मजदूरों की सुनवाई या ठेकेदार का बचाव? सीएसईबी में गहराया विवाद, अधिकारियों और श्रमिकों के बीच हुई तीखी नोकझोंक
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
वेतन और अधिकारों की मांग को लेकर डटे श्रमिक… प्रबंधन की भूमिका पर उठे सवाल, आखिर किसके हित में चल रही ठेका व्यवस्था?
कोरबा ACGN:- छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत उत्पादन कंपनी लिमिटेड के 210 मेगावाट ताप विद्युत संयंत्र कोरबा पश्चिम में ठेका श्रमिकों का विरोध प्रदर्शन अब केवल वेतन की मांग तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रबंधन और ठेका व्यवस्था के बीच की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होने लगे हैं।

श्रमिकों का आरोप है कि ठेकेदार द्वारा समय पर वेतन भुगतान नहीं किया जाता, कम दर पर भुगतान किया जाता है और अपनी मांग रखने पर दबाव बनाया जाता है। जब श्रमिकों ने अपनी समस्या अधिकारियों के सामने रखी तो उनका कहना है कि समाधान के बजाय अधिकारियों द्वारा ठेकेदार का पक्ष लिया जाता हुआ नजर आया।

इसी बात को लेकर मौके पर मौजूद श्रमिकों और अधिकारियों के बीच काफी तीखी नोकझोंक भी देखने को मिली। मजदूरों का कहना था कि वे वर्षों से संयंत्र में काम कर रहे हैं, उन्होंने अपने अनुभव और मेहनत से व्यवस्था को संभाला है, लेकिन जब अपने हक की बात करते हैं तो उनकी समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

श्रमिकों ने सवाल उठाया कि यदि ठेकेदार सही तरीके से काम कर रहा है तो फिर वेतन, ईपीएफ, ईएसआईसी और कार्यस्थल को लेकर बार-बार शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं?
बताया गया कि श्रमिक जब प्रशासनिक भवन के समीप शांतिपूर्ण तरीके से बैठकर अपनी बात रख रहे थे, तब सुरक्षाकर्मियों द्वारा उन्हें वहां से हटाने का प्रयास किया गया। इसके बाद आक्रोशित श्रमिक मुख्य गेट पर जाकर बैठ गए।

कड़कती धूप में मजदूर घंटों तक प्रशासनिक भवन के सामने बैठे रहे। अधिकारी और महिला अधिकारी भी काफी देर तक बाहर खड़े रहे। जब अधिकारियों को अंदर जाने से रोका गया तो प्रबंधन ने ठेकेदार को मौके पर बुलाया।
मौके पर हुई बातचीत में श्रमिकों ने स्पष्ट कहा कि उन्हें उनके अनुभव वाले कार्य से हटाकर दूसरी जगह न भेजा जाए और उनका भुगतान समय पर किया जाए। मजदूरों का कहना है कि अनजान कार्य में भेजने से दुर्घटनाओं की संभावना बढ़ सकती है।
वहीं ठेकेदार की ओर से श्रमिकों को हटाने की बात से इनकार किया गया और कहा गया कि आवश्यकता के अनुसार कार्यस्थल बदले जाते हैं।
लेकिन पूरे घटनाक्रम ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि प्रबंधन वास्तव में श्रमिकों के हितों को लेकर गंभीर है तो मजदूरों की शिकायतों का समाधान पहले क्यों नहीं हुआ?
क्या ठेका व्यवस्था की निगरानी केवल कागजों तक सीमित है?
क्या मजदूरों की मेहनत का सही मूल्य उन्हें मिल रहा है?
और सबसे बड़ा सवाल… क्या प्रबंधन और ठेकेदार के बीच ऐसी कोई व्यवस्था है जिसकी वजह से श्रमिकों की आवाज दबती नजर आ रही है?
हालांकि आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है, लेकिन जिस तरह मजदूरों को आंदोलन करना पड़ा और अधिकारियों के सामने तीखी बहस की स्थिति बनी, वह किसी भी औद्योगिक संस्थान के लिए चिंता का विषय है।
पुलिस प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत कराया गया और अधिकारियों को अंदर भेजा गया।
अब निगाहें प्रबंधन की कार्रवाई पर हैं कि वह श्रमिकों की समस्याओं का स्थायी समाधान करता है या फिर मामला केवल आश्वासन तक सीमित रह जाता है।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़00
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space


