ढाई साल बाद भी खाली निगम-बोर्डों के अध्यक्ष पद, भाजपा सरकार पर कांग्रेस का हमला
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भुवनेश्वर, ओड़िशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
करीब 32 निगमों-बोर्डों में 150 से अधिक पद रिक्त होने का दावा, प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल बोले—जल्द होगा अंतिम फैसला
भुवनेश्वर ACGN:- ओड़िशा में भाजपा सरकार के गठन को दो वर्ष पूरे होने के बाद तीसरा वर्ष शुरू हो चुका है, लेकिन विभिन्न सरकारी निगमों और बोर्डों में अध्यक्ष एवं सदस्यों के रिक्त पदों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार पर नियुक्तियों में देरी को लेकर सवाल उठाते हुए इसे सरकार की कथित प्रशासनिक अक्षमता करार दिया है। वहीं भाजपा की ओर से जल्द नियुक्तियां किए जाने का भरोसा दिलाया जा रहा है।
कांग्रेस का दावा है कि राज्य के करीब 32 महत्वपूर्ण निगमों और बोर्डों में अध्यक्ष एवं सदस्यों के 150 से अधिक पद लंबे समय से रिक्त हैं। पार्टी का आरोप है कि इन पदों पर नियुक्तियां नहीं होने से संबंधित संस्थाओं के कामकाज और प्रशासनिक निर्णयों पर भी असर पड़ रहा है।

लंबे समय से नियुक्तियां नहीं होने के कारण भाजपा से जुड़े कई वरिष्ठ कार्यकर्ताओं और संभावित दावेदारों में भी नाराजगी बढ़ने की चर्चा है। पार्टी के भीतर लंबे समय से विभिन्न पदों के लिए दावेदारी कर रहे नेताओं को अब नियुक्तियों का इंतजार है। राजनीतिक हलकों में इसे संगठन के भीतर बढ़ती असंतुष्टि और गुटबाजी से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
इसी बीच प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनमोहन सामल ने 16 अगस्त को नियुक्तियों को लेकर फिर आश्वासन दिया कि प्रक्रिया को लेकर महत्वपूर्ण स्तर पर चर्चा चल रही है और जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। उनके अनुसार प्रदेश भाजपा की ओर से संभावित नामों पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा चुकी है, लेकिन केंद्रीय स्तर से अंतिम मंजूरी मिलने के कारण नियुक्तियों की घोषणा में देरी हो रही है।
कांग्रेस का कहना है कि प्रदेश भाजपा अध्यक्ष, ओड़िशा प्रभारी और सरकार के वरिष्ठ मंत्री सुरेश पुजारी की ओर से कई बार नियुक्तियां अंतिम चरण में होने की बात कही गई, लेकिन इसके बावजूद अभी तक अधिकांश पदों पर नियुक्ति नहीं हो सकी है। विपक्ष का आरोप है कि लगातार आश्वासन दिए जाने के बावजूद जमीन पर कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है।

कांग्रेस ने सरकार पर राजनीतिक नियुक्तियों में कथित लेन-देन और दावेदारों से धन वसूली जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। भाजपा की ओर से इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया है, यह स्पष्ट रूप से सामने आना बाकी है।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निगमों और बोर्डों में लंबे समय तक नियुक्तियां नहीं होने से सरकार और संगठन के बीच समन्वय को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं। पार्टी के भीतर पद की उम्मीद लगाए बैठे नेताओं में असंतोष बढ़ने की स्थिति आगामी पंचायत एवं नगरीय निकाय चुनावों में संगठन के लिए चुनौती बन सकती है।
जानकारी के अनुसार, सार्वजनिक उपक्रम विभाग की ओर से 30 जून तक रिक्त अध्यक्ष पदों को भरने की प्रक्रिया को लेकर पत्र जारी किया गया था। इसके बावजूद निर्धारित प्रक्रिया के बाद भी नियुक्तियां नहीं हो पाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
अब निगाह इस बात पर टिकी है कि प्रदेश भाजपा नेतृत्व और सरकार कब इन रिक्त पदों पर नियुक्तियों को अंतिम रूप देते हैं। लंबे समय से चल रहे इंतजार के बीच पार्टी कार्यकर्ताओं और संभावित दावेदारों की नजरें अब उस घोषणा पर हैं, जो निगमों और बोर्डों में नई राजनीतिक नियुक्तियों का रास्ता साफ करेगी।
प्रदीप मिश्रा
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