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एमयूसी महिला महाविद्यालय में ‘वंदे मातरम्’ के 150 वर्ष पर अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का सफल समापन

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बर्धमान, पश्चिम बंगाल

By ACGN 7647981711, 9303948009

संवाददाता :- विनोद यादव

साहित्य, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना पर वैश्विक मंथन, 80 से अधिक शोध पत्रों की हुई प्रस्तुति

बर्धमान ACGN:- महाराजाधिराज उदय चंद महिला महाविद्यालय (एमयूसी), बर्धमान में आयोजित दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी “औपनिवेशिक भारत में साहित्य और राष्ट्रीय चेतना की कथाएँ : वंदे मातरम् के 150 वर्ष” का सफल समापन हुआ। महाविद्यालय के इतिहास विभाग एवं आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ (आईक्यूएसी) द्वारा पश्चिम बंगाल हिंदी विश्वविद्यालय, हावड़ा के सहयोग तथा भारतीय सामाजिक विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएसएसआर) के पूर्वी क्षेत्रीय केंद्र के समर्थन से आयोजित इस संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों ने भाग लेकर साहित्य, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना के विभिन्न आयामों पर विचार साझा किए।

संगोष्ठी के अंतिम दिन कार्यक्रम की शुरुआत प्रधानाचार्या डॉ. अशरफी खातून, आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. इंद्राणी पॉल तथा अन्य अतिथियों द्वारा बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर की गई। मुख्य व्याख्यान पश्चिम बंगाल हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने दिया। उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ के साहित्यिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि औपनिवेशिक भारत में राष्ट्रवादी चेतना के निर्माण में साहित्य की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है।

संगोष्ठी में मॉरीशस के प्रोफेसर अरविंद बिस्सेसुर, हावड़ा स्थित एचएमएम महिला महाविद्यालय की डॉ. प्रथा कुंडू तथा नेपाल के त्रिभुवन विश्वविद्यालय के डॉ. अभि सुबेदी ने ऑनलाइन व्याख्यान देते हुए साहित्य, इतिहास, राष्ट्रवाद और दक्षिण एशियाई सांस्कृतिक परंपराओं पर अपने विचार प्रस्तुत किए। इसके अलावा कलकत्ता विश्वविद्यालय के डॉ. शांतनु चक्रवर्ती, प्रोफेसर भक्तिपदा डोलुई और डॉ. देबाशीष मंडल सहित कई विद्वानों ने भी अपने शोधपरक व्याख्यान दिए।

तकनीकी सत्रों में देश और विदेश के शोधार्थियों एवं शिक्षाविदों द्वारा 80 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए। आयोजकों के अनुसार यह संगोष्ठी साहित्य और राष्ट्रीय चेतना के अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण अकादमिक मंच सिद्ध हुई।

समापन अवसर पर संगोष्ठी के संयोजक एवं इतिहास विभाग के संकाय सदस्य डॉ. इंद्रजीत यादव ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य ‘वंदे मातरम्’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर साहित्य, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्थक विमर्श को बढ़ावा देना था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस संगोष्ठी से अंतर्विषयक शोध को नई दिशा मिलेगी तथा भारत और विदेश के शैक्षणिक संस्थानों के बीच सहयोग और मजबूत होगा।

डॉ. यादव ने बर्धमान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर शंकर कुमार नाथ, पश्चिम बंगाल हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू, प्रधानाचार्या डॉ. अशरफी खातून, आईक्यूएसी समन्वयक डॉ. इंद्राणी पॉल, इतिहास विभाग के सभी शिक्षकों, कर्मचारियों, स्वयंसेवकों तथा सहभागी विद्वानों का सफल आयोजन के लिए आभार व्यक्त किया।

प्रदीप मिश्रा

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