‘रंग तरंग’ में गूंजेंगी छत्तीसगढ़ की लोकधुनें
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
1 से 3 सितंबर तक मुक्ताकाशी मंच पर लोक वाद्यों, लोक संगीत और आधुनिक सुरों का दिखेगा अनूठा संगम
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक संस्कृति, पारंपरिक संगीत और आधुनिक सुरों का अनूठा संगम राजधानी रायपुर में देखने-सुनने को मिलेगा। संस्कृति विभाग, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा तीन दिवसीय ‘रंग तरंग’ सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन 1 से 3 सितंबर 2026 तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से रायपुर के मुक्ताकाशी मंच, महंत घासीदास संग्रहालय परिसर, सिविल लाइंस में होगा।
‘रंग तरंग’ के जरिए छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, संगीत शैलियों और पारंपरिक वाद्य संस्कृति को नए अंदाज में दर्शकों के सामने प्रस्तुत किया जाएगा। लोक वाद्ययंत्रों की पारंपरिक धुनों के साथ आधुनिक संगीत का मेल इस आयोजन का खास आकर्षण रहेगा।
लोक वाद्यों की धुनों से सजेगी संगीत की महफिल
तीन दिनों तक चलने वाले इस आयोजन में छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं से जुड़े पारंपरिक वाद्ययंत्रों और कलाकारों की प्रस्तुतियां देखने को मिलेंगी। लोकधुनों की मिठास और आधुनिक संगीत की नई लय जब एक साथ मंच पर उतरेंगी, तो दर्शकों को प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत का एक अलग और आकर्षक अनुभव मिलेगा।
आयोजन का उद्देश्य केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है। इसके माध्यम से छत्तीसगढ़ की पुरानी लोक परंपराओं और संगीत विरासत को नई पीढ़ी से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। बदलते दौर में लोक संस्कृति की पहचान को कायम रखते हुए उसे आधुनिक प्रस्तुति के साथ आगे बढ़ाने की यह पहल खास मानी जा रही है।
लोक संस्कृति को मिलेगा नया मंच
छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी जीवंत लोक कलाओं, लोकगीतों, नृत्य और पारंपरिक संगीत से रही है। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों में संगीत और वाद्ययंत्रों की अपनी विशिष्ट परंपराएं हैं। ‘रंग तरंग’ इन्हीं सांस्कृतिक विविधताओं को एक मंच पर लाने का प्रयास है।
इस आयोजन से स्थानीय कलाकारों को अपनी प्रतिभा और कला को व्यापक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा। वहीं युवाओं और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों को करीब से समझने और उनसे जुड़ने का मौका भी मिलेगा।
मनोरंजन के साथ संस्कृति से जुड़ने का अवसर
संस्कृति विभाग की यह पहल रायपुरवासियों के साथ प्रदेश की कला और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बनने जा रही है। तीन दिनों तक शाम के समय मुक्ताकाशी मंच पर लोकधुनों और आधुनिक सुरों की गूंज के बीच छत्तीसगढ़ की संस्कृति के अलग-अलग रंग देखने को मिलेंगे।
‘रंग तरंग’ के माध्यम से पारंपरिक लोक संगीत और आधुनिकता को एक साथ मंच देने की कोशिश की गई है। निश्चित रूप से यह आयोजन दर्शकों के लिए मनोरंजन के साथ-साथ छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को महसूस करने और उसे करीब से जानने का अवसर बनेगा।
प्रदीप मिश्रा
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