वेतन और सुविधाओं के लिए अस्पताल के पैरामेडिकल स्टाफ को आंदोलन की मजबूरी क्यों? ठेकेदार और प्रबंधन पर उठे सवाल
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- प्रदीप मिश्रा
एचटीपीएस कोरबा-पश्चिम अस्पताल में संविदा कर्मियों का कामबंद आंदोलन, स्वास्थ्य सेवा देने वालों को अपने हक के लिए सड़क पर उतरना पड़ा

कोरबा ACGN:- एचटीपीएस कोरबा-पश्चिम के आवासीय परिसर स्थित अस्पताल में मरीजों की सेवा और स्वास्थ्य व्यवस्था संभालने वाले संविदा पैरामेडिकल स्टाफ को आखिर अपने ही अधिकारों के लिए आंदोलन का रास्ता क्यों अपनाना पड़ा, यह सवाल अब विभाग और प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर खड़ा हो रहा है।

भारतीय संविदा मजदूर महासंघ (भारतीय मजदूर संघ से संबद्ध) के नेतृत्व में आज अस्पताल में कार्यरत संविदा पैरामेडिकल स्टाफ ने कामबंद आंदोलन करते हुए अस्पताल के मुख्य द्वार के सामने धरना प्रदर्शन किया। कर्मचारियों की मुख्य मांग शासन द्वारा निर्धारित वेतन, ESIC और EPF सुविधा उपलब्ध कराने की है।

बताया गया कि भारतीय मजदूर संघ द्वारा 2 जून 2026 को मुख्य अभियंता (उत्पादन), हसदेव ताप विद्युत गृह कोरबा-पश्चिम को पत्र सौंपकर ठेका कर्मियों की समस्याओं से अवगत कराया गया था।

संघ ने प्रबंधन को 11 जून तक समस्याओं के निराकरण का समय दिया था, लेकिन समाधान नहीं होने के बाद 15 जून से कामबंद आंदोलन शुरू किया गया।
भारतीय मजदूर संघ के पदाधिकारी राधेश्याम जायसवाल ने कहा कि संविदा कर्मचारी लंबे समय से अस्पताल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। जब मरीजों को इलाज और देखभाल की जरूरत होती है, तब यही कर्मचारी अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, लेकिन जब इनके अधिकारों की बात आती है तो इन्हें बार-बार प्रबंधन के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ठेकेदार और अस्पताल प्रबंधन को कई बार कर्मचारियों की समस्याओं से अवगत कराया गया, लेकिन गंभीरता से पहल नहीं की गई। शासन के नियमों के अनुसार मिलने वाली सुविधाओं से कर्मचारियों को वंचित रखना श्रमिकों के साथ अन्याय है।

वहीं संविदा पैरामेडिकल स्टाफ ने कहा कि वे अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। दिन-रात मरीजों की सेवा करने के बावजूद उन्हें निर्धारित वेतन और सामाजिक सुरक्षा सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मांग कोई अतिरिक्त सुविधा नहीं बल्कि शासन द्वारा तय अधिकारों की मांग है।

अब सवाल यह है कि क्या अस्पताल में मरीजों की सेवा करने वाले पैरामेडिकल स्टाफ को अपने ही वेतन और सुविधाओं के लिए आंदोलन करना पड़ेगा?
क्या ठेका व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के अधिकारों की निगरानी करना प्रबंधन की जिम्मेदारी नहीं है?
यदि शासन ने वेतन, ESIC और EPF के स्पष्ट नियम बनाए हैं तो उनका पालन कराने में देरी क्यों हो रही है?
क्या जिम्मेदार अधिकारी ठेकेदार और प्रबंधन की जवाबदेही तय करेंगे, ताकि कर्मचारियों को बार-बार आंदोलन की स्थिति में न आना पड़े?
फिलहाल संविदा पैरामेडिकल स्टाफ का आंदोलन जारी है और सभी की नजरें अब प्रबंधन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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