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रिश्तों में दूरी नहीं, संवाद जरूरी, ‘साथ है तो बात है’ वर्कशॉप ने दिया मजबूत बॉन्डिंग का संदेश

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केसिंगा, ओडिशा

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- बिनोद कुमार जैन केसिंगा

नई पीढ़ी में भाई-बहन के रिश्तों को मजबूत बनाने पर हुआ सार्थक मंथन, संवाद और भावनात्मक जुड़ाव को बताया रिश्तों की असली ताकत

केसिंगा ACGN:- आज की तेज रफ्तार जिंदगी में तकनीक और व्यस्तता ने जहां जीवन को आसान बनाया है, वहीं परिवार के भीतर आपसी संवाद के लिए समय कम होता जा रहा है। खासकर नई पीढ़ी में भाई-बहन और अन्य पारिवारिक रिश्तों के बीच बढ़ती दूरियों को कम करने और संवाद को मजबूत बनाने के उद्देश्य से केसिंगा स्थित स्थानीय तेरापंथ भवन में रविवार, 30 अगस्त 2026 को “New Gen Sibling Workshop – साथ है तो बात है” का आयोजन किया गया।
युगप्रधान आचार्य श्री महाश्रमण जी के सुशिष्य मुनि श्री हिमांशु कुमार जी एवं मुनि श्री हेमंत कुमार जी के पावन सान्निध्य में आयोजित इस कार्यशाला में करीब 35 भाई-बहन के जोड़ों सहित तीन-तीन प्रतिभागियों के समूहों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की। कार्यशाला में विभिन्न गतिविधियों, संवादात्मक सत्रों और रोचक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को अपने रिश्तों को एक नए नजरिए से समझने का अवसर मिला।


                परिवार सिर्फ साथ रहने का नाम नहीं
कार्यशाला का शुभारंभ मुनि श्री हिमांशु कुमार जी के मंगल उद्बोधन से हुआ। उन्होंने रिश्तों में संवाद और आत्मीयता के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि परिवार केवल एक साथ रहने का नाम नहीं है, बल्कि एक-दूसरे को समझने, सुनने और जरूरत के समय साथ खड़े रहने की भावना ही परिवार को मजबूत बनाती है।
उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में तकनीक और व्यस्त जीवनशैली ने सुविधाएं तो बढ़ाई हैं, लेकिन कई बार यही चीजें अपनों के बीच प्रत्यक्ष संवाद को कम कर देती हैं। ऐसे में रिश्तों को जीवंत बनाए रखने के लिए एक-दूसरे को समय देना और भावनाओं को समझना बेहद जरूरी है।
‘बात होगी तो समझ होगी, समझ होगी तो रिश्ते मजबूत होंगे’
इसके बाद मुनि श्री हेमंत कुमार जी ने विभिन्न संवादात्मक गतिविधियों और व्यवहारिक अभ्यासों के माध्यम से प्रतिभागियों को कार्यशाला के मुख्य विषय से जोड़ा। उन्होंने सहज तरीके से समझाया कि नई पीढ़ी में रिश्तों के बीच दूरी केवल भौतिक दूरी के कारण नहीं बढ़ती, बल्कि कम्युनिकेशन गैप, आपसी अपेक्षाओं, गलतफहमियों, व्यस्तता और एक-दूसरे को पर्याप्त समय नहीं देने से भी रिश्तों में खटास पैदा होती है।
वर्कशॉप में विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि “बात होगी तो समझ होगी और समझ होगी तो रिश्तों में मजबूती आएगी।” प्रतिभागियों को एक-दूसरे की बात ध्यान से सुनने, अपनी भावनाओं को खुलकर व्यक्त करने, अपेक्षाओं को स्पष्ट रूप से साझा करने और मुश्किल समय में एक-दूसरे का सहयोग करने के लिए प्रेरित किया गया।


         प्रतिस्पर्धा नहीं, सहयोग से मजबूत होंगे रिश्ते
कार्यशाला के दौरान भाई-बहन और भाई-भाई जैसे रिश्तों में अनावश्यक प्रतिस्पर्धा के स्थान पर सहयोग, प्रोत्साहन और आपसी सम्मान की भावना विकसित करने पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों को बताया गया कि एक-दूसरे की सफलता में खुशी मनाना, कठिन समय में साथ खड़ा रहना और छोटी-छोटी बातों को मन में रखकर दूरी बढ़ाने के बजाय समय रहते बातचीत करना रिश्तों को मजबूत बनाने का महत्वपूर्ण आधार है।
वर्कशॉप में यह संदेश भी सामने आया कि जीवन में सफलता केवल व्यक्तिगत उपलब्धियों से नहीं, बल्कि उन मजबूत रिश्तों से भी जुड़ी होती है जो व्यक्ति के सुख-दुख और उतार-चढ़ाव में उसके साथ खड़े रहते हैं। जब परिवार के सदस्य एक-दूसरे की ताकत बनते हैं तो व्यक्ति अधिक आत्मविश्वास के साथ जीवन की चुनौतियों का सामना कर सकता है।
कई बार रिश्तों की समस्या बड़ी नहीं, बातचीत की कमी बड़ी होती है
पूरे कार्यक्रम के दौरान वातावरण आत्मीय, संवादात्मक और उत्साहपूर्ण रहा। विभिन्न गतिविधियों के माध्यम से प्रतिभागियों ने महसूस किया कि कई बार रिश्तों में पैदा होने वाली बड़ी दूरियों के पीछे कोई बड़ा कारण नहीं होता, बल्कि बात न करना, एक-दूसरे को ठीक से न सुनना और मन की बात साझा न करना ही दूरी की वजह बन जाता है।
“साथ है तो बात है” वर्कशॉप ने यही संदेश दिया कि रिश्तों को मजबूत बनाने के लिए हमेशा बड़े प्रयासों की जरूरत नहीं होती। थोड़ा समय, खुलकर बातचीत, एक-दूसरे की भावनाओं का सम्मान और हर परिस्थिति में साथ खड़े रहने का संकल्प रिश्तों में नई ऊर्जा भर सकता है।
कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों ने कार्यशाला को उपयोगी, प्रेरणादायी और व्यवहारिक बताते हुए अपने पारिवारिक रिश्तों में बेहतर संवाद स्थापित करने तथा आपसी बॉन्डिंग को मजबूत बनाने के सकारात्मक संकल्प लिए।

प्रदीप मिश्रा
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