नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 7647981711 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , हरेली पर कोरबा में बिखरी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा, गेड़ी दौड़ और लोकनृत्य ने बांधा समां – Anjor Chhattisgarh News

Anjor Chhattisgarh News

सच की तह तक

हरेली पर कोरबा में बिखरी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की छटा, गेड़ी दौड़ और लोकनृत्य ने बांधा समां

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009


छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर परिसर में हुआ भव्य आयोजन, डॉ. चरणदास महंत और पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल का आत्मीय स्वागत; लोकपर्व में उमड़ा जनसैलाब

कोरबा। छत्तीसगढ़ के लोकपर्व हरेली के अवसर पर बुधवार, 12 अगस्त को हसदेव नदी के तट पर भवानी मंदिर के समीप स्थित छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर परिसर में संस्कृति, परंपरा और माटी की खुशबू से सराबोर भव्य आयोजन किया गया। छत्तीसगढ़ महतारी संस्कृति संवर्धन सेवा समिति, कोरबा के तत्वावधान में आयोजित इस हरेली महोत्सव में बड़ी संख्या में नागरिक, महिलाएं, युवा और लोककला प्रेमी शामिल हुए।


कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत मुख्य अतिथि के रूप में तथा पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल अध्यक्ष के रूप में उपस्थित रहे। दोनों अतिथियों के मंदिर परिसर पहुंचने पर उपस्थित लोगों ने ढोल-नगाड़ों, पुष्पहार और पारंपरिक तरीके से आत्मीय स्वागत किया। अतिथियों के आगमन पर लोक कलाकारों ने छत्तीसगढ़ के राज्यगीत ‘अरपा पैरी के धार’ की मनमोहक प्रस्तुति दी।
हरेली महोत्सव के दौरान पूरा परिसर छत्तीसगढ़ी लोकजीवन के रंग में रंगा नजर आया। लोकगीत और लोकनृत्य के साथ गेड़ी दौड़, नरियर फेंक, फुगड़ी सहित पारंपरिक खेलों ने लोगों का विशेष आकर्षण खींचा। कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोकसंस्कृति से रूबरू कराया।


हरेली हमारी माटी, किसान और छत्तीसगढ़ की आत्मा का पर्व : डॉ. चरणदास महंत
मुख्य अतिथि डॉ. चरणदास महंत ने प्रदेशवासियों को हरेली पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि हरेली केवल कृषि उपकरणों की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की माटी, किसान, प्रकृति, पशुधन और लोकजीवन के बीच अटूट संबंध का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी लोकसंस्कृति और परंपराओं से है। आज आवश्यकता है कि नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ा जाए। हरेली जैसे लोकपर्व हमारी सांस्कृतिक विरासत को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
डॉ. महंत ने कहा कि “हरेली केवल पर्व नहीं, यह छत्तीसगढ़ की माटी, किसान और लोकजीवन की आत्मा है। अपनी संस्कृति को बचाना अपनी पहचान को बचाना है।” उन्होंने छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर परिसर में आयोजित आयोजन की सराहना करते हुए समिति के पदाधिकारियों और आयोजन से जुड़े सभी लोगों को बधाई दी।


हरेली हमारी पहचान और छत्तीसगढ़ी अस्मिता का गौरव : जयसिंह अग्रवाल
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे पूर्व राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ के महत्वपूर्ण लोकपर्वों में से एक है। इसमें कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति सम्मान और सामाजिक एकजुटता की भावना दिखाई देती है।
उन्होंने कहा कि किसान और कृषि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ लोकसंस्कृति की भी आधारशिला हैं। हरेली के माध्यम से हम कृषि उपकरणों, पशुधन और प्रकृति के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं।
श्री अग्रवाल ने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर कोरबा में सांस्कृतिक चेतना और छत्तीसगढ़ी अस्मिता के प्रतीक के रूप में विकसित हो रहा है। ऐसे आयोजन युवा पीढ़ी को अपनी माटी, बोली, परंपरा और संस्कृति से जोड़ने का काम करते हैं।
उन्होंने कहा, “जिस समाज को अपनी माटी और संस्कृति पर गर्व होता है, उसकी पहचान और आत्मसम्मान को कोई मिटा नहीं सकता। हरेली हमारी इसी गौरवशाली पहचान का उत्सव है।”

लोकगीत, नृत्य और पारंपरिक खेलों ने मोहा मन
महोत्सव में छत्तीसगढ़ी लोकमंच के प्रसिद्ध कलाकार थिरमनदास और उनकी मंडली ने विभिन्न सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। लोकगीतों और लोकनृत्यों पर उपस्थित दर्शक झूमते नजर आए। इसके साथ ही गेड़ी दौड़, नरियर फेंक और फुगड़ी सहित पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया।
बड़ी संख्या में लोगों ने इन प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्साहपूर्वक भाग लिया। आयोजन ने हरेली के पारंपरिक स्वरूप को जीवंत कर दिया।


22 वर्षों से कोरबा में जारी है हरेली का आयोजन
समिति के प्रदेश अध्यक्ष मोहन सिंह प्रधान ने कहा कि कोरबा में पिछले 22 वर्षों से लगातार हरेली पर्व का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने इसके लिए पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के सहयोग को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि उनके सहयोग के बिना इतने लंबे समय से यह आयोजन निरंतर कर पाना संभव नहीं होता।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर के निर्माण और प्रतिवर्ष होने वाले आयोजनों में भी श्री अग्रवाल का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। इस मंच के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति और परंपराओं को आगे बढ़ाने का प्रयास लगातार जारी है।
छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर बना सांस्कृतिक चेतना का केंद्र
हसदेव नदी के तट पर स्थित छत्तीसगढ़ महतारी मंदिर परिसर में आयोजित हरेली महोत्सव ने एक बार फिर इस स्थल को सांस्कृतिक गतिविधियों के प्रमुख केंद्र के रूप में सामने रखा। समिति के अनुसार यह मंदिर छत्तीसगढ़ महतारी को समर्पित है और इसके निर्माण में पूर्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल के प्रयास महत्वपूर्ण रहे हैं।
समिति के महासचिव प्यारे लाल चौधरी ने आयोजन की सफलता के लिए अतिथियों, कलाकारों, सामाजिक संगठनों, नागरिकों और उपस्थित जनसमुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि हरेली महोत्सव का उद्देश्य केवल पर्व मनाना नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोकसंस्कृति, कृषि परंपरा और सामाजिक समरसता को मजबूत करना है।
कार्यक्रम में समिति के संरक्षक हरिश्चंद्र निषाद, प्रदेश अध्यक्ष मोहन सिंह प्रधान, महासचिव प्यारे लाल चौधरी सहित समिति के पदाधिकारी, महिला प्रकोष्ठ की पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता, कांग्रेस से जुड़े अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में आम नागरिक उपस्थित रहे।
हरेली महोत्सव ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की असली पहचान उसकी माटी, बोली, लोककला, कृषि परंपरा और सामाजिक एकजुटता में बसती है। कोरबा में आयोजित इस आयोजन में जहां परंपराओं की झलक दिखाई दी, वहीं नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का प्रयास भी नजर आया।

प्रदीप मिश्रा
देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़  हम लाते हैं निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबरें।

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now