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स्वदेशी मेले में सजी साहित्य की महफिल, कवियों ने बांधा समां

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बरहमपुर, ओड़िशा

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनिल कुमार चौधरी, गंजाम

दिगपहंडी साहित्य संसद और आम भाषा साहित्य संसद के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य सभा, गंजाम के साहित्य और संस्कृति पर हुआ मंथन

बरहमपुर ACGN:- बरहमपुर के उमा चरण इंजीनियरिंग स्कूल मैदान में राज्य खादी एवं ग्रामीण विकास विभाग की देखरेख में नौ दिवसीय स्वदेशी उद्योग मेले का आयोजन किया जा रहा है। मेले के सातवें दिन दिगपहंडी साहित्य संसद और आम भाषा साहित्य संसद के संयुक्त तत्वावधान में साहित्य सभा का आयोजन किया गया। साहित्यिक आयोजन में कवियों, लेखकों, पत्रकारों और साहित्य एवं संस्कृति के जानकारों ने हिस्सा लेकर गंजाम की साहित्यिक एवं सांस्कृतिक विरासत पर विचार रखे।
        साहित्य और संस्कृति पर हुआ विचार-विमर्श
कार्यक्रम की अध्यक्षता आम भाषा साहित्य संसद के संस्थापक-संपादक डॉ. गजानन त्रिपाठी ने की। अध्यक्ष के रूप में शिव प्रसाद दास उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि के रूप में ओड़िया भाषा, साहित्य एवं संस्कृति के शोधकर्ता डॉ. बाईमनु चर्ची ने शिरकत की। मुख्य वक्ता गंजाम जिला लेखक फोरम के अध्यक्ष हाड़िबंधु माली रहे।
सम्मानित अतिथि के रूप में वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिवक्ता अनंत नारायण मोहंती मौजूद रहे। कवि डॉ. अश्विनी कुमार महापात्र, संसद संपादक दीनबंधु श्रीपल्लव, सह-संपादक संभव कुमार त्रिपाठी और कवि राजेश कुमार पात्र सहित अन्य साहित्यकार मंच पर उपस्थित रहे।


                कवियों ने रचनाओं से बांधा समां
साहित्य सभा में डॉ. विजय कुमार महाराणा, विरुपाक्ष दास, संकर्षण त्रिपाठी, पद्मिनी मिश्रा, भिखारी चरण नायक, प्रेमशीला नंद, विजय चंद्र नंद, पद्मनाभ रथ, शिव प्रसाद रथ, परेश रथ, सुजाता रात्रि सतपथी, पितवास त्रिपाठी, रोशनी साहू, समीक्षा रानी देवी और सताशिनी साहू सहित अनेक कवियों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया।
कविताओं के माध्यम से साहित्य, समाज, संस्कृति और क्षेत्रीय पहचान से जुड़े विभिन्न विषयों को सामने रखा गया। साहित्य प्रेमियों ने कवियों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक आनंद लिया।
            लोक साहित्य की समृद्ध परंपरा पर चर्चा
कार्यक्रम के दौरान गंजाम के साहित्य और संस्कृति को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। मुख्य अतिथि डॉ. बाईमनु चर्ची ने लोक साहित्य की भूमिका और उसकी समृद्ध परंपरा पर अपने विचार रखे। उन्होंने लोक साहित्य को समाज की सांस्कृतिक स्मृति और पहचान का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
उत्कल सम्मेलन और गंजाम के बीच ऐतिहासिक संबंधों पर चर्चा करते हुए मुख्य वक्ता हाड़िबंधु माली ने पलूर के राजबाटी और गजपति महाराज से जुड़े ऐतिहासिक संदर्भों को भी सामने रखा।
         भाषा प्रेम और सांस्कृतिक अस्मिता पर जोर
वरिष्ठ पत्रकार एवं अधिवक्ता अनंत नारायण मोहंती ने आंध्र प्रदेश में भाषा प्रेम और भाषाई अस्मिता से जुड़े विषयों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने भाषा और संस्कृति के संरक्षण को समाज की पहचान से जोड़ते हुए इसके महत्व पर चर्चा की।
कार्यक्रम की शुरुआत में सभापति शिव प्रसाद दास ने नेपाल में बाढ़ से मारे गए लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि अर्पित की। अंत में कवि एवं संसद संपादक दीनबंधु श्रीपल्लव ने उपस्थित अतिथियों, साहित्यकारों और कवियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

प्रदीप मिश्रा
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