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ज्ञान की विरासत से शिक्षा का भविष्य तलाशता बाँकुड़ा विश्वविद्यालय

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बाँकुड़ा, पश्चिम बंगाल

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- विनोद यादव

भारतीय ज्ञान परंपरा को समकालीन शिक्षा से जोड़ने पर मंथन, नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों और जनप्रतिनिधियों ने साझा किए विचार

बाँकुड़ा ACGN:- बाँकुड़ा विश्वविद्यालय में “एसटीबीटी : समकालीन शिक्षा के लिए भारतीय ज्ञान परंपरा का संदर्भीकरण” विषय पर एक दिवसीय विचारोत्तेजक कॉन्क्लेव का आयोजन किया गया। सम्मेलन में भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा व्यवस्था से जोड़ने, उसके संरक्षण और वर्तमान समय में उसकी उपयोगिता को लेकर गंभीर एवं सार्थक चर्चा हुई। कार्यक्रम में नीति-निर्माताओं, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों और अकादमिक समुदाय से जुड़े लोगों ने अपने विचार रखे।
हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की कुलपति प्रो. नंदिनी साहू ने भारतीय विश्वविद्यालयों में भारतीय ज्ञान परंपरा के प्रभावी क्रियान्वयन और उससे जुड़ी शिक्षाशास्त्रीय संभावनाओं पर विशेष व्याख्यान दिया। उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा को केवल विरासत के रूप में देखने के बजाय उसे वर्तमान शैक्षणिक जरूरतों के अनुरूप संदर्भित करने की आवश्यकता पर विचार प्रस्तुत किए।


कार्यक्रम के उद्घाटक एवं मुख्य अतिथि पश्चिम बंगाल सरकार के विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं जैव-प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग एवं बागवानी तथा सूचना प्रौद्योगिकी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के प्रभारी मंत्री डॉ. कल्याण चक्रवर्ती रहे। वहीं पश्चिम बंगाल सरकार के जनजातीय विकास तथा अल्पसंख्यक कार्य एवं मदरसा शिक्षा विभाग के प्रभारी मंत्री श्री क्षुदिराम टुडू तथा सहकारिता, पर्यावरण एवं वन विभाग के प्रभारी राज्यमंत्री श्री दिबाकर घरामी का भी कार्यक्रम को सान्निध्य प्राप्त हुआ।
पूर्व सांसद एवं भारत सरकार के पूर्व केंद्रीय शिक्षा राज्यमंत्री डॉ. सुभाष सरकार ने भी सम्मेलन में सहभागिता की। इसके अलावा बाँकुड़ा जिले के विधायकगण चंदना बाउरी, सत्यनारायण मुखोपाध्याय, क्षेत्रमोहन हांसदा, सौविक पात्र, बिल्लेश्वर सिन्हा और अमरनाथ शाखा भी उपस्थित रहे।
कॉन्क्लेव में विशिष्ट संसाधन व्यक्तियों ने अपने विद्वत्तापूर्ण विचारों से विषय को व्यापक संदर्भ प्रदान किया। कलकत्ता विश्वविद्यालय के गणित विभाग की सेवानिवृत्त प्रोफेसर प्रो. (डॉ.) मंजूषा मजुमदार, हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. (डॉ.) नंदिनी साहू तथा बंगबासी मॉर्निंग कॉलेज के इतिहास विभाग के सह-प्राध्यापक डॉ. देबाशीष चौधरी ने भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन शिक्षा के बीच संबंधों पर अपने विचार साझा किए।
यह आयोजन बाँकुड़ा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) रूप कुमार बर्मन के मुख्य संरक्षकत्व में संपन्न हुआ। उनके नेतृत्व और दूरदर्शिता से विश्वविद्यालय में ऐसे अकादमिक आयोजनों को बढ़ावा मिल रहा है, जिनमें परंपरा, ज्ञान और आधुनिक शिक्षा के बीच संवाद स्थापित करने का प्रयास किया जा रहा है।
कॉन्क्लेव का मूल संदेश यही रहा कि भारत की समृद्ध ज्ञान परंपरा को आधुनिक शिक्षा से जोड़कर नई पीढ़ी के लिए ज्ञान के ऐसे रास्ते तैयार किए जा सकते हैं, जिनमें परंपरा की जड़ें और आधुनिकता की संभावनाएं दोनों साथ दिखाई दें।

प्रदीप मिश्रा (मुख्य संपादक)
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