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जनता के सवालों के सामने मंत्री की दो टूक, “हाँ, सड़कें बेहद खराब हैं”

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अंबिकापुर, सरगुजा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

“हाँ, सड़कें बेहद खराब हैं”  विरोध के बीच समस्या से मुंह मोड़ने के बजाय जनता के सामने मंत्री की साफ स्वीकारोक्ति बनी चर्चा का विषय

अंबिकापुर ACGN:- सरगुजा में सड़क की बदहाली को लेकर कैबिनेट मंत्री राजेश अग्रवाल के बंगले का घेराव करने पहुंचे लोगों के बीच उस समय स्थिति कुछ अलग नजर आई, जब मंत्री ने समस्या से बचने या जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने के बजाय सड़कों की वास्तविक स्थिति को स्वीकार किया। मंत्री ने साफ शब्दों में कहा, “हाँ, सड़कें बेहद खराब हैं।”
         घेराव के बीच नहीं टाला जनता का सवाल
आम तौर पर किसी जनप्रतिनिधि के आवास का घेराव राजनीतिक दबाव और विरोध के रूप में देखा जाता है। ऐसे माहौल में विवाद बढ़ने की आशंका भी रहती है, लेकिन यहां सड़क की समस्या को लेकर पहुंचे लोगों के सामने मंत्री की स्वीकारोक्ति चर्चा का विषय बन गई।
मंत्री के समर्थकों का कहना है कि इसे सरगुजिहापन और जनता से सीधे संवाद की भावना के रूप में देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक जनप्रतिनिधि का काम केवल सरकार की उपलब्धियां गिनाना नहीं, बल्कि जनता की परेशानी को सुनना, उसे स्वीकार करना और समाधान की दिशा में काम करना भी है।
               खराब सड़कें बनीं जनता की परेशानी
सड़कों की खराब स्थिति को लेकर ग्रामीणों और आम नागरिकों में नाराजगी स्वाभाविक है। खराब सड़कों के कारण आवागमन प्रभावित होता है और बरसात के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है। लंबे समय से बेहतर सड़क और सुगम आवागमन की मांग उठती रही है।
ऐसे में मंत्री द्वारा स्वयं सड़कों की खराब स्थिति स्वीकार किए जाने के बाद अब लोगों की उम्मीदें भी बढ़ गई हैं। जनता चाहती है कि यह स्वीकारोक्ति केवल बयान बनकर न रह जाए, बल्कि संबंधित विभागों के स्तर पर जल्द ठोस कार्रवाई दिखाई दे।
              विरोध के बीच संवाद की राजनीति
राजनीतिक जानकारों की नजर में किसी मंत्री के आवास के घेराव जैसी स्थिति में जनता के सवालों से सीधे संवाद करना लोकतांत्रिक व्यवस्था में महत्वपूर्ण माना जाता है। जनता नाराज है तो उसकी नाराजगी सुनना भी जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
मंत्री समर्थकों का कहना है कि समस्या को स्वीकार करना कमजोरी नहीं, बल्कि जवाबदेही की भावना है। यदि सड़क खराब है तो उसे बेहतर बनाने के लिए सरकार और संबंधित विभाग को ही आगे आना होगा।
               अब स्वीकारोक्ति से आगे की बारी
मंत्री ने जब जनता के सामने सड़कों की बदहाली स्वीकार कर ली है, तो अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सुधार कब शुरू होगा? किन सड़कों को प्राथमिकता दी जाएगी और लोगों को कब तक बेहतर आवागमन की सुविधा मिल पाएगी?
राजनीति में बयान और आश्वासन अक्सर सुनने को मिलते हैं, लेकिन जनता के सामने किसी समस्या को स्वीकार करने के बाद उसे जमीन पर दूर करना ही असली परीक्षा होती है। सरगुजा की जनता अब मंत्री की इस साफ स्वीकारोक्ति को सड़क निर्माण और मरम्मत के रूप में जमीन पर उतरते हुए देखना चाहेगी।

प्रदीप मिश्रा
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