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‘कटघोरा’ नहीं, ‘जवाली रेलवे स्टेशन’ नाम रखने की उठी मांग, ग्रामीणों ने स्थानीय पहचान बचाने की लगाई गुहार

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- दीपक पटेल

रेलवे स्टेशन के नामकरण पर ग्रामीणों ने जताई आपत्ति, कहा स्थानीय इतिहास, आदिवासी संस्कृति और भौगोलिक पहचान का हो सम्मान; ओवरब्रिज के नीचे जलभराव से भी हजारों लोग परेशान।

कोरबा ACGN :- दक्षिण पूर्व रेलवे द्वारा निर्माणाधीन दीपका–पेंड्रा रेल परियोजना के अंतर्गत विकासखंड कटघोरा के ग्राम मुढ़ाली, कोलिहामुड़ा और जवाली के मध्य बनाए जा रहे रेलवे स्टेशन के नामकरण को लेकर क्षेत्र के ग्रामीणों में गहरा असंतोष व्याप्त है। ग्रामीणों ने रेलवे स्टेशन का नाम “कटघोरा रेलवे स्टेशन” रखे जाने पर आपत्ति जताते हुए इसे बदलकर “जवाली रेलवे स्टेशन” किए जाने की मांग तेज कर दी है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस स्थान पर रेलवे स्टेशन का निर्माण किया गया है, वह जवाली क्षेत्र की भूमि पर स्थित है। स्टेशन निर्माण के लिए स्थानीय किसानों ने अपनी जमीन दी है और यह क्षेत्र आदिवासी संस्कृति, परंपरा एवं स्थानीय पहचान से जुड़ा हुआ है। इसके बावजूद स्टेशन का नाम 17 किलोमीटर दूर स्थित कटघोरा नगर के नाम पर रखा जाना स्थानीय लोगों की भावनाओं और क्षेत्रीय अस्मिता की उपेक्षा है।


ग्रामीणों के अनुसार रेलवे स्टेशन केवल एक यातायात केंद्र नहीं होता, बल्कि वह किसी क्षेत्र की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और भौगोलिक पहचान का भी प्रतीक होता है। ऐसे में स्थानीय पहचान को नजरअंदाज कर दूर स्थित नगर के नाम पर स्टेशन का नामकरण करना उचित नहीं है।
इस संबंध में अप्रैल माह में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों एवं प्रभावित ग्रामवासियों ने जिला कलेक्टर, रेलवे मंडल प्रबंधक तथा संबंधित विभागों को ज्ञापन सौंपकर स्टेशन का नाम “जवाली रेलवे स्टेशन” रखने की मांग की थी। लगभग दो माह बीत जाने के बाद भी इस संबंध में कोई निर्णय नहीं लिया गया है, जिससे ग्रामीणों में निराशा और आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते उनकी मांग पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो क्षेत्र की जनता लोकतांत्रिक तरीके से आगे भी अपनी आवाज बुलंद करेगी।


इधर रेलवे परियोजना से जुड़ी दूसरी बड़ी समस्या ओवरब्रिज के नीचे जलभराव की है। रेलवे स्टेशन से लगभग 100 मीटर पहले बनाए गए ओवरब्रिज के निर्माण के दौरान वर्षा जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं किए जाने के कारण प्रत्येक वर्ष बरसात में यह क्षेत्र दलदली और कीचड़युक्त हो जाता है।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2025 में 6 जुलाई को हुई बारिश के दौरान आसपास की मिट्टी और मलबा बहकर ओवरब्रिज के नीचे जमा हो गया था, जिससे घुटनों तक पानी और कीचड़ भर गया था। इस वर्ष भी पहली ही बारिश में वही स्थिति दोबारा निर्मित हो गई है। रेलवे प्रबंधन द्वारा कांक्रीटीकरण तो कराया गया, लेकिन सड़क की ऊंचाई और जल निकासी का वैज्ञानिक समाधान नहीं किया गया। किनारों पर मिट्टी डाल देने से पानी की निकासी पूरी तरह बाधित हो गई है।
इसका खामियाजा मुढ़ाली, कोलिहामुड़ा, फुलझर, देवगांव, बतारी, नेहरू नगर, डोंगरी, तिलवारी, जवाली सहित लगभग दस गांवों के हजारों लोगों को भुगतना पड़ रहा है। क्षेत्र के पावर प्लांट, कोल वाशरी एवं अन्य औद्योगिक इकाइयों में कार्यरत कर्मचारी, किसान, विद्यार्थी, महिलाएं, मजदूर, दुकानदार तथा आम नागरिक प्रतिदिन इसी मार्ग से आवागमन करते हैं।
साइकिल, मोटरसाइकिल, ट्रैक्टर, पिकअप, बोलेरो, स्कूल बस और अन्य छोटे-बड़े वाहनों को ओवरब्रिज के नीचे कीचड़ और जलभराव के बीच होकर गुजरना पड़ रहा है। विद्यालयों के शिक्षक एवं अन्य कर्मचारी भी प्रतिदिन इसी समस्या से जूझ रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बरसात के दिनों में यह मार्ग दुर्घटना का कारण बन सकता है।
ग्रामीणों ने रेलवे प्रबंधन और प्रशासन से मांग की है कि एक ओर स्टेशन का नाम स्थानीय जनभावनाओं के अनुरूप “जवाली रेलवे स्टेशन” रखा जाए, वहीं दूसरी ओर ओवरब्रिज के नीचे स्थायी जल निकासी की वैज्ञानिक व्यवस्था तत्काल कराई जाए। उनका कहना है कि यदि भविष्य में इस स्थान पर जलभराव के कारण कोई दुर्घटना या जनहानि होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित विभाग और रेलवे प्रबंधन की होगी।

प्रदीप मिश्रा
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