भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जुड़े विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय बनें : राज्यपाल
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भुवनेश्वर, ओड़िशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- स्वामी बिजया नंद जी महाराज ओड़िशा ब्यूरो
उच्च शिक्षण संस्थानों को आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का मजबूत आधार बताते हुए राज्यपाल ने विश्वविद्यालयों से नवाचार, शोध और कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने का किया आह्वान
भुवनेश्वर ACGN:- ओड़िशा के राज्यपाल डॉ. हरीबाबू कम्भमपती ने राज्य के विश्वविद्यालयों से आह्वान किया है कि वे भारतीय संस्कृति, परंपराओं और मूल्यों को आत्मसात करते हुए स्वयं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी, तकनीकी रूप से सशक्त तथा सामाजिक रूप से उत्तरदायी संस्थानों के रूप में विकसित करें। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत के निर्माण और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए युवाओं को तैयार करने में उच्च शिक्षण संस्थानों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है।

रविवार को लोक भवन के न्यू अभिषेक हॉल में आयोजित राज्य स्तरीय कुलपति सम्मेलन को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि यह सम्मेलन ओड़िशा की उच्च शिक्षा व्यवस्था को नई दिशा देने और उसे राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री प्रदान करने वाले संस्थान नहीं हैं, बल्कि वे ज्ञान, अनुसंधान, नवाचार और नेतृत्व निर्माण के केंद्र हैं, जहां से राष्ट्र के भविष्य का निर्माण होता है।

राज्यपाल ने कहा कि वर्तमान समय तेजी से बदलती तकनीक, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल क्रांति और वैश्विक प्रतिस्पर्धा का दौर है। ऐसे समय में विश्वविद्यालयों को विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि व्यवहारिक कौशल, नैतिक मूल्य और नवाचार की सोच भी प्रदान करनी होगी। उन्होंने कहा कि युवाओं में उद्यमिता और अनुसंधान की भावना विकसित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।

डॉ. कम्भमपती ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा केवल आर्थिक आत्मनिर्भरता तक सीमित नहीं है, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, तकनीक, ऊर्जा, कृषि और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में भी आत्मनिर्भरता प्राप्त करना इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य है। इस दिशा में विश्वविद्यालयों को अग्रणी भूमिका निभानी होगी।

उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की चर्चा करते हुए कहा कि यह नीति भारतीय शिक्षा व्यवस्था में व्यापक बदलाव लाने की क्षमता रखती है। बहुविषयक शिक्षा, कौशल विकास, डिजिटल शिक्षण, शोध उत्कृष्टता और उद्योगों के साथ बेहतर समन्वय जैसे प्रावधान विद्यार्थियों को वैश्विक अवसरों के लिए तैयार करेंगे। राज्यपाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और ओड़िशा सरकार द्वारा नीति के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए किए जा रहे प्रयासों की सराहना की।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा कि विश्वविद्यालय किसी भी राज्य के बौद्धिक और सामाजिक विकास के प्रमुख केंद्र होते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार बजट बढ़ा रही है और उच्च शिक्षा संस्थानों में अधोसंरचना, शोध तथा नवाचार को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2036 तक विकसित ओड़िशा और विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने में विश्वविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों की भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने सभी विश्वविद्यालयों से समावेशी विकास का रोडमैप तैयार करने तथा शिक्षा को समाज और उद्योगों की आवश्यकताओं से जोड़ने का आह्वान किया।
सम्मेलन में उपमुख्यमंत्री के. वी. सिंहदेव, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. मुकेश महालिंग, स्कूल एवं जनशिक्षा मंत्री नित्यानंद गंड, उद्योग मंत्री संपद चंद्र स्वाइन, उच्च शिक्षा मंत्री सूर्यवंशी सूरज सहित विभिन्न विश्वविद्यालयों के कुलपति और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदीप मिश्रा
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