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9,450 करोड़ से ओड़िशा का रेल नेटवर्क होगा मजबूत, चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी

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भुवनेश्वर, ओड़िशा

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- ओड़िशा ब्यूरो – स्वामी बिजयानंद जी महाराज

करीब 410 किलोमीटर रेल पटरियों का होगा विस्तार, 6,448 गांवों के लगभग 60 लाख लोगों को बेहतर रेल संपर्क मिलने की उम्मीद

भुवनेश्वर ACGN:- ओड़िशा में रेल संपर्क और माल ढुलाई क्षमता को बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ी पहल की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति की बैठक में रेलवे की चार मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। इन परियोजनाओं पर लगभग 9,450 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है और इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
चार स्वीकृत परियोजनाओं में से तीन का सीधा संबंध ओड़िशा से है। इनमें खड़गपुर-भद्रक रानीताल चौथी रेल लाइन, भद्रक-हरिदासपुर चौथी रेल लाइन तथा कटक-पारादीप बड़बंध तीसरी एवं चौथी रेल लाइन परियोजना शामिल हैं। इसके अलावा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के बीच गुम्मीदीपुड़ी-गुडूर खंड में तीसरी एवं चौथी रेल लाइन विकसित की जाएगी।
सरकार के अनुसार खड़गपुर-भद्रक रानीताल चौथी लाइन की लंबाई करीब 173 किलोमीटर होगी, जो पश्चिम बंगाल और ओड़िशा से होकर गुजरेगी। भद्रक-हरिदासपुर चौथी लाइन लगभग 75 किलोमीटर लंबी होगी, जबकि कटक-पारादीप बड़बंध खंड में तीसरी एवं चौथी लाइन के तहत करीब 72 किलोमीटर रेल मार्ग का विस्तार किया जाएगा।
इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क की क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। अतिरिक्त रेल लाइनें बनने से व्यस्त रेल मार्गों पर ट्रेनों के संचालन का दबाव कम होगा और यात्री तथा मालगाड़ियों की आवाजाही अधिक सुचारु हो सकेगी। इससे रेल यातायात में जाम की स्थिति कम होने के साथ परिचालन की गति और समयबद्धता में भी सुधार आने की संभावना है।


             लगभग 60 लाख लोगों को मिलेगा लाभ
चारों परियोजनाएं पश्चिम बंगाल, ओड़िशा, आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु के आठ जिलों को जोड़ेंगी। इनके पूरा होने के बाद लगभग 6,448 गांवों को बेहतर रेल संपर्क मिलने की उम्मीद है। इन गांवों में रहने वाली करीब 60 लाख आबादी को इसका प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष लाभ मिल सकता है।
रेलवे के लिए इन परियोजनाओं का महत्व केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं है। अतिरिक्त रेल पटरियां बनने से मालगाड़ियों के संचालन के लिए भी अधिक क्षमता उपलब्ध होगी। इससे कोयला, लौह अयस्क, सीमेंट, लोहा-इस्पात, कंटेनर, वाहन और खाद्यान्न जैसे महत्वपूर्ण सामान की ढुलाई को गति मिलने की संभावना है।


             माल ढुलाई क्षमता में भी होगी बड़ी वृद्धि
मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं के माध्यम से रेलवे की अतिरिक्त माल ढुलाई क्षमता लगभग 7.6 करोड़ टन प्रतिवर्ष बढ़ने का अनुमान है। इससे औद्योगिक क्षेत्रों और उत्पादन केंद्रों से देश के विभिन्न हिस्सों तक सामान पहुंचाने में रेल परिवहन की भूमिका और मजबूत होगी।
ओड़िशा जैसे खनिज एवं औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य के लिए रेल नेटवर्क का विस्तार विशेष मायने रखता है। बेहतर रेल संपर्क से उद्योगों को परिवहन सुविधा मिलने के साथ व्यापारिक गतिविधियों को भी गति मिल सकती है।


       पर्यटन और धार्मिक स्थलों को भी मिलेगा लाभ
रेल संपर्क के विस्तार का सकारात्मक प्रभाव ओड़िशा के पर्यटन और धार्मिक स्थलों पर भी पड़ने की उम्मीद है। भीतरकनिका राष्ट्रीय उद्यान, कुलड़ीहा वन्यजीव अभयारण्य, मां भद्रकाली मंदिर, मां धामराई मंदिर, पांचलिंगेश्वर मंदिर, तालसरी-उदयपुर और चांदीपुर समुद्र तट, गढ़ कुंजंग स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर, सारला मंदिर, धबलेश्वर मंदिर तथा ललितगिरी जैसे महत्वपूर्ण स्थलों तक पहुंच बेहतर हो सकती है।
इसके अलावा आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पुलीकट झील, नेल्लापटु पक्षी अभयारण्य तथा भगवान वीरराघव पेरुमल मंदिर जैसे पर्यटन एवं धार्मिक स्थलों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होने की संभावना है।
रेल परियोजनाओं के पूरा होने के बाद यात्रियों के लिए यात्रा अधिक सुविधाजनक होने के साथ पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं माल परिवहन के लिए अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध होने से रेलवे पर निर्भर उद्योगों और व्यापारिक क्षेत्रों को भी इसका लाभ मिल सकता है।
कुल मिलाकर लगभग 9,450 करोड़ रुपये की लागत वाली इन चार परियोजनाओं को ओड़िशा सहित पूर्वी और दक्षिणी भारत के रेल ढांचे को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। परियोजनाओं के निर्धारित समय में पूरा होने पर यात्री परिवहन, माल ढुलाई, पर्यटन और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

प्रदीप मिश्रा
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