साइबर ठगों पर शिकंजे की तैयारी, 300 पुलिस अफसरों की ट्रेनिंग
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
निवेश ठगी, UPI फ्रॉड, क्रिप्टो अपराध और म्यूल खातों की जांच का मिला व्यावहारिक प्रशिक्षण, ‘स्वर्णिम समय’ में कार्रवाई पर जोर
रायपुर ACGN:- ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस ने साइबर वित्तीय अपराधों से निपटने के लिए अपनी जांच और त्वरित कार्रवाई की क्षमता को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। रायपुर के विमतारा सभागार में ‘न्यू ऐज फिनांसियल क्राइम्स एंड रिस्पॉन्स रेडनेस’ विषय पर विशेष कार्यशाला आयोजित की गई, जिसमें प्रदेशभर से करीब 300 पुलिस अधिकारी और विवेचक शामिल हुए।
कार्यशाला का उद्देश्य साइबर और डिजिटल माध्यमों से होने वाले वित्तीय अपराधों की पहचान, रोकथाम, त्वरित प्रतिक्रिया और वैज्ञानिक तरीके से विवेचना के लिए पुलिस अधिकारियों को आधुनिक तकनीकों से परिचित कराना रहा। कार्यशाला में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में साइबर अपराध के बदलते स्वरूप और उससे निपटने की रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई।
कार्यक्रम में पुलिस महानिदेशक अरुण देव गौतम, महानिदेशक प्रशिक्षण जीपी सिंह, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक दीपांशु काबरा, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमित कुमार, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक डॉ. आनंद छाबड़ा, पुलिस महानिरीक्षक प्रशांत अग्रवाल, पुलिस उप महानिरीक्षक सुजीत कुमार और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अभिषेक पल्लव सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
बदलते साइबर अपराधों की मिली जानकारी
कार्यशाला के विषय विशेषज्ञ डॉ. रक्षित टंडन ने पुलिस अधिकारियों को साइबर और वित्तीय अपराधों के लगातार बदलते तरीकों की जानकारी दी। प्रशिक्षण में ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी, क्रिप्टोकरेंसी से जुड़े अपराध, म्यूल बैंक खाते, फर्जी पहचान और वेरिफिकेशन, यूपीआई एवं इंटरनेट बैंकिंग फ्रॉड, क्यूआर कोड के जरिए ठगी तथा रिमोट डिवाइस कंट्रोल जैसे अपराधों की जांच के तरीकों को समझाया गया।
अधिकारियों को बताया गया कि साइबर अपराध की जांच केवल तकनीकी जानकारी तक सीमित नहीं है। घटना के तुरंत बाद कार्रवाई, डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित रखना और पैसे के लेन-देन की पूरी कड़ी को जोड़ना जांच की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
ठगी के बाद ‘स्वर्णिम समय’ सबसे अहम
साइबर वित्तीय धोखाधड़ी में शुरुआती समय को बेहद महत्वपूर्ण बताते हुए कार्यशाला में ‘स्वर्णिम समय’ में कार्रवाई पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों को बताया गया कि शिकायत मिलते ही संदिग्ध लेन-देन की पहचान कर धनराशि को रोकने और संबंधित बैंक तथा वित्तीय संस्थाओं से तत्काल समन्वय स्थापित करना जरूरी है।
समय पर कार्रवाई होने से ठगी की रकम को आगे दूसरे खातों में ट्रांसफर होने से रोका जा सकता है और पीड़ित को राहत मिलने की संभावना बढ़ जाती है। इसी उद्देश्य से पुलिस अधिकारियों को त्वरित प्रतिक्रिया की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।
डिजिटल सुराग से अपराधियों के नेटवर्क तक पहुंचने की कवायद
कार्यशाला में वास्तविक मामलों पर आधारित केस स्टडी के जरिए डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण और विश्लेषण की तकनीक समझाई गई। पीड़ित के खाते से शुरू होकर बैंक अकाउंट, म्यूल अकाउंट, अलग-अलग लेन-देन की श्रृंखला और अंतिम लाभार्थी तक पहुंचने की प्रक्रिया को उदाहरणों के माध्यम से बताया गया।
डिजिटल फुटप्रिंट की पहचान और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को जोड़कर साइबर अपराध में सक्रिय आरोपियों और उनके नेटवर्क तक पहुंचने की विवेचना क्षमता को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।
केस स्टडी और सवाल-जवाब से सामने आईं मैदानी चुनौतियां
कार्यशाला के अंतिम चरण में प्रश्नोत्तर और प्रकरण चर्चा आयोजित की गई। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से पहुंचे पुलिस अधिकारियों और विवेचकों ने साइबर अपराध की जांच के दौरान सामने आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और अपने अनुभव साझा किए।
विशेषज्ञों ने इन चुनौतियों के समाधान के लिए आधुनिक तकनीकों और प्रभावी विवेचना प्रक्रिया को लेकर मार्गदर्शन दिया। माना जा रहा है कि इस तरह के प्रशिक्षण से साइबर अपराध के मामलों में पुलिस की त्वरित प्रतिक्रिया, डिजिटल साक्ष्यों के बेहतर उपयोग और वैज्ञानिक जांच की क्षमता को और मजबूती मिलेगी।
बढ़ते ऑनलाइन निवेश फ्रॉड, यूपीआई ठगी और डिजिटल बैंकिंग
अपराधों के बीच छत्तीसगढ़ पुलिस की यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। अब चुनौती यही है कि कार्यशाला में मिली तकनीकी जानकारी को मैदानी जांच में कितनी तेजी और प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।
आपके क्षेत्र में भी कोई महत्वपूर्ण खबर, जनसमस्या या जनहित का मुद्दा हो तो हमें इस नंबर पर भेजें। 7647981711, 9303948009।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space
















































