भगवान जगन्नाथ की जमीन पाकिस्तान तक? मंत्री के दावे से उठे सवाल
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भुवनेश्वर, ओड़िशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज, ओड़िशा ब्यूरो
अखंड भारत के दौर से जुड़ी संपत्तियों का दावा, सिंध में जमीन के रिकॉर्ड की बात सामने आने के बाद बढ़ी चर्चा
भुवनेश्वर ACGN:- भगवान श्री जगन्नाथ जी की जमीन और संपत्तियों को लेकर ओड़िशा में एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। ओड़िशा के कानून मंत्री पृथ्वीराज हरिचंदन ने दावा किया है कि भगवान श्री जगन्नाथ जी की संपत्तियां केवल वर्तमान भारत की सीमाओं तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत तक भी इनके रिकॉर्ड होने की जानकारी सामने आई है।
सिंध में जमीन का दावा कितना सही? मंत्री के अनुसार पाकिस्तान के सिंध प्रांत में भगवान श्री जगन्नाथ जी के नाम पर जमीन दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इस दावे के बाद श्री जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी ऐतिहासिक संपत्तियों और उनके पुराने राजस्व रिकॉर्ड को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि सिंध में बताई जा रही जमीन को लेकर अभी विस्तृत दस्तावेज सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं, इसलिए इसकी वास्तविक स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
कितनी जमीन है और रिकॉर्ड कहां है? इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि सिंध प्रांत में भगवान श्री जगन्नाथ जी के नाम पर बताई जा रही जमीन का क्षेत्रफल कितना है, वह किस स्थान पर स्थित है, किस राजस्व रिकॉर्ड में उसका उल्लेख है और कब से यह संपत्ति भगवान श्री जगन्नाथ जी के नाम पर दर्ज है? इसके साथ ही वर्तमान में उस जमीन की कानूनी और भौतिक स्थिति क्या है, यह भी स्पष्ट होना बाकी है।
देश-विदेश में फैली संपत्तियों का इतिहास श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन से संबंधित उपलब्ध जानकारी के अनुसार भगवान श्री जगन्नाथ जी की संपत्तियां केवल ओड़िशा तक सीमित नहीं रही हैं। अलग-अलग समय में देश के अन्य राज्यों और विभिन्न स्थानों पर भी मंदिर से जुड़ी जमीन और संपत्तियों के चिह्नित होने की जानकारी सामने आती रही है। ऐसे में पाकिस्तान के सिंध प्रांत में संपत्ति के दावे ने इन ऐतिहासिक संपत्तियों के रिकॉर्ड को व्यवस्थित रूप से सामने लाने की जरूरत पर भी सवाल खड़ा किया है।
पुराने रिकॉर्ड की जांच से खुलेगा सच जानकारों के मुताबिक यदि सिंध में भगवान श्री जगन्नाथ जी के नाम पर जमीन का आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद है, तो उसके पुराने दस्तावेज, राजस्व अभिलेख और संपत्ति के इतिहास की जांच महत्वपूर्ण होगी। इससे यह भी पता चल सकेगा कि जमीन किस परिस्थिति में मंदिर के नाम दर्ज हुई और वर्तमान समय में उसका दर्जा क्या है। फिलहाल मंत्री के बयान के आधार पर सामने आए इस दावे पर विस्तृत आधिकारिक जानकारी का इंतजार है।
प्रदीप मिश्रा
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