“07 अगस्त की शिकायत के बाद भी नहीं जागा विभाग! 07 सितंबर को फिर लाखों की चोरी, ढेलवाडीह स्कूल में आखिर क्या चल रहा है?”
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
ढेलवाडीह स्कूल में लाखों की चोरी का रहस्य गहराया, दो बार टूटा ताला फिर भी जिम्मेदारों को खबर नहीं?
पहले खेल सामग्री और कैमरे गायब, फिर लैपटॉप-डेस्कटॉप व प्रोजेक्टर पर हाथ साफ; प्राचार्य ने थाने में दी सूचना, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी बोले – “जानकारी नहीं है”। स्कूल में दो बार चोरी, सुरक्षा और भौतिक सत्यापन पर सवाल
कोरबा ACGN:- कटघोरा विकासखंड के स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय ढेलवाडीह में लगातार चोरी की घटनाओं ने स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था, प्रभार हस्तांतरण और भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान प्राचार्य के कथन के अनुसार प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रभार लेने के बाद भी स्कूल की सामग्री का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया था।

पहली चोरी में खेल सामग्री सहित सामान पार
स्कूल में पहली चोरी 6 अगस्त 2026 को होने की जानकारी सामने आई। इस दौरान स्कूल का ताला तोड़कर क्रिकेट बैट, गेंद, बैडमिंटन रैकेट, स्टंप, हॉकी स्टिक, वजन मशीन सहित खेल सामग्री और अन्य सामान चोरी किए जाने की बात कही गई।

स्कूल के सीसीटीवी की व्यवस्था तथा परिसर में शाम के समय बाहरी लोगों के जमावड़े को लेकर भी सवाल उठे। घटना की सूचना पुलिस और संबंधित अधिकारियों को दिए जाने की बात सामने आई।

दूसरी चोरी में लाखों का सामान और तड़ित चालक भी गायब
07 सितंबर 2026 को थाना कटघोरा को भेजे गए दूसरे पत्र में विद्यालय परिसर से कई महत्वपूर्ण सामान चोरी होने की जानकारी दी गई। पत्र के अनुसार अज्ञात चोरों ने विद्यालय परिसर में प्रवेश कर ताला तोड़कर सामान पार कर दिया।


दिए गए विवरण के अनुसार 2 लैपटॉप की अनुमानित कीमत 60 हजार रुपये, 2 डेस्कटॉप की कीमत करीब 1 लाख 60 हजार रुपये, 2 प्रोजेक्टर की कीमत करीब 50 हजार रुपये, 1000 लीटर का एक सिनटेक्स करीब 12 हजार रुपये तथा एक डबल बैटरी यूपीएस करीब 10 हजार रुपये बताया गया है। इसके अलावा 10 पंखे, दो कैमरे और दो स्ट्रीट लाइट भी चोरी होने की जानकारी सामने आई है।

केवल इन दर्ज अनुमानित कीमतों को देखें तो लैपटॉप, डेस्कटॉप, प्रोजेक्टर, सिनटेक्स और यूपीएस की राशि ही करीब 2.92 लाख रुपये बैठती है। इसके अतिरिक्त पंखे, कैमरे और स्ट्रीट लाइट की कीमत अलग है। ऐसे में विद्यालय से चोरी हुए सामान की वास्तविक कीमत इससे कहीं अधिक होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यानी दूसरी चोरी में स्कूल की महत्वपूर्ण एवं उपयोगी संपत्ति बड़े पैमाने पर गायब होने की बात सामने आई है।

दोनों घटनाओं को लेकर पुलिस थाने में रिपोर्ट किए जाने की जानकारी है। अब जांच में यह सामने आना बाकी है कि स्कूल की सुरक्षा व्यवस्था को भेदकर चोरी कैसे हुई और चोरी गया सामान कहां गया।
वर्तमान प्राचार्य का कथन : प्रभार मिला, लेकिन भौतिक सत्यापन नहीं हुआ

वर्तमान प्राचार्य श्रीमती अंशु मानिकपुरी के अनुसार उन्होंने 2 जुलाई 2026 को स्कूल में प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रभार संभाला था। उनका कहना है कि प्रभार संभालने के बाद किसी भी सामान का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया।
प्राचार्य के अनुसार उन्होंने भौतिक सत्यापन कराने के लिए पुनर्नियुक्त प्राचार्य श्री पी.एन. उइके से बार-बार कहा, लेकिन 7 सितंबर 2026 तक भी किसी सामान का भौतिक सत्यापन नहीं कराया गया। उनका यह भी कहना है कि कार्यालयीन स्टाफ द्वारा भी किसी सामान का भौतिक सत्यापन प्रभारी प्राचार्य को नहीं कराया गया था।
ऐसे में सवाल यह है कि प्रशासनिक एवं वित्तीय प्रभार सौंपते समय स्टॉक रजिस्टर में दर्ज सामग्री और स्कूल में वास्तव में मौजूद सामान का मिलान क्यों नहीं कराया गया?
पूर्व प्राचार्य की भूमिका भी जांच के दायरे में
वर्तमान प्राचार्य के कथन के अनुसार भौतिक सत्यापन के लिए पूर्व/पुनर्नियुक्त प्राचार्य पी.एन. उइके से बार-बार आग्रह किया गया, लेकिन सत्यापन लंबित रहा। हालांकि इससे किसी व्यक्ति की चोरी में संलिप्तता साबित नहीं होती। वास्तविक जिम्मेदारी तय करने के लिए प्रभार संबंधी दस्तावेज, स्टॉक रजिस्टर और विभागीय प्रक्रिया की जांच जरूरी है।

स्कूल की आंतरिक व्यवस्था पर भी सवाल
वर्तमान प्राचार्य ने पिछले करीब दो महीनों में स्कूल में तीन से चार चोरी की घटनाएं होने की बात कही है। ताला तोड़ने, सीसीटीवी वायर काटने और दरवाजा तोड़कर सामान ले जाने की बात भी उनके कथन में सामने आई है। वहीं स्कूल में शिक्षकों के बीच आपसी सामंजस्य को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में स्कूल की प्रशासनिक एवं सुरक्षा व्यवस्था की विभागीय समीक्षा जरूरी हो जाती है।

डीईओ के बयान से विभागीय जिम्मेदारी पर सवाल
मामले में जिला शिक्षा अधिकारी से जानकारी लेने पर उन्होंने कहा “मुझे जानकारी नहीं है। यदि थाने में रिपोर्ट की गई है तो पुलिस जांच करेगी।”
डीईओ का यह जवाब विभागीय स्तर पर जिम्मेदारी तय करने के बजाय मामले को पुलिस जांच तक सीमित करता हुआ दिखाई देता है।

जिला शिक्षा अधिकारी का यह जवाब अपने आप में कई सवाल खड़े करता है। यदि विद्यालय द्वारा पुलिस को दी गई शिकायत में जिला शिक्षा अधिकारी को प्रतिलिपि भेजे जाने का उल्लेख है, तो विभागीय स्तर पर इसकी जानकारी क्यों नहीं दिखाई दे रही? क्या संबंधित पत्र कार्यालय तक पहुंचा या नहीं? यदि पहुंचा तो उस पर क्या कार्रवाई हुई? और यदि नहीं पहुंचा तो विद्यालय द्वारा भेजे गए पत्रों की विभागीय निगरानी व्यवस्था कितनी प्रभावी है?
यह सवाल किसी व्यक्ति को दोषी ठहराने के लिए नहीं, बल्कि सरकारी विद्यालय की संपत्ति और बच्चों से जुड़ी शैक्षणिक व्यवस्था की जवाबदेही तय करने के लिए उठना स्वाभाविक है।
हालांकि पुलिस में शिकायत होने के बाद जांच पुलिस का दायित्व है, लेकिन स्कूल की संपत्ति, स्टॉक सत्यापन, प्रभार हस्तांतरण और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करना शिक्षा विभाग की प्रशासनिक जिम्मेदारी से अलग विषय है।

अब सवाल यही है कि पहली चोरी के बाद सुरक्षा क्यों नहीं बढ़ाई गई, प्रभार लेने के बाद भौतिक सत्यापन क्यों नहीं हुआ और दूसरी चोरी में लाखों की सामग्री के साथ तड़ित चालक तक कैसे गायब हो गया?
शिक्षा विभाग ने फिलहाल मामले की जानकारी से अनभिज्ञता जताते हुए जांच की जिम्मेदारी पुलिस पर छोड़ दी है, जिससे विभागीय स्तर पर जवाबदेही को लेकर सवाल जरूर खड़े होते हैं। हालांकि वास्तविकता क्या है, चोरी की घटनाओं में चूक कहां हुई और इसके लिए कौन जिम्मेदार है, यह अब पुलिस की जांच और आगे होने वाली विभागीय जांच से ही स्पष्ट होगा।
प्रदीप मिश्रा
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