मां की सुरक्षा में देरी नहीं, समय पर जांच और संस्थागत प्रसव जरूरी
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की अपील – गर्भावस्था में नियमित जांच, पौष्टिक आहार और खतरे के लक्षणों पर तत्काल अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी
कोरबा ACGN:- सुरक्षित मातृत्व और मातृ-शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के उद्देश्य से कोरबा जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से गर्भावस्था के दौरान समय पर स्वास्थ्य जांच, उचित उपचार और संस्थागत प्रसव सुनिश्चित करने की अपील की है। प्रशासन का कहना है कि मां और बच्चे की सुरक्षा केवल डॉक्टर या स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की साझा जिम्मेदारी है।
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार गर्भावस्था की जानकारी मिलते ही मितानिन या एएनएम को इसकी सूचना देना चाहिए और 45 दिनों के भीतर गर्भावस्था का पंजीयन करा लेना चाहिए। गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में कम से कम एक बार चिकित्सकीय जांच कराना बेहद आवश्यक है। इसके साथ ही पूरी गर्भावस्था के दौरान कम से कम चार नियमित प्रसवपूर्व जांच यानी एएनसी कराना जरूरी बताया गया है।
जिले की शासकीय स्वास्थ्य संस्थाओं में प्रत्येक महीने की 9 और 24 तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत गर्भवती महिलाओं की जांच की सुविधा उपलब्ध है। इन जांचों में रक्तचाप, हीमोग्लोबिन, पेशाब, सिकल सेल सहित आवश्यक परीक्षण निःशुल्क किए जाते हैं। ऐसे में गर्भवती महिलाओं और उनके परिवारों से इन स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेने की अपील की गई है।
खून की कमी को न करें नजरअंदाज
स्वास्थ्य विभाग ने गर्भावस्था के दौरान खून की कमी यानी एनीमिया को गंभीरता से लेने की सलाह दी है। यदि जांच में हीमोग्लोबिन कम पाया जाता है या सिकल सेल की पुष्टि होती है तो चिकित्सकीय सलाह के अनुसार आयरन-फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से लेने के साथ हरी सब्जियां, गुड़-चना और पौष्टिक आहार का सेवन करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने की स्थिति को ध्यान में रखते हुए परिवार को पहले से संभावित रक्तदाताओं के नाम और मोबाइल नंबर सुरक्षित रखने की सलाह भी दी गई है।
जोखिम वाली गर्भावस्था में घर पर प्रसव से बचें
कम उम्र, जुड़वा गर्भ, उच्च रक्तचाप, पूर्व में ऑपरेशन या सीजेरियन प्रसव तथा अन्य चिकित्सकीय जोखिम वाली गर्भावस्था को विशेष सावधानी की जरूरत होती है। ऐसी गर्भवती महिलाओं का प्रसव डॉक्टर की सलाह के अनुसार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल, मेडिकल कॉलेज या अन्य उच्च स्वास्थ्य संस्थान में कराया जाना चाहिए। स्वास्थ्य विभाग ने स्पष्ट रूप से ऐसी स्थिति में घर पर प्रसव कराने की जिद नहीं करने की सलाह दी है।
प्रसव से पहले परिवहन की व्यवस्था रखें तैयार
प्रशासन ने गर्भवती महिलाओं के परिवारों से अपील की है कि वे अपने मोबाइल में 108 एंबुलेंस का नंबर सुरक्षित रखें और प्रसव की संभावित तिथि से पहले अस्पताल पहुंचने के लिए परिवहन की व्यवस्था की योजना बना लें। विशेष रूप से दूरस्थ एवं बारिश से प्रभावित क्षेत्रों, जैसे पोड़ी उपरोड़ा और करतला क्षेत्र की गर्भवती महिलाओं को संभावित प्रसव तिथि से लगभग सात दिन पहले अस्पताल के नजदीक पहुंचने की सलाह दी गई है, ताकि आपात स्थिति में किसी तरह की परेशानी न हो।
खतरे के लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल पहुंचें
गर्भावस्था के दौरान तेज बुखार या दौरे, अत्यधिक रक्तस्राव, रक्तचाप बढ़ना, तेज सिरदर्द, आंखों के सामने धुंध या अंधेरा छाना, पानी की थैली फटना अथवा बच्चे की हलचल कम या बंद होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो बिल्कुल भी देरी नहीं करनी चाहिए। ऐसे किसी भी खतरे के संकेत पर तत्काल स्वास्थ्य संस्था से संपर्क कर 108 एंबुलेंस की सहायता से अस्पताल पहुंचने की सलाह दी गई है।
प्रसव के बाद के 48 घंटे भी बेहद महत्वपूर्ण
स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि प्रसव के बाद शुरुआती 48 घंटे मां और नवजात दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इसलिए प्रसव के बाद मां को कम से कम 48 घंटे तक स्वास्थ्य संस्था में चिकित्सकीय निगरानी में रखना आवश्यक है। घर लौटने के बाद भी यदि बुखार, अत्यधिक रक्तस्राव, बदबूदार पानी या कोई अन्य असामान्य लक्षण दिखाई दे तो महिला को तत्काल स्वास्थ्य केंद्र ले जाना चाहिए।
परिवार को निभानी होगी सबसे बड़ी जिम्मेदारी
कलेक्टर कुणाल दुदावत एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एस.एन. केशरी ने जिले के नागरिकों से अपील की है कि गर्भवती महिला की देखभाल को परिवार अपनी प्राथमिक जिम्मेदारी समझे। उन्होंने प्रथम तीन महीनों के भीतर पंजीयन, नियमित स्वास्थ्य जांच, पौष्टिक आहार, चिकित्सकीय सलाह का पालन और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया है।
प्रशासन की अपील का संदेश साफ है, गर्भवती महिला की जान बचाने के लिए समय पर उठाया गया एक कदम बेहद महत्वपूर्ण हो सकता है। बहू-बेटियों की सुरक्षित डिलीवरी केवल डॉक्टर की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार की जिम्मेदारी है।
प्रदीप मिश्रा
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