राष्ट्रपति भवन में गूंजा बस्तर का गौरव: मांझी-चालकी बने विशेष अतिथि, राष्ट्रपति ने स्वयं परोसा भोजन
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN | 7647981711 9303948009
209 सदस्यीय बस्तर प्रतिनिधिमंडल का ऐतिहासिक सम्मान, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने जताई बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा
रायपुर, 30 जुलाई 2026। भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक यादगार पल उस समय दर्ज हुआ, जब राष्ट्रपति भवन में पहली बार बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपरागत नेतृत्व व्यवस्था और लोककला का भव्य स्वरूप दिखाई दिया। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचे 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का राष्ट्रपति भवन में आत्मीय स्वागत किया गया, जहां राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसकर उनका सम्मान किया।

प्रतिनिधिमंडल में बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार, परंपरागत जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था के मांझी-चालकी, परगना मांझी, पद्मश्री सम्मानित विभूतियां, जनप्रतिनिधि एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे। राष्ट्रपति भवन में आयोजित यह विशेष सम्मान समारोह बस्तर की सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पहचान दिलाने वाला ऐतिहासिक अवसर बन गया।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने प्रतिनिधिमंडल से आत्मीय संवाद करते हुए बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककला, मांझी-चालकी व्यवस्था और बस्तर पंडुम के आयोजन की विस्तृत जानकारी ली। उन्होंने कहा कि बस्तर की सांस्कृतिक विरासत भारत की अमूल्य धरोहर है, जिसका संरक्षण पूरे देश की जिम्मेदारी है।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के आग्रह पर राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और बस्तर पंडुम में शामिल होने की इच्छा भी व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बस्तर दशहरा की परंपराएं उन्हें विशेष रूप से आकर्षित करती हैं और उनका इस आयोजन से आत्मीय जुड़ाव है। राष्ट्रपति ने यह भी बताया कि उनके पिता स्वयं मांझी रहे हैं,

इसलिए जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था से उनका भावनात्मक संबंध है।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार के सतत प्रयासों और जनभागीदारी के कारण बस्तर आज शांति, विकास और समृद्धि की नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने शिक्षा, सड़क, बिजली, पेयजल और अन्य आधारभूत सुविधाओं के विस्तार की सराहना करते हुए इसे पूरे देश के लिए सकारात्मक परिवर्तन बताया।

उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम ने जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और परंपराओं को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के साथ-साथ पर्यटन, स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा देते हैं।

इस अवसर पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि वे कई बार राष्ट्रपति भवन आए हैं, लेकिन पहली बार उन्होंने यहां बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में इतने बड़े जनजातीय प्रतिनिधिमंडल को एक साथ देखा है। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता और जनजातीय गौरव का अद्भुत प्रतीक बताया।

मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह सम्मान केवल बस्तर का नहीं, बल्कि पूरे छत्तीसगढ़ का सम्मान है। उन्होंने कहा कि बस्तर आज शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान के साथ आगे बढ़ रहा है तथा बस्तर पंडुम जैसे आयोजनों ने जनजातीय संस्कृति को राष्ट्रीय मंच प्रदान किया है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की लगभग 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा “झिटकू-मिटकी” पर आधारित विशेष कलाकृति स्मृति-चिह्न के रूप में भेंट की। यह कलाकृति प्रेम, त्याग, लोकआस्था और सामाजिक समरसता का प्रतीक मानी जाती है तथा बस्तर की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
समारोह के बाद प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण कर देश की लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक विरासत से जुड़े ऐतिहासिक स्थलों का भी अवलोकन किया।

राष्ट्रपति का आत्मीय व्यवहार, बस्तर आने की इच्छा और जनजातीय समाज के प्रति सम्मान ने पूरे प्रतिनिधिमंडल को भावुक कर दिया। यह अवसर बस्तर की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय मंच पर नई प्रतिष्ठा दिलाने वाला ऐतिहासिक क्षण बन गया।
प्रदीप मिश्रा
संपादक – अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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