स्वास्थ्य का सच भाग 5 :- आखिर किस पर करें भरोसा? आयुर्वेद होम्योपैथी या एलोपैथी, जानिए स्वास्थ्य का पूरा सच
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संपादकीय
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ का साप्ताहिक विशेषांक
✍️ कलम की धार ✍️
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“निष्पक्ष लेखनी • निर्भीक विश्लेषण • विश्वसनीय तथ्य • जनहित की सच्ची आवाज़” हर रविवार आपके बीच
आलेख : प्रदीप मिश्रा
स्वास्थ्य का सच : आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी आखिर आदमी बीमार क्यों पड़ता है? (भाग–5 एवं समापन)
‘कलम की धार’ अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ का साप्ताहिक विशेष स्तंभ है, जो प्रत्येक रविवार प्रकाशित होता है। इसका उद्देश्य जनहित, जनजागरूकता और समाज से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों की तथ्यपरक, निष्पक्ष एवं विश्लेषणात्मक प्रस्तुति करना है।
इस स्तंभ में समय-समय पर राजनीतिक, सामाजिक, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, संस्कृति, पर्व-त्योहार और समसामयिक विषयों पर आलोचनात्मक एवं विश्लेषणात्मक विशेष लेख प्रकाशित किए जाते हैं, ताकि पाठकों तक सच्चाई और संतुलित दृष्टिकोण पहुंच सके, ‘जिसमें जनजीवन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों को सरल, सहज और तथ्यपरक तरीके से पाठकों तक पहुंचाने का प्रयास किया जाता है।
‘स्वास्थ्य का सच’ श्रृंखला में हमने आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी के अलग-अलग पहलुओं को समझने की कोशिश की है। उद्देश्य किसी एक चिकित्सा पद्धति को श्रेष्ठ बताना नहीं, बल्कि स्वास्थ्य को लेकर सही जानकारी, जागरूकता और विवेकपूर्ण सोच को सामने लाना है। क्योंकि स्वस्थ समाज की शुरुआत जागरूक व्यक्ति से होती है।
आज का विषय – हम बीमार क्यों पड़ते हैं? जवाब दवाओं में कम, हमारी जीवनशैली में ज्यादा छिपा है
तीन चिकित्सा पद्धतियां, एक लक्ष्य, स्वस्थ और सुरक्षित जीवन
चार भागों की इस यात्रा में हमने जाना कि मनुष्य क्यों बीमार पड़ता है, आयुर्वेद शरीर को किस दृष्टि से देखता है, होम्योपैथी रोगी को कैसे समझती है और एलोपैथी आधुनिक विज्ञान के बल पर किस प्रकार लाखों लोगों का जीवन बचाती है। अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि आम आदमी किस पर विश्वास करे?
इसका उत्तर किसी एक चिकित्सा पद्धति को श्रेष्ठ और दूसरी को कमजोर बताने में नहीं है। वास्तविक उत्तर संतुलन में है।
बीमारी आने से पहले स्वास्थ्य की रक्षा
एक पुरानी कहावत है “इलाज से बेहतर बचाव है।” यदि हम गहराई से देखें तो आयुर्वेद, होम्योपैथी और एलोपैथी तीनों किसी न किसी रूप में इस बात को स्वीकार करते हैं कि स्वस्थ जीवनशैली का महत्व बहुत बड़ा है। सुबह समय पर उठना, शुद्ध और संतुलित भोजन करना, मौसमी फल और सब्जियां खाना, नियमित व्यायाम या योग करना, पर्याप्त नींद लेना, नशे से दूर रहना, तनाव कम करना…ये बातें किसी एक चिकित्सा पद्धति की नहीं, बल्कि स्वस्थ जीवन की बुनियादी शर्तें हैं।
आधुनिक जीवनशैली : सुविधा बढ़ी, स्वास्थ्य घटा?
आज इंसान के पास समय बचाने वाली हर सुविधा है, मोटरसाइकिल है, कार है, लिफ्ट है, मोबाइल है, ऑनलाइन खाना है, एयर कंडीशनर है, लेकिन क्या स्वास्थ्य भी पहले से बेहतर हुआ है?
बच्चों का खेल मैदान मोबाइल की स्क्रीन बन गया है, युवाओं की रातें नींद के बजाय इंटरनेट पर गुजर रही हैं, कार्यालयों में घंटों बैठकर काम करने की आदत बढ़ रही है, फास्ट फूड ने रसोई की जगह ले ली है, मिलावटी खाद्य पदार्थ, प्रदूषित हवा, तनाव और भागदौड़ शरीर पर लगातार असर डाल रहे हैं।
इसका परिणाम मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मानसिक तनाव के रूप में सामने आ रहा है।
सबसे बड़ा डॉक्टर कौन?
यदि किसी वैद्य, होम्योपैथ या एलोपैथिक चिकित्सक से पूछा जाए कि सबसे बड़ी दवा क्या है, तो उत्तर अलग-अलग हो सकते हैं।
लेकिन यदि जीवन को देखा जाए, तो शायद सबसे बड़ा डॉक्टर हमारा अपना शरीर है, शरीर लगातार संकेत देता है, भूख कम लग रही है, नींद नहीं आ रही, बार-बार थकान हो रही है, वजन तेजी से बढ़ या घट रहा है, बार-बार प्यास लग रही है, पाचन खराब है, शरीर हमें समय रहते चेतावनी देता है, लेकिन हम अक्सर उसे नजरअंदाज कर देते हैं, जब तक बीमारी बड़ी नहीं हो जाती, तब तक डॉक्टर के पास नहीं जाते।
क्या तीनों चिकित्सा पद्धतियां साथ चल सकती हैं?
आज दुनिया में समन्वित स्वास्थ्य देखभाल (इंटीग्रेटिव हेल्थकेयर) पर भी चर्चा होती है, जिसमें अलग-अलग चिकित्सा पद्धतियों का उपयोग उनकी क्षमता और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों के अनुसार किया जाता है, गंभीर दुर्घटना, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, बड़े ऑपरेशन और आपातकालीन स्थितियों में आधुनिक चिकित्सा की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है।
दूसरी ओर, संतुलित जीवनशैली, योग, आहार और कुछ स्थितियों में आयुर्वेद या अन्य मान्यता प्राप्त पद्धतियां भी योग्य चिकित्सकों के मार्गदर्शन में सहायक भूमिका निभा सकती हैं।
महत्वपूर्ण बात यह है कि किसी भी उपचार का चयन प्रशिक्षित और पंजीकृत चिकित्सक की सलाह से किया जाए।
सरकार और समाज की जिम्मेदारी
स्वास्थ्य केवल डॉक्टरों की जिम्मेदारी नहीं है, सरकार की जिम्मेदारी है कि सरकारी अस्पतालों को बेहतर बनाया जाए, गांव-गांव तक योग्य चिकित्सक पहुंचें, आवश्यक दवाएं और जांच सुविधाएं उपलब्ध हों, गरीब और मध्यम वर्ग का इलाज आर्थिक रूप से सुलभ हो, चिकित्सा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
समाज की जिम्मेदारी है कि बिना सलाह के दवा न ले, अफवाहों के आधार पर इलाज न करे, समय पर जांच कराए, टीकाकरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य उपायों का पालन करे, संतुलित जीवनशैली अपनाए।
आज इंसान चांद पर पहुंच गया है, लेकिन अपने शरीर की आवाज सुनना भूल गया है, हम दवा समय पर खरीद लेते हैं, लेकिन भोजन समय पर नहीं करते, मोबाइल की बैटरी खत्म होने से पहले चार्जर ढूंढ लेते हैं, लेकिन अपने शरीर को आराम देने का समय नहीं निकालते, महंगी कार की सर्विस समय पर कराते हैं, लेकिन वर्षों तक अपना स्वास्थ्य परीक्षण नहीं कराते।
सच्चाई यह है कि बीमारी अचानक नहीं आती। वह धीरे-धीरे हमारे खान-पान, हमारी दिनचर्या, हमारे तनाव, हमारी लापरवाही और कई बार हमारी परिस्थितियों के साथ विकसित होती है।
आयुर्वेद हमें प्रकृति के करीब रहना सिखाता है।
होम्योपैथी रोगी को समझने की बात करती है।
एलोपैथी आधुनिक विज्ञान के माध्यम से गंभीर बीमारियों और आपातकालीन स्थितियों में जीवन बचाती है।
तीनों का उद्देश्य एक ही है मनुष्य को स्वस्थ रखना।
किसी भी चिकित्सा पद्धति को अंधविश्वास या अंधविरोध की दृष्टि से नहीं देखना चाहिए। विवेकपूर्ण निर्णय, योग्य चिकित्सक का मार्गदर्शन और वैज्ञानिक दृष्टिकोण ही सबसे सुरक्षित रास्ता है।
स्वास्थ्य किसी अस्पताल में नहीं बनता, स्वास्थ्य हमारे भोजन में बनता है, हमारी दिनचर्या में बनता है, हमारी सोच में बनता है, हमारी नींद में बनता है, हमारे श्रम में बनता है. और सबसे बढ़कर, स्वास्थ्य तब बनता है जब हम अपने शरीर का सम्मान करना सीखते हैं।
बीमारी से लड़ना डॉक्टर का काम है, लेकिन बीमारी को आने से रोकना हमारी जिम्मेदारी है। यदि समाज स्वस्थ होगा, तो परिवार मजबूत होंगे; परिवार मजबूत होंगे, तो राष्ट्र भी मजबूत होगा। यही इस लेख का सार है।
‘कलम की धार’ की इस पांच भागों की स्वास्थ्य यात्रा का सार यही है कि किसी एक चिकित्सा पद्धति को लेकर अंधविश्वास या अंधविरोध के बजाय सही समय पर सही चिकित्सकीय सलाह, स्वस्थ जीवनशैली और विवेकपूर्ण निर्णय को प्राथमिकता दी जाए।
स्वास्थ्य कोई एक दिन की उपलब्धि नहीं, बल्कि रोज निभाई जाने वाली जिम्मेदारी है।
यही स्वास्थ्य का सच है।
यही ‘कलम की धार’ का संदेश है।
(यह लेख जनजागरूकता और स्वास्थ्य संबंधी विमर्श के उद्देश्य से प्रकाशित किया गया है। किसी भी बीमारी के निदान या उपचार के लिए योग्य एवं पंजीकृत चिकित्सक से परामर्श अवश्य लें।)
प्रदीप मिश्रा
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