हत्या के मामलों में सख्त हुए न्यायालय, 17 प्रकरणों में 29 दोषियों को मिली कठोर सजा
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता:- सौरभ साहू
भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद पांच माह में हत्या के मामलों में त्वरित न्याय, आजीवन कारावास से लेकर कठोर कारावास तक की सजा
सूरजपुर ACGN:- सूरजपुर जिले के न्यायालयों ने हत्या के मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए पिछले पांच माह के दौरान 17 अलग-अलग प्रकरणों में 29 अभियुक्तों को दोषी ठहराकर कठोर कारावास की सजा सुनाई है। भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद दिसंबर 2025 से अप्रैल 2026 के बीच दिए गए इन फैसलों को त्वरित और प्रभावी न्याय व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
न्यायालय द्वारा सुनाए गए हालिया फैसलों में ग्राम पसला स्थित डेयरी फार्म में महिला की हत्या के मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है। वहीं कॉलेज रोड नवापारा सूरजपुर स्थित एक मकान में महिला की हत्या के मामले में आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया गया है।

चौकी लटोरी अंतर्गत ग्राम द्वारिकापुर गाड़ा झरिया में पत्नी द्वारा अपने पति की धारदार हथियार से हत्या किए जाने के मामले में न्यायालय ने आरोपी महिला को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है।
थाना चांदनी क्षेत्र के ग्राम विशालपुर में जमीन विवाद के चलते एक व्यक्ति की हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी ठहराते हुए न्यायालय ने सभी को आजीवन कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। इसी प्रकार ग्राम अवंतिकापुर में चाचा द्वारा अपने भतीजे की हत्या किए जाने के मामले में आरोपी को सात वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई गई है।
थाना सूरजपुर क्षेत्र के ग्राम पर्री गौटियापारा में एक युवक को उसके पिता और भाई द्वारा पेड़ से बांधकर मारपीट कर हत्या किए जाने के मामले में न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी मानते हुए 10-10 वर्ष के कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है।
न्यायिक अधिकारियों के अनुसार भारतीय न्याय संहिता लागू होने के बाद आपराधिक मामलों की विवेचना और अभियोजन प्रक्रिया में आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। कई मामलों में चश्मदीद गवाहों के अपने बयान से मुकर जाने के बावजूद वैज्ञानिक, तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर अपराध सिद्ध किए जा रहे हैं।
जांच के दौरान संकलित गवाहों के कथन, फोरेंसिक रिपोर्ट, मेडिकल एवं पोस्टमार्टम रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य तथा अन्य परिस्थितिजन्य प्रमाणों को न्यायालय द्वारा महत्वपूर्ण आधार माना जा रहा है। यही कारण है कि गवाहों के पलटने के बाद भी अपराधियों को सजा दिलाने में सफलता मिल रही है।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि आधुनिक न्यायिक प्रणाली में डिजिटल और फोरेंसिक साक्ष्यों की बढ़ती भूमिका से अपराधियों के बच निकलने की संभावना कम हुई है। सूरजपुर जिले में हत्या के मामलों में लगातार आ रहे सख्त फैसले कानून के प्रति लोगों का विश्वास मजबूत करने के साथ-साथ अपराधियों के लिए भी कड़ा संदेश माने जा रहे हैं।
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर। जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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