डीएमएफ से हुनर को रोजगार की उड़ान
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
युवाओं को प्रशिक्षण के साथ आवास, भोजन और औजार किट की सुविधा, सौर ऊर्जा से लेकर ड्रोन तकनीक तक रोजगार के नए अवसर
कोरबा ACGN:- जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) कोरबा ने जिले के युवाओं को हुनरमंद बनाने के साथ उन्हें रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल शुरू की है। जिला कौशल विकास प्राधिकरण के माध्यम से शासकीय प्रशिक्षण केंद्रों में युवाओं को उनकी रुचि और स्थानीय रोजगार की जरूरतों के अनुरूप विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। खास बात यह है कि प्रशिक्षण तक सीमित रहने के बजाय युवाओं को प्रशिक्षण के बाद अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के ऐसे युवाओं के लिए यह पहल विशेष रूप से उपयोगी साबित हो रही है, जिनके लिए प्रतिदिन प्रशिक्षण केंद्र तक पहुंचना आसान नहीं होता। डीएमएफ के सहयोग से मुख्यमंत्री कौशल विकास योजना और प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना के अंतर्गत विभिन्न व्यवसायों में प्रशिक्षण लेने वाले युवाओं के लिए आवासीय सुविधा और भोजन की व्यवस्था की जा रही है। इससे प्रशिक्षण में नियमित उपस्थिति बढ़ने के साथ प्रशिक्षण बीच में छोड़ने की संभावना भी कम हो रही है।

सौर ऊर्जा से स्वरोजगार की नई राह
कोरबा के आजीविका महाविद्यालय में सौर पैनल स्थापना और रखरखाव से संबंधित प्रशिक्षण को बढ़ावा दिया जा रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में 60 हितग्राहियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इसके तहत एक समूह के 30 हितग्राहियों का प्रशिक्षण प्रारंभ हो चुका है। प्रशिक्षण की अवधि दो माह निर्धारित है।
प्रशिक्षण के साथ प्रारंभिक किट और प्रशिक्षण पूरा करने के बाद स्वरोजगार शुरू करने के लिए आवश्यक औजार किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जा रही है। इसका उद्देश्य युवाओं को केवल प्रमाणपत्र तक सीमित न रखते हुए उन्हें ऐसा कौशल देना है, जिसके आधार पर वे स्वयं काम शुरू कर आय अर्जित कर सकें।
औजार किट मिलने के बाद प्रशिक्षित युवा सौर पैनल स्थापना और रखरखाव से जुड़े कार्य शुरू कर सकेंगे। इससे एक ओर युवाओं के लिए स्थानीय स्तर पर कमाई के अवसर बढ़ेंगे, वहीं दूसरी ओर जिले में सौर ऊर्जा से जुड़ी सेवाओं के लिए प्रशिक्षित तकनीशियन भी उपलब्ध होंगे।

ड्रोन तकनीक से जुड़ेगा युवाओं का भविष्य
आधुनिक तकनीक और बदलते रोजगार बाजार को ध्यान में रखते हुए आजीविका महाविद्यालय कोरबा को ड्रोन कौशल केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी पहल की जा रही है। प्रस्तावित ड्रोन प्रयोगशाला के माध्यम से युवाओं को सर्वेक्षण, भूमि मानचित्रण, कृषि सर्वेक्षण, सौर स्थल निरीक्षण, त्रि-आयामी मॉडल तैयार करने और व्यावसायिक वीडियोग्राफी जैसे क्षेत्रों में व्यावहारिक प्रशिक्षण देने की योजना है।
खनन और ऊर्जा के साथ कृषि गतिविधियों वाले कोरबा जिले में ड्रोन तकनीक का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में युवाओं को इस आधुनिक तकनीक से जोड़ना उनके लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए रास्ते खोल सकता है। भविष्य में महिला स्व-सहायता समूहों को भी ‘ड्रोन दीदी’ मॉडल से जोड़ने की संभावना इस पहल को और व्यापक बना सकती है।

प्रशिक्षण के बाद औजार भी, ताकि हुनर बने कमाई का जरिया
युवाओं को प्रशिक्षण देने के साथ उन्हें काम शुरू करने के लिए जरूरी संसाधन उपलब्ध कराने की दिशा में भी डीएमएफ द्वारा विशेष ध्यान दिया गया है। वेल्डर व्यवसाय में 60 हितग्राहियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें वर्तमान में 30 हितग्राहियों का प्रशिक्षण संचालित है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद हितग्राहियों को वेल्डिंग मशीन, सुरक्षा टोपी, दस्ताने, एप्रन सहित आवश्यक औजारों की किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
इससे प्रशिक्षित युवा धातु निर्माण, जाली निर्माण, दरवाजा-गेट निर्माण और मरम्मत जैसे कार्य शुरू कर सकेंगे। यानी प्रशिक्षण के बाद रोजगार की तलाश में भटकने के बजाय युवा अपने हुनर के आधार पर स्वयं काम शुरू करने की स्थिति में आ सकेंगे।
इसी तरह ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण के लिए भी 60 हितग्राहियों का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। प्रशिक्षण के बाद हितग्राहियों को कन्नी, सतह समतल करने के उपकरण, साहुल, नापने की फीता, हथौड़ा, छैनी, बाल्टी और अन्य आवश्यक औजारों से युक्त किट उपलब्ध कराने की व्यवस्था है। इससे प्रशिक्षित युवा स्वरोजगार या ठेका कार्य शुरू कर सकेंगे। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में कुशल राजमिस्त्रियों की उपलब्धता बढ़ने से स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्यों को भी कुशल श्रमिक मिल सकेंगे।

हुनर से आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम
कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास के अध्यक्ष श्री कुणाल दुदावत ने कहा कि डीएमएफ कोरबा की यह पहल कौशल प्रशिक्षण को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने की दिशा में प्रभावी प्रयास है। प्रशिक्षण के साथ आवासीय सुविधा और औजार किट की व्यवस्था के माध्यम से युवाओं को केवल हुनर नहीं दिया जा रहा, बल्कि उस हुनर को आय में बदलने के लिए आवश्यक आधार भी उपलब्ध कराया जा रहा है।
डीएमएफ की इस पहल से स्थानीय स्तर पर कुशल मानव संसाधन तैयार होने के साथ युवाओं के आत्मनिर्भर बनने की संभावनाएं मजबूत होंगी। सौर ऊर्जा, ड्रोन तकनीक, वेल्डिंग और राजमिस्त्री जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को उनकी रुचि और स्थानीय जरूरत के अनुरूप काम से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यही वजह है कि कौशल विकास की यह पहल अब केवल प्रशिक्षण कार्यक्रम नहीं, बल्कि युवाओं के हाथों में हुनर और उस हुनर के जरिए रोजगार की उम्मीद देने वाली पहल के रूप में सामने आ रही है।
प्रदीप मिश्रा
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