सरकारी स्कूलों से क्यों टूट रहा भरोसा? बढ़ते निजी स्कूल, घटती दर्ज संख्या और शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
कोरबा छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता – दीपक पटेल
शासकीय विद्यालयों में लगातार घट रहे प्रवेश ने खड़ी की गंभीर चुनौती, आखिर अभिभावक सरकारी स्कूलों से दूर क्यों हो रहे हैं?
कोरबा ACGN विशेष:- सरकारी विद्यालयों में लगातार घटती छात्र संख्या अब केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था के सामने खड़ी एक गंभीर चुनौती बन चुकी है। यदि किसी एक संकुल की स्थिति का तथ्यात्मक अध्ययन किया जाए तो पूरे विकासखंड और जिले की वास्तविक तस्वीर सामने आ जाती है।
जवाली-देवरी संकुल इसका एक प्रमुख उदाहरण है। यहां लगभग दो दर्जन शासकीय प्राथमिक, माध्यमिक, हाई स्कूल और उच्चतर माध्यमिक विद्यालय संचालित हैं, वहीं केवल दो निजी विद्यालय—मां सरस्वती विद्या मंदिर, बुंदेली और शिशु बाल मंदिर, चाकाबुड़ा—भी संचालित हैं। तुलना करने पर स्पष्ट दिखाई देता है कि जहां सरकारी विद्यालयों में प्रवेश लगातार घट रहा है, वहीं निजी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या हर वर्ष बढ़ती जा रही है।
करीब 15 से 20 वर्ष पहले वर्ष 2004-05 में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जवाली में 500 से 600 विद्यार्थियों का नामांकन हुआ करता था। आज यही संख्या घटकर लगभग 350 रह गई है। दूसरी ओर निजी विद्यालय बुंदेली में लगभग 350 तथा चाकाबुड़ा में लगभग 250 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। सबसे चिंताजनक स्थिति यह है कि कुछ सरकारी विद्यालयों में पहली कक्षा में एक भी नया प्रवेश नहीं हो पा रहा है।
सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब सरकारी विद्यालयों में प्रशिक्षित और विषय विशेषज्ञ शिक्षक कार्यरत हैं तथा उन्हें बेहतर वेतनमान भी प्राप्त है, तब भी अभिभावकों का विश्वास आखिर क्यों कम होता जा रहा है? वहीं निजी विद्यालयों में अपेक्षाकृत कम वेतन पाने वाले शिक्षक नियमित पढ़ाई, अनुशासन, समयबद्ध कक्षाएं, निरंतर मूल्यांकन और अभिभावकों से बेहतर संवाद के कारण लोगों का भरोसा जीत रहे हैं।
एक और तथ्य समाज के सामने बड़ा सवाल खड़ा करता है। बड़ी संख्या में सरकारी शिक्षक स्वयं अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में पढ़ाते हैं। इससे आम अभिभावकों के बीच यह संदेश जाता है कि यदि शिक्षक स्वयं सरकारी शिक्षा व्यवस्था पर पूरा भरोसा नहीं कर रहे हैं, तो वे अपने बच्चों को वहां क्यों भेजें?
ग्रामीण क्षेत्रों में कई सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या इतनी कम हो गई है कि एक ही शिक्षक को कई कक्षाओं का संचालन करना पड़ रहा है। इससे शिक्षण की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है।
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार सरकारी विद्यालयों में घटते प्रवेश के पीछे कई प्रमुख कारण हैं—समय पर शिक्षकों की उपलब्धता में कमी, शैक्षणिक गतिविधियों का कमजोर होना, विद्यार्थियों की नियमित निगरानी का अभाव, अंग्रेजी माध्यम के प्रति बढ़ता आकर्षण, निजी विद्यालयों का प्रभावी प्रचार-प्रसार, अभिभावकों से सीमित संवाद, आधारभूत सुविधाओं की कमी, तकनीकी एवं कंप्यूटर शिक्षा की बढ़ती मांग तथा जवाबदेही की कमी।
यदि शासन वास्तव में सरकारी विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाना चाहता है तो केवल भवन निर्माण, निःशुल्क पाठ्यपुस्तक, गणवेश या अन्य योजनाएं पर्याप्त नहीं होंगी। प्रवेश उत्सव, स्कूल चले हम अभियान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षण, नियमित शैक्षणिक गतिविधियां, अनुशासन, पारदर्शी मूल्यांकन, अभिभावकों का विश्वास जीतने के प्रयास और शिक्षकों की जवाबदेही सुनिश्चित करनी होगी। साथ ही यदि सरकारी शिक्षक स्वयं अपने बच्चों को सरकारी विद्यालयों में पढ़ाने जैसी सकारात्मक पहल करें तो इससे समाज में विश्वास बहाल करने का मजबूत संदेश जाएगा।
सरकारी विद्यालय केवल शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि सामाजिक समानता की नींव हैं। यदि समय रहते घटती छात्र संख्या की इस चुनौती का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले वर्षों में अनेक सरकारी विद्यालय केवल भवन बनकर रह जाएंगे। यह केवल शिक्षा विभाग की नहीं, बल्कि पूरे समाज की चिंता का विषय है।
(यह लेख उपलब्ध आंकड़ों एवं क्षेत्रीय अवलोकन पर आधारित खोजपरक विश्लेषण है। व्यापक निष्कर्ष के लिए जिला एवं राज्य स्तर के आधिकारिक नामांकन आंकड़ों का अध्ययन भी आवश्यक है।)
प्रदीप मिश्रा
देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
हम लाते हैं निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबरें
अपने क्षेत्र के समाचार एवं विज्ञापन प्रसारण हेतु संपर्क करें : 7647981711, 9303948009
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space


