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मां – जीवन का पहला स्पर्श, पहला एहसास और अंतिम सहारा

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

मातृत्व दिवस पर विशेष लेख

आलेख – प्रदीप मिश्रा
मां  एक शब्द नहीं, पूरा जीवन
मां को किसी परिभाषा में बांधना संभव नहीं। वह न शब्दों में समाती है, न किसी किताब में पूरी लिखी जा सकती है। मां वह पहली सांस है जो जीवन को अर्थ देती है, और वह आखिरी सहारा है जो हर टूटे हुए इंसान को फिर से जोड़ देती है।
धरती पर अगर किसी रिश्ते में बिना शर्त प्यार मिलता है, तो वह सिर्फ मां का है। वह खुद दर्द सहती है, लेकिन बच्चे के चेहरे पर मुस्कान बनाए रखने के लिए हर पीड़ा को चुपचाप सह लेती है। दुनिया बदलती रही, तकनीक बदलती रही, रिश्ते बदलते रहे, लेकिन मां का प्रेम आज भी उतना ही सरल, सच्चा और अटूट है।
एक मां जब बच्चे को जन्म देती है, तब वह केवल जीवन नहीं देती, बल्कि अपनी पूरी दुनिया बदल देती है। उसकी रातें जागकर गुजरती हैं, उसके सपने बच्चों की नींद में खो जाते हैं, और उसकी पहचान धीरे-धीरे “स्त्री” से “मां” बन जाती है। वह खुद भूखी रह सकती है, लेकिन अपने बच्चे के लिए एक निवाला भी कम नहीं पड़ने देती।
बचपन में हर चोट पर सबसे पहले मां का नाम निकलता है। स्कूल का पहला कदम, जीवन की पहली असफलता, या खुशी का पहला पल  हर जगह मां की मौजूदगी महसूस होती है। मां वह है जो बिना बोले भी सब समझ जाती है, और बिना दिखाए भी हर दर्द महसूस कर लेती है।
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में बच्चे सपनों की दौड़ में दूर निकल जाते हैं। बड़े शहरों की रोशनी में मां का छोटा सा घर अक्सर अकेला रह जाता है। फोन की घंटी बजते ही मां की आंखों में उम्मीद जागती है, शायद उसका बच्चा हाल पूछने आया होगा। मां के लिए दूरी सिर्फ एक शब्द है, रिश्ता कभी दूर नहीं होता।
यह भी एक सच्चाई है कि कई मांएं आज अकेलेपन की जिंदगी जी रही हैं। जिन बच्चों के लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन खपा दिया, वही बच्चे कभी-कभी समय की कमी का बहाना बनाकर दूर हो जाते हैं। लेकिन मां कभी शिकायत नहीं करती, वह बस इंतजार करती है।
मां की ममता कभी बूढ़ी नहीं होती। उम्र चाहे कितनी भी हो जाए, मां के लिए उसका बच्चा हमेशा बच्चा ही रहता है। वह उसके छोटे से दर्द पर भी बेचैन हो जाती है और उसकी बड़ी सफलता पर सबसे ज्यादा खुश होती है।
मां केवल जन्म देने वाली नहीं, बल्कि जीवन सिखाने वाली गुरु भी है। वह हमें चलना सिखाती है, गिरकर उठना सिखाती है, और हर हाल में इंसान बने रहना सिखाती है। उसकी शिक्षा किसी किताब में नहीं, बल्कि उसके व्यवहार में होती है।
मातृत्व केवल एक भूमिका नहीं, बल्कि त्याग, प्रेम और संघर्ष का सबसे बड़ा रूप है। मां अपने जीवन में हर रिश्ता निभाती है  बेटी, पत्नी, बहू, लेकिन सबसे पहले और सबसे ऊपर वह “मां” ही रहती है।
आज मातृत्व दिवस पर सबसे बड़ा संदेश यही है कि मां को केवल एक दिन याद करने की जरूरत नहीं, बल्कि हर दिन उसके सम्मान, उसके प्रेम और उसके त्याग को समझने की जरूरत है। अगर मां साथ है, तो जीवन सबसे सुरक्षित है, और अगर मां साथ नहीं है, तो पूरी दुनिया अधूरी लगती है।
मां – वह नहीं जो सिर्फ जन्म देती है, मां वह है जो जीवन भर हमें इंसान बनाए रखती है।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबरों एवं जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल
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