“DMF की हरियाली में छिपा सवाल! पौधे लगेंगे, लेकिन बचेंगे कितने?”
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, अनियोजित वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण की समीक्षा की मांग; बोले, पौधे लगाना ही नहीं, उन्हें पेड़ बनाना भी जरूरी
कोरबा ACGN:- कोरबा शहर में DMF मद से कराए जा रहे वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण कार्यों को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। जिला कांग्रेस अध्यक्ष मुकेश कुमार राठौर ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर इन कार्यों की समग्र समीक्षा और स्थलवार मूल्यांकन की मांग की है। उनका कहना है कि हरियाली शहर की जरूरत है, लेकिन सार्वजनिक धन से होने वाला वृक्षारोपण केवल पौधे लगाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। पौधे कहां लगाए जा रहे हैं, भविष्य में उनका क्या प्रभाव होगा, उनकी सुरक्षा कैसे होगी और वे कितने वर्षों तक जीवित रहेंगे, इन सभी पहलुओं पर पहले से ठोस योजना जरूरी है।
मुकेश राठौर ने कहा कि कोरबा के प्रमुख मार्गों पर पहले से ही भारी यातायात, सीमित पार्किंग और सड़क की उपयोगी चौड़ाई जैसी समस्याएं मौजूद हैं। ऐसे में सड़क किनारे पौधे लगाने से पहले यह देखना आवश्यक है कि भविष्य में यातायात व्यवस्था, पार्किंग, पैदल आवागमन और सड़क विस्तार की संभावनाओं पर इसका क्या असर पड़ेगा।

उनका कहना है कि यदि आज बिना भविष्य की जरूरतों का अध्ययन किए सड़क किनारे सौंदर्यीकरण कर दिया गया और आने वाले समय में उसी स्थान पर सड़क चौड़ीकरण या पार्किंग की आवश्यकता पड़ी, तो आज खर्च की गई राशि और लगाए गए पौधों की उपयोगिता दोनों पर सवाल खड़े हो सकते हैं।
बिजली के तारों के नीचे पौधे, भविष्य में खतरा?
मुकेश राठौर ने विद्युत लाइनों के नीचे अथवा उनके बेहद नजदीक किए जा रहे पौधारोपण को लेकर भी जनसुरक्षा का मुद्दा उठाया है। उन्होंने कहा कि पौधे लगाने के समय छोटे दिखाई देते हैं, लेकिन कुछ वर्षों बाद जब यही पौधे बड़े होकर पेड़ बनेंगे तो उनकी शाखाएं विद्युत तारों के संपर्क में आ सकती हैं।
ऐसी स्थिति में शॉर्ट सर्किट, विद्युत दुर्घटना और जनहानि जैसी गंभीर आशंकाएं पैदा हो सकती हैं। इसलिए उन्होंने मांग की है कि विद्युत लाइनों के आसपास पौधारोपण के स्थान तय करने से पहले विद्युत विभाग की तकनीकी सलाह और निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जाए।
उन्होंने साफ कहा कि शहर को हराभरा बनाने की कोशिश में यदि जनसुरक्षा से समझौता हुआ तो यह सौंदर्यीकरण नहीं बल्कि भविष्य की समस्या बन सकता है।
पौधे लगाने की संख्या नहीं, बचने की दर बने पैमाना
जिला कांग्रेस अध्यक्ष ने पौधारोपण की तकनीकी गुणवत्ता और रखरखाव व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सिर्फ गड्ढे खोदकर पौधे लगा देना ही वृक्षारोपण की सफलता नहीं है। पौधों के लिए पर्याप्त आकार के गड्ढे, उपयुक्त मिट्टी, खाद, नियमित सिंचाई, ट्री-गार्ड और सुरक्षा व्यवस्था जरूरी है।
उन्होंने प्रशासन से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि लगाए गए पौधों की अगले तीन से पांच वर्षों तक देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा की जिम्मेदारी किस विभाग या एजेंसी की होगी।
उनका कहना है कि वृक्षारोपण की सफलता इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि कितने पौधे लगाए गए, बल्कि इस आधार पर तय होनी चाहिए कि उनमें से कितने पौधे जीवित रहकर आने वाले वर्षों में पेड़ बने।
पुराने DMF कार्यों का हिसाब पहले, नए काम बाद में?
मुकेश राठौर ने नए वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण कार्यों पर राशि खर्च करने से पहले पूर्व में DMF मद से कराए गए कार्यों की समीक्षा की मांग की है। उन्होंने विशेष रूप से सरस्वती शिशु मंदिर से नगर निगम कार्यालय तक किए गए वृक्षारोपण तथा अंधरी कछार स्कूल के पास लगाए गए फैंसी ग्रास की वर्तमान स्थिति का स्थलवार मूल्यांकन कराने की मांग की है।
उनका कहना है कि यदि पहले किए गए कार्य अपेक्षित परिणाम नहीं दे पाए हैं, तो नए कार्य शुरू करने से पहले यह पता लगाया जाना चाहिए कि पुराने कार्यों में कमी कहां रही। पौधे क्यों नहीं बचे, रखरखाव किसकी जिम्मेदारी थी और खर्च की गई राशि के अनुपात में उसका परिणाम कितना मिला, इन सभी सवालों का जवाब सामने आना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुराने कार्यों के परिणाम और रखरखाव की समीक्षा किए बिना लगातार नए कार्यों पर DMF की राशि खर्च करना उचित नहीं माना जा सकता।
DMF की राशि जनता की अमानत
मुकेश राठौर ने कहा कि DMF की राशि किसी विभाग की सामान्य खर्च राशि नहीं, बल्कि जनता के हित की निधि है। इसलिए इसका उपयोग ऐसे कार्यों में होना चाहिए, जिनका वास्तविक और स्थायी लाभ कोरबा की जनता को लंबे समय तक मिल सके।
उन्होंने कलेक्टर से वर्तमान वृक्षारोपण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का तत्काल स्थल निरीक्षण कराने, यातायात और पार्किंग की व्यवहार्यता की जांच करने, विद्युत सुरक्षा परीक्षण कराने तथा पौधारोपण की तकनीकी गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की है।
इसके साथ ही उन्होंने पूर्व में DMF से कराए गए वृक्षारोपण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों का खर्च बनाम परिणाम के आधार पर मूल्यांकन कराने की भी मांग रखी है।
‘हरियाली चाहिए, लेकिन हिसाब और योजना के साथ’
मुकेश राठौर ने स्पष्ट किया कि वे वृक्षारोपण के विरोधी नहीं हैं। उनका विरोध अनियोजित वृक्षारोपण और सार्वजनिक धन के संभावित दुरुपयोग को लेकर है। उन्होंने कहा कि जनता के पैसे से होने वाला प्रत्येक काम ऐसा होना चाहिए, जिसका परिणाम वर्षों तक दिखाई दे।
उन्होंने भविष्य में DMF से होने वाले वृक्षारोपण एवं सौंदर्यीकरण कार्यों को समग्र योजना, तकनीकी सुरक्षा और दीर्घकालीन रखरखाव व्यवस्था के साथ ही स्वीकृति देने की मांग की।
अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि कोरबा में कितने पौधे लगाए जाएंगे, बल्कि बड़ा सवाल यह है कि वे पौधे कहां लगाए जाएंगे, कितने सुरक्षित होंगे और पांच साल बाद उनमें से कितने पेड़ के रूप में खड़े दिखाई देंगे? DMF की राशि से होने वाले इन कार्यों की वास्तविक सफलता का पैमाना शायद यही होना चाहिए।
फिलहाल जिला कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन के बाद DMF मद से हो रहे वृक्षारोपण और सौंदर्यीकरण कार्यों की योजना, सुरक्षा, गुणवत्ता और रखरखाव को लेकर प्रशासनिक स्तर पर समीक्षा की मांग सामने आई है। अब देखना होगा कि प्रशासन इन सवालों पर क्या कार्रवाई करता है और क्या पुराने तथा वर्तमान कार्यों का परिणाम जनता के सामने रखा जाता है।
प्रदीप मिश्रा
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