साहू समाज के स्वागत कार्यक्रम की चमक में छिपा कौन सा सवाल?
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू (मोन्टू), सूरजपुर
प्रदेश अध्यक्ष के स्वागत समारोह के बाद समाज में उठे सवाल, मीडिया प्रभारी सौरभ साहू ने आमंत्रण से लेकर राजनीतिक प्राथमिकता तक पर जताई आपत्ति
सूरजपुर ACGN:- मंच सजा था, स्वागत की तैयारियां थीं, प्रदेश पदाधिकारी मौजूद थे और समाज के युवाओं में उत्साह भी दिखाई दे रहा था। लेकिन कार्यक्रम खत्म होते-होते इसी स्वागत समारोह के पीछे एक ऐसा सवाल खड़ा हो गया, जिसने साहू समाज के भीतर नई चर्चा को जन्म दे दिया। सवाल यह है कि आखिर समाज के कार्यक्रम में समाज के ही कुछ लोगों को सूचना क्यों नहीं मिली? क्या आयोजन की जानकारी सभी तक पहुंची थी या फिर कुछ चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रह गई?
मामला सूरजपुर में साहू समाज युवा प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत साहू एवं उनकी प्रदेश टीम के आगमन पर आयोजित स्वागत समारोह का है। जिला साहू संघ और युवा प्रकोष्ठ के पदाधिकारियों की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रदेश एवं जिले के अनेक पदाधिकारी शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान सामाजिक एकता, शिक्षा, सेवा और संगठन को मजबूत करने का संदेश दिया गया, लेकिन कार्यक्रम के बाद तहसील साहू संघ के मीडिया प्रभारी सौरभ साहू (मोन्टू) ने आयोजन की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए।
स्वागत हुआ भव्य, लेकिन सवालों ने घेरा
बताया गया कि कार्यक्रम जिला साहू संघ अध्यक्ष रामलल्लू साहू एवं युवा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष मुकेश साहू (छोटू) के मार्गदर्शन में आयोजित हुआ। कार्यक्रम में प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत साहू, प्रदेश महामंत्री रॉबिन साहू, हर्ष साहू, भास्कर साहू, प्रदेश सहसंयोजक हेमंत साहू, सुरेंद्र साहू और प्रदेश संयुक्त सचिव सुनील साहू सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।
कार्यक्रम के दौरान युवाओं में उत्साह देखने को मिला और सामाजिक संगठन को मजबूत करने की बातें भी हुईं। लेकिन समारोह समाप्त होने के बाद आयोजन की अंदरूनी तस्वीर को लेकर चर्चा शुरू हो गई।
आखिर क्यों नहीं मिली सूचना?
मीडिया प्रभारी सौरभ साहू (मोन्टू) का आरोप है कि समाज के कुछ वरिष्ठजनों और सक्रिय युवा कार्यकर्ताओं को स्वागत कार्यक्रम की जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना है कि जो लोग लगातार सामाजिक गतिविधियों में अपनी भागीदारी निभाते रहे हैं, यदि उन्हें ही समाज के कार्यक्रम की सूचना नहीं मिले तो सवाल उठना स्वाभाविक है।
सौरभ साहू का कहना है कि समाज के नाम पर होने वाला कार्यक्रम किसी व्यक्ति विशेष का आयोजन नहीं होता। उसमें समाज के सभी वर्गों, वरिष्ठजनों, युवाओं और सक्रिय कार्यकर्ताओं की समान भागीदारी होनी चाहिए।
क्या सामाजिक मंच पर भी दिखने लगी राजनीतिक दूरी?
सबसे बड़ा सवाल यहीं से उठता है। सौरभ साहू ने आरोप लगाया कि समाज के कार्यक्रमों में राजनीतिक विचारधारा के आधार पर लोगों को प्राथमिकता दिए जाने की चर्चा सामने आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि क्या सामाजिक मंच पर भी राजनीतिक पसंद और नापसंद को जगह मिलनी चाहिए?
उनका कहना है कि साहू समाज किसी एक राजनीतिक दल का संगठन नहीं है। यह पूरे समाज का साझा मंच है, जहां अलग-अलग राजनीतिक विचार रखने वाले समाजबंधुओं को भी समान सम्मान और सहभागिता मिलनी चाहिए।
हालांकि, राजनीतिक आधार पर किसी विशेष वर्ग को प्राथमिकता दिए जाने का आरोप फिलहाल सौरभ साहू के बयान तक सीमित है। कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से इस आरोप पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति आयोजकों का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
अनदेखी छोटी हो सकती है, लेकिन असर बड़ा!
सौरभ साहू ने कहा कि किसी सामाजिक कार्यक्रम में किसी व्यक्ति को बुलाना या नहीं बुलाना देखने में छोटी बात लग सकती है, लेकिन जब यही स्थिति लगातार महसूस होने लगे तो उसका असर संगठन की एकता पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि समाज को मजबूत बनाने के लिए वरिष्ठजनों के अनुभव और युवाओं की ऊर्जा दोनों को साथ लेकर चलना जरूरी है। किसी भी समाजबंधु को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि उसे राजनीतिक विचारधारा या किसी अन्य कारण से सामाजिक गतिविधियों से दूर रखा जा रहा है।
अब नेतृत्व से मांगा जा रहा है जवाब
स्वागत समारोह के बाद अब समाज के भीतर सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात को लेकर है कि आखिर आमंत्रण की प्रक्रिया क्या थी? क्या सभी वरिष्ठजनों और सक्रिय युवा कार्यकर्ताओं को कार्यक्रम की सूचना दी गई थी? यदि नहीं, तो किन कारणों से कुछ लोगों को इससे दूर रखा गया?
सौरभ साहू ने समाज के नेतृत्व से इस मामले में पारदर्शिता बरतने और भविष्य में सभी समाजबंधुओं को साथ लेकर चलने की अपील की है। उनका कहना है कि उनका विरोध किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, बल्कि समाज की एकता, भाईचारे, पारदर्शिता और समान सहभागिता के लिए है।
फिलहाल सूरजपुर में आयोजित यह स्वागत समारोह अपने उद्देश्य से आगे निकलकर समाज के भीतर उठे सवालों के कारण चर्चा में आ गया है। मंच पर जहां एकता और संगठन की मजबूती का संदेश दिया गया, वहीं मंच के बाहर आमंत्रण और सहभागिता को लेकर सवाल खड़े हो गए।
अब देखना यह होगा कि इन सवालों पर समाज का नेतृत्व क्या जवाब देता है और क्या भविष्य में ऐसे आयोजनों में सभी समाजबंधुओं को साथ लेकर चलने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है। क्योंकि सामाजिक संगठन की असली ताकत सिर्फ मंच पर दिखाई देने वाली भीड़ नहीं, बल्कि हर समाजबंधु को साथ लेकर चलने की भावना में होती है।
प्रदीप मिश्रा
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