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वन विभाग का ‘कमीशन राज’! मजदूरों के 8 लाख रुपये भुगतान पर ब्रेक, लैलूंगा और बाकारुमा रेंज पर गंभीर आरोप

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी

मुनारा निर्माण का काम पूरा, भुगतान अधूरा; मजदूर बोले- बिना कमीशन फाइल नहीं बढ़ रही, आंदोलन और न्यायालय जाने की चेतावनी

रायगढ़ ACGN:- वन मंडल धर्मजयगढ़ के अंतर्गत आने वाले लैलूंगा और बाकारुमा रेंज में मजदूरों के भुगतान को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। मुनारा निर्माण कार्य पूरा होने के बावजूद लाखों रुपये का भुगतान लंबित होने से मजदूर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। पीड़ित मजदूरों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा भुगतान के लिए लगातार टालमटोल की जा रही है तथा बिना कथित कमीशन दिए फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।


जानकारी के अनुसार लैलूंगा रेंज में मजदूरों द्वारा 136 नग मुनारों का निर्माण कार्य किया गया था। इस कार्य के एवज में विभाग द्वारा केवल 1 लाख 85 हजार रुपये का आंशिक भुगतान किया गया है, जबकि लगभग 6 लाख 31 हजार रुपये की राशि अब भी बकाया बताई जा रही है। इसी प्रकार बाकारुमा रेंज के काजू बाड़ी एवं अन्य क्षेत्रों में 28 नग मुनारों का निर्माण कराया गया, लेकिन इस कार्य का लगभग 1 लाख 68 हजार रुपये का भुगतान अभी तक नहीं किया गया है।


दोनों रेंजों को मिलाकर मजदूरों का करीब 7 लाख 99 हजार रुपये का भुगतान लंबित बताया जा रहा है। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने निर्माण कार्य पूरा करने के लिए बाजार से उधार लेकर सामग्री खरीदी थी और समय पर काम पूरा किया, लेकिन अब उन्हें अपनी ही मेहनत की कमाई के लिए विभागीय कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
पीड़ित मजदूरों ने आरोप लगाया है कि भुगतान के संबंध में अधिकारियों और कर्मचारियों से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन हर बार उन्हें आश्वासन देकर वापस भेज दिया जाता है। मजदूरों का कहना है कि भुगतान के लिए कथित तौर पर कमीशन की मांग की जा रही है और बिना सुविधा शुल्क दिए फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया जा रहा है।
मामले से परेशान होकर बजरंग कुमार और भरत राम सहित अन्य मजदूरों ने वनमंडलाधिकारी (डीएफओ) के समक्ष लिखित शिकायत प्रस्तुत की है। शिकायत पर विभागीय कार्यालय की प्राप्ति मुहर लगने के बाद मामला उच्चाधिकारियों के संज्ञान में पहुंच चुका है। इसके बावजूद अब तक भुगतान नहीं होने से मजदूरों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।
मजदूरों का कहना है कि वे कर्ज और उधारी के बोझ तले दब चुके हैं। यदि शीघ्र भुगतान नहीं किया गया तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर होंगे। साथ ही उन्होंने यह भी कहा है कि आवश्यकता पड़ने पर न्यायालय की शरण लेकर अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई भी लड़ी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि मामले में वन विभाग का पक्ष जानने के लिए संबंधित अधिकारियों से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन संपर्क नहीं हो सका। ऐसे में मजदूरों द्वारा लगाए गए आरोपों पर विभागीय प्रतिक्रिया सामने नहीं आ पाई है। अब देखना यह होगा कि उच्चाधिकारी इस शिकायत पर क्या कार्रवाई करते हैं और मजदूरों को उनकी लंबित राशि कब तक मिल पाती है।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर। जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।

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