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तमनार के चर्चित दोहरे हत्याकांड में चार दोषियों को आजीवन कारावास, रायगढ़ पुलिस की सशक्त विवेचना से मिला न्याय

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN, 7647981711 | 9303948009
संवाददाता : संजय जेठवानी


तीन वर्ष पुराने बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में न्यायालय का बड़ा फैसला, वैज्ञानिक साक्ष्यों और मजबूत विवेचना के आधार पर चारों आरोपियों को दो-दो आजीवन कारावास की सजा।

रायगढ़, ACGN : रायगढ़ जिले के तमनार थाना क्षेत्र में वर्ष 2023 में हुए बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में विशेष न्यायाधीश (अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम), रायगढ़ ने बड़ा फैसला सुनाते हुए चार आरोपियों को दोषी करार दिया है। न्यायालय ने प्रत्येक आरोपी को दो-दो आजीवन कारावास एवं अर्थदंड से दंडित किया है। यह फैसला 31 जुलाई 2026 को सुनाया गया।
अभियोजन के अनुसार 19 जुलाई 2023 की रात ग्राम गोढ़ी में पुरानी रंजिश के चलते आरोपियों ने पूर्व नियोजित षड्यंत्र के तहत अनुसूचित जनजाति वर्ग के राघुवन चौहान और उद्धव चौहान पर टांगी, डंडों एवं अन्य घातक हथियारों से हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। वारदात के बाद आरोपियों ने साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से एक शव को सड़क तक घसीटकर घटना को दुर्घटना का रूप देने का प्रयास भी किया था।

तत्कालीन एसडीओपी दीपक मिश्रा धर्मजयगढ़


घटना की सूचना मिलते ही तमनार पुलिस ने तत्काल अपराध दर्ज कर जांच शुरू की। प्रारंभिक विवेचना तत्कालीन थाना प्रभारी निरीक्षक आशीर्वाद राहटगांवकर ने की। घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाए गए, गवाहों के बयान दर्ज किए गए तथा आरोपियों की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त हथियार बरामद किए गए।
अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत आगे की विवेचना तत्कालीन एसडीओपी धरमजयगढ़ दीपक मिश्रा ने की। उन्होंने प्रत्यक्षदर्शी गवाहों के धारा 164 के तहत बयान दर्ज कराए, आवश्यक दस्तावेजी एवं जाति संबंधी साक्ष्य एकत्रित किए तथा मजबूत अभियोग पत्र तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत किया।

निरीक्षक आशीर्वाद राहटगांवकर


प्रकरण में राज्य शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक राजीव बेरीवाल ने प्रभावी पैरवी की। अभियोजन ने न्यायालय के समक्ष 22 गवाहों के बयान, 81 दस्तावेजी साक्ष्य और 20 भौतिक साक्ष्य प्रस्तुत किए। इन्हीं ठोस साक्ष्यों के आधार पर न्यायालय ने चारों आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302/120-बी, 201/120-बी तथा अनुसूचित जाति एवं जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की धारा 3(2)(v) के तहत दोषी ठहराते हुए दो-दो आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
दोषी ठहराए गए आरोपियों में हरिलाल उरांव, मुकेश पडिहारी, जितेन्द्र पटनायक उर्फ जीतू तथा गणेश पडिहारी शामिल हैं, जो सभी ग्राम गोढ़ी, थाना तमनार, जिला रायगढ़ के निवासी हैं।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने कहा कि जिले के सभी गंभीर मामलों की विवेचना वैज्ञानिक एवं तथ्यपरक तरीके से करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि न्यायालय में मजबूत साक्ष्यों के आधार पर अपराधियों को कठोर दंड दिलाया जा सके। उन्होंने समस्त विवेचकों को न्यायालयीन प्रक्रिया में समंस एवं वारंटों की समयबद्ध तामिली सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए हैं।


प्रदीप मिश्रा
प्रधान संपादक
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ (ACGN)
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