धूप और बरसात में रोती रहीं आदिवासी बेटियां, आखिर क्यों सोता रहा प्रशासन?
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संतोष यादव सूरजपुर
भूनेश्वरपुर के प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की छात्राओं का फूटा गुस्सा; खराब चावल, पतली दाल और बुनियादी सुविधाओं की कमी के साथ बाहरी हस्तक्षेप का भी आरोप
सूरजपुर ACGN:- रामानुजनगर विकासखंड के ग्राम भूनेश्वरपुर स्थित प्री-मैट्रिक कन्या छात्रावास की आदिवासी छात्राओं ने भीषण धूप में सड़क पर उतरकर अपनी समस्याओं और नाराजगी का इजहार किया। छात्राओं ने छात्रावास में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता, बुनियादी सुविधाओं और संचालन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
छात्राओं का आरोप है कि उन्हें खराब और सड़ा हुआ चावल तथा बेहद पतली दाल परोसी जा रही है। भोजन जैसी मूलभूत जरूरत में कथित लापरवाही ने छात्राओं को विरोध के लिए सड़क पर उतरने को मजबूर कर दिया।
थाली में भोजन या मजबूरी? – छात्रावास में रहने वाली इन बेटियों के लिए भोजन केवल व्यवस्था का हिस्सा नहीं, बल्कि उनके स्वास्थ्य और पढ़ाई से सीधे जुड़ा विषय है। छात्राओं का कहना है कि यदि उन्हें गुणवत्तापूर्ण भोजन और जरूरी सुविधाएं नहीं मिलेंगी तो वे स्वस्थ रहकर पढ़ाई कैसे कर पाएंगी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि छात्रावास की नियमित निगरानी कौन कर रहा है? यदि छात्राओं को लंबे समय से ऐसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई?
संचालन में बाहरी हस्तक्षेप का आरोप – छात्राओं ने छात्रावास के संचालन में अनधिकृत बाहरी हस्तक्षेप का भी आरोप लगाया है। यह आरोप बेहद गंभीर है, क्योंकि कन्या छात्रावास केवल रहने और खाने की व्यवस्था नहीं, बल्कि नाबालिग एवं छात्राओं की सुरक्षा से जुड़ा संवेदनशील संस्थान है।
यदि वास्तव में छात्रावास के संचालन में ऐसे लोगों का हस्तक्षेप है, जिन्हें इसकी अनुमति नहीं है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। आखिर छात्रावास के अंदर कौन निर्णय ले रहा है और किसके निर्देश पर व्यवस्था संचालित हो रही है—यह प्रशासन को स्पष्ट करना होगा।
बेटियां सड़क पर क्यों आईं? – आदिवासी छात्राओं का सड़क पर उतरना अपने आप में प्रशासन के लिए गंभीर चेतावनी है। छात्राओं को अपनी समस्या बताने के लिए भीषण धूप में प्रदर्शन की स्थिति तक क्यों पहुंचना पड़ा? क्या उनकी शिकायतें पहले जिम्मेदार अधिकारियों तक नहीं पहुंचीं?
यह सवाल केवल एक छात्रावास का नहीं, बल्कि उन तमाम सरकारी छात्रावासों की व्यवस्था का भी है जहां दूरदराज के परिवार अपनी बेटियों को बेहतर शिक्षा और सुरक्षित भविष्य की उम्मीद से भेजते हैं।
अधीक्षिका पर कार्रवाई की मांग – प्रदर्शन कर रही छात्राओं की ओर से छात्रावास की अधीक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग उठाई गई है। मांग है कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार लोगों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।
हालांकि, किसी भी अधिकारी या कर्मचारी को दोषी ठहराने से पहले प्रशासनिक जांच जरूरी है। शिकायतों की स्वतंत्र जांच, भोजन के नमूनों की जांच, छात्रावास के रिकॉर्ड का परीक्षण और छात्राओं के बयान इस मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकते हैं।
प्रशासन के सामने अब बड़ी चुनौती – यह मामला राजनीति से अधिक बेटियों की सुरक्षा, सम्मान, स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ा है। प्रशासन को चाहिए कि शिकायतों को महज विरोध-प्रदर्शन के रूप में न देखकर गंभीरता से जांच कराए।
यदि भोजन खराब मिला है तो जिम्मेदारी तय हो। यदि सुविधाओं में कमी है तो तत्काल सुधार हो। और यदि छात्रावास संचालन में अनधिकृत लोगों का हस्तक्षेप पाया जाता है तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई हो।
धूप में सड़क पर खड़ी ये बेटियां सवाल पूछ रही हैं, क्या सरकारी छात्रावास में रहने वाली आदिवासी बेटियों को भी सम्मानजनक भोजन, सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाओं का अधिकार नहीं है?
अब निगाह जिला प्रशासन पर है। बेटियों की आवाज सुनी जाएगी या फिर यह मामला भी सरकारी फाइलों के नीचे दबकर रह जाएगा?
प्रदीप मिश्रा निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़। अपने क्षेत्र के छोटे-बड़े समाचार, घटना, दुर्घटना, भ्रष्टाचार एवं अपनी संस्था के विज्ञापन प्रसारण हेतु संपर्क करें: 7647981711, 9303948009।
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