यों का बेहतर उपयोग किया जाए। आखिर किसी आरोपी को पकड़ लेना ही पूरी कार्रवाई क्यों मानी जाए, जब उसके पीछे काम कर रहे नेटवर्क तक पहुंचना भी उतना ही जरूरी है?
कहां से आया नशा और कहां जाना था, यह पता करना जरूरी
कार्यशाला में पुलिस महानिरीक्षक अजय यादव ने एनडीपीएस मामलों की विवेचना, साक्ष्य संकलन और न्यायालय में दोषसिद्धि से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर अधिकारियों को मार्गदर्शन दिया।
उन्होंने कहा कि नशीले पदार्थों की तस्करी में गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के साथ उनके लोकेशन, संपर्क और आवागमन की जानकारी की तस्दीक की जानी चाहिए। जांच का उद्देश्य केवल यह पता लगाना नहीं होना चाहिए कि पकड़ा गया व्यक्ति कौन है, बल्कि यह भी सामने आना चाहिए कि नशीला पदार्थ कहां से आया और कहां तक पहुंचाया जाना था।
यही जानकारी तस्करी की पूरी श्रृंखला तक पहुंचने में महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसे में पुलिस को सामने दिखाई देने वाले आरोपी से आगे बढ़कर उन लोगों तक पहुंचने की कोशिश करनी होगी, जो इस अवैध कारोबार को संचालित या वित्तपोषित कर रहे हो सकते हैं।

तकनीकी साक्ष्य बन सकते हैं मजबूत आधार
कार्यशाला में एनडीपीएस मामलों की विवेचना के दौरान आने वाली व्यवहारिक चुनौतियों, साक्ष्य संकलन, तकनीकी साक्ष्यों के उपयोग, दस्तावेजी प्रक्रिया और न्यायालय में दोषसिद्धि के लिए आवश्यक बिंदुओं पर चर्चा की गई।
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि आवश्यकता के अनुसार सीसीटीवी कैमरों और अन्य आधुनिक तकनीकी साधनों का उपयोग किया जाना चाहिए। जहां नशीले पदार्थों से संबंधित गतिविधियों या अवशेषों की जानकारी मिले, वहां उसकी तस्दीक कराई जाए और जरूरत के मुताबिक सूचना तंत्र को मजबूत किया जाए।
नशे के खिलाफ लड़ाई को रूटीन नहीं, मिशन मानें
विजय शर्मा ने कहा कि एनडीपीएस एक्ट के तहत कार्रवाई केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं है। यह देश, समाज, युवाओं और आने वाली पीढ़ी को नशे के खतरे से बचाने की जिम्मेदारी भी है।
उन्होंने पुलिस अधिकारियों और जवानों से कहा कि नशे के अवैध कारोबार के विरुद्ध कार्रवाई को सामान्य या रूटीन काम मानने के बजाय मिशन के रूप में लेकर कार्य किया जाए। प्रत्येक क्षेत्र में ठोस और सकारात्मक परिणाम सामने लाने की दिशा में काम होना चाहिए।
सवाल यह भी है कि यदि नशे का कारोबार युवाओं और परिवारों को प्रभावित कर रहा है, तो केवल बीच के तस्करों पर कार्रवाई से क्या यह समस्या पूरी तरह खत्म हो सकती है? पुलिस के सामने चुनौती यही है कि वह नशे की आपूर्ति की जड़ तक पहुंचे और उस पूरी श्रृंखला को तोड़े।

गांजे के स्रोतों की पहचान पर भी फोकस
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में गांजे की तस्करी के कई मामलों में दूसरे राज्यों से जुड़े स्रोत सामने आए हैं। सरकार आधुनिक तकनीक के माध्यम से गांजे की अवैध खेती और तस्करी के स्रोतों की पहचान करने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक और पुलिस की जमीनी सक्रियता को साथ लेकर चलने से नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाया जा सकता है। इसके लिए सूचना तंत्र, तकनीकी निगरानी और गुणवत्तापूर्ण विवेचना के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है।
दोषसिद्धि के लिए साक्ष्य की गुणवत्ता सबसे अहम
उप मुख्यमंत्री ने कहा कि न्यायालय में दंड उपलब्ध कराए गए साक्ष्यों के आधार पर निर्धारित होता है। इसलिए एनडीपीएस मामलों में प्रत्येक विवेचना अधिकारी द्वारा किए जाने वाले साक्ष्य संकलन की गुणवत्ता बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने पर जोर दिया कि जांच प्रक्रिया में आवश्यक दस्तावेजी और वैज्ञानिक साक्ष्यों को उचित तरीके से संकलित किया जाए, ताकि प्रकरण न्यायालय में मजबूती के साथ प्रस्तुत हो सके।

उत्कृष्ट कार्य करने वाले पुलिसकर्मी सम्मानित
कार्यशाला के दौरान एनडीपीएस एक्ट के मामलों में बेहतर कार्य करते हुए आरोपियों को दोषसिद्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
कार्यक्रम के अंत में पुलिस अधीक्षक जितेंद्र कुमार यादव ने आभार व्यक्त करते हुए कहा कि कार्यशाला से मिले मार्गदर्शन को पुलिस अधिकारी और विवेचना अधिकारी अपने कार्यक्षेत्र में लागू करेंगे तथा नशे के अवैध कारोबार पर प्रभावी अंकुश लगाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता से कार्य करेंगे।
नशे के खिलाफ यह लड़ाई केवल पुलिस की कार्रवाई तक सीमित नहीं है। पुलिस को नेटवर्क की जड़ तक पहुंचना होगा, वहीं समाज को भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना देने और युवाओं को नशे से दूर रखने में अपनी भूमिका निभानी होगी। अब देखना यह होगा कि कार्यशाला में दिए गए निर्देश जमीनी कार्रवाई में कितने प्रभावी रूप से दिखाई देते हैं और नशे के पूरे नेटवर्क पर वास्तव में कितना शिकंजा कसता है।
प्रदीप मिश्रा
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