विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाएं : मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी
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भुवनेश्वर, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजयानंद जी महाराज (ओडिशा ब्यूरो)
मुख्यमंत्री ने विशेष विकास परिषदों के नवनियुक्त पदाधिकारियों से जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास और विरासत संरक्षण के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का किया आह्वान।
भुवनेश्वर ACGN:- मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने शनिवार को विशेष विकास परिषद (एसडीसी) के नवनियुक्त अध्यक्षों और उपाध्यक्षों से जनजातीय क्षेत्रों के अंतिम व्यक्ति तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए समर्पित भाव से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सरकार के लिए राजनीति सत्ता का उपभोग नहीं, बल्कि अंत्योदय के माध्यम से समाज के अंतिम पायदान पर खड़े गरीब और जरूरतमंद लोगों की सेवा का माध्यम है।
लोकसेवा भवन के कन्वेंशन सेंटर में आयोजित बैठक में मुख्यमंत्री ने राज्य के 23 विशेष विकास परिषदों के अध्यक्षों और उपाध्यक्षों के साथ जनजातीय क्षेत्रों के विकास, स्थानीय समस्याओं तथा भविष्य की योजनाओं पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि परिषदों को अधिकारी, विभाग और मंत्री स्तर पर पूरा सहयोग मिलेगा तथा जनप्रतिनिधियों को नियमित रूप से अपने क्षेत्रों का दौरा कर लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ओडिशा की लगभग एक चौथाई आबादी जनजातीय समुदाय से संबंधित है, लेकिन यह वर्ग अभी भी विकास की मुख्यधारा से पीछे है। राज्य सरकार जनजातीय क्षेत्रों के सर्वांगीण विकास, उनकी भाषा, संस्कृति और परंपराओं के संरक्षण तथा आजीविका सुदृढ़ीकरण के लिए अनेक विशेष योजनाएं संचालित कर रही है।

उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के “विकास भी, विरासत भी” मंत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि विकास के साथ-साथ जनजातीय संस्कृति और विरासत का संरक्षण भी समान रूप से आवश्यक है। मुख्यमंत्री ने तकनीकी शिक्षा में आरक्षण, शहीद माधो सिंह हाथ खर्च योजना, प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति में वृद्धि तथा मुख्यमंत्री जनजाति जीविका मिशन के माध्यम से सूक्ष्म उद्यमों को प्रोत्साहन देने जैसी योजनाओं की जानकारी भी साझा की।
मुख्यमंत्री ने बताया कि संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत केंद्र सरकार द्वारा जनजातीय विकास एवं कल्याण के लिए राज्य को 18,371 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए गए हैं, जिनका उपयोग जनजातीय क्षेत्रों के समग्र विकास में किया जा रहा है।
अनुसूचित जनजाति एवं अनुसूचित जाति विकास मंत्री नित्यानंद गंड ने कहा कि विशेष विकास परिषदों का गठन जनजातीय क्षेत्रों तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाने तथा उनकी कला, संस्कृति और विरासत के संरक्षण के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने परिषद के पदाधिकारियों से जमीनी स्तर की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाने और जनजातीय कल्याण के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।
मुख्य सचिव अनु गर्ग ने परिषदों में महिला और पुरुष दोनों को प्रतिनिधित्व दिए जाने को एक आदर्श पहल बताते हुए कहा कि वर्ष 2036 के विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा।
प्रदीप मिश्रा
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