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15 दिन में बह गया पुल, अब उठे सवाल! ग्रामीणों का कलेक्ट्रेट में हल्लाबोल

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              गोबरी नदी का रपटा पुल 15 दिन में बहा
सूरजपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू

गोबरी नदी के रपटा पुल के बहने पर ग्रामीणों ने सौंपा ज्ञापन, कलेक्टर ने 15 दिन में काम शुरू कराने का दिया आश्वासन; ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो NH-43 चक्काजाम की चेतावनी

सूरजपुर ACGN:- जनपद पंचायत भैयाथान अंतर्गत ग्राम पंचायत डबरीपारा (खुटरापारा) में गोबरी नदी पर हाल ही में निर्मित रपटा पुल के महज 15 दिनों के भीतर तेज पानी के बहाव में बह जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। पुल के इतनी कम अवधि में धराशायी होने को लेकर ग्रामीण निर्माण की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों पर सवाल उठा रहे हैं। इसी मामले को लेकर बुधवार 23 सितंबर 2026 को बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि और ग्रामीण सूरजपुर कलेक्ट्रेट पहुंचे और कलेक्टर रेना जमील को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।


ग्रामीणों ने प्रशासन के सामने अपनी मांगें रखते हुए कहा कि पुल के बह जाने से क्षेत्र के हजारों लोगों का आवागमन प्रभावित हुआ है। ग्रामीणों के अनुसार स्कूली बच्चों, किसानों, मजदूरों, मरीजों और आपातकालीन 108 एंबुलेंस जैसे वाहनों के आवागमन में भी परेशानी सामने आ रही है। प्रतिनिधिमंडल से चर्चा के दौरान कलेक्टर ने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि 15 दिनों के भीतर धरातल पर काम शुरू कराया जाएगा।
मामले में ग्रामीणों ने पूर्व में बने रपटा पुल की गुणवत्ता की जांच की मांग भी उठाई है। विभागीय स्तर पर संबंधित ठेकेदार के बिल का भुगतान अब तक नहीं किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। बताया गया कि निर्माण की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने के बाद भुगतान रोका गया है। हालांकि निर्माण की वास्तविक गुणवत्ता, तकनीकी खामियों और जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।
ग्रामीणों ने बताया कि 30 जून 2025 को गोबरी नदी पर बना मुख्य पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था। इसके बाद पुल निर्माण की मांग को लेकर जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों की ओर से शासन-प्रशासन से लगातार आवेदन और निवेदन किए गए। ग्रामीणों के अनुसार लंबे समय तक ठोस समाधान नहीं होने पर उन्होंने जनसहयोग से रपटा पुल निर्माण का प्रयास शुरू किया था। इसके बाद शासन-प्रशासन की ओर से हस्तक्षेप करते हुए रपटा पुल निर्माण के लिए 15 लाख रुपये की शासकीय स्वीकृति प्रदान की गई।
अब वही रपटा पुल निर्माण के कुछ ही दिनों बाद तेज पानी के बहाव में बह जाने से सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निर्माण कार्य तकनीकी मापदंडों के अनुरूप किया गया था तो इतनी कम अवधि में पुल के बहने की वजह क्या रही, इसकी निष्पक्ष तकनीकी जांच होनी चाहिए।
ज्ञापन में ग्रामीणों ने यह भी बताया कि उन्होंने संभावित खतरे को लेकर 7 जुलाई 2026 को अनुविभागीय अधिकारी राजस्व, भैयाथान को पत्र सौंपकर स्थिति से अवगत कराया था। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इस दिशा में प्रभावी कार्रवाई होती तो वर्तमान स्थिति से बचा जा सकता था। इस दावे की भी प्रशासनिक स्तर पर जांच की जा सकती है कि पत्र कब और किन परिस्थितियों में प्राप्त हुआ तथा उस पर क्या कार्रवाई की गई।
ग्रामीणों ने प्रशासन के समक्ष तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली मांग है कि गोबरी नदी पर ध्वस्त रपटा पुल की तत्काल मरम्मत कर सुरक्षित आवागमन बहाल किया जाए। दूसरी मांग है कि बरसात के दिनों में बार-बार होने वाली समस्या का स्थायी समाधान करते हुए उच्च गुणवत्ता वाले पक्के पुल का निर्माण स्वीकृत कर कार्य शुरू कराया जाए। तीसरी और महत्वपूर्ण मांग है कि 15 दिनों में बह गए रपटा पुल के निर्माण में उपयोग की गई सामग्री, तकनीकी मापदंडों और निर्माण गुणवत्ता की विशेषज्ञों से निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा जांच में जिम्मेदारी तय होने पर संबंधित ठेकेदार, निर्माण एजेंसी या अन्य जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
ग्रामीणों ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में ठोस कार्रवाई शुरू नहीं होती है तो वे जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों, युवाओं और ग्रामीणों के साथ लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। ग्रामीणों के अनुसार डुमरिया स्थित विश्वकर्मा ढाबा के पास NH-43 पर धरना और चक्काजाम किया जाएगा। ग्रामीणों ने कहा कि उनकी प्राथमिकता आवागमन की समस्या का समाधान और पुल निर्माण में जवाबदेही तय कराना है।
जनपद सभापति राजू कुमार गुप्ता ने भी ग्रामीणों के साथ आंदोलन में शामिल होने की बात कही है। प्रशासन द्वारा दिए गए 15 दिन के आश्वासन के बाद अब ग्रामीणों की नजर इस बात पर है कि निर्धारित समय में धरातल पर काम शुरू होता है या नहीं।
ज्ञापन सौंपने के दौरान ग्राम पंचायत डबरीपारा, ग्राम पंचायत बांसापारा और ग्राम पंचायत गंगौटी के सरपंच एवं उपसरपंच सहित नीरज साहू, प्रवीण कुमार साहू, दीप नारायण साहू, जगतपाल सिंह, चंद्रदेव साहू, अवधेश कांशी, लाकेश्वर सिंह मरावी, राजेंद्र यादव, हरिओम नारायण पाण्डेय, राकेश साहू, रामदत्त पाण्डेय, लवकेश यादव, मनोज यादव, दीपक साहू, छैला बाबू, कृष्णा यादव, ललन साहू, चीनू गुप्ता सहित क्षेत्र के अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि महज 15 दिनों में रपटा पुल आखिर क्यों बह गया? इसका जवाब केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि तकनीकी जांच और जिम्मेदारी तय होने के बाद ही स्पष्ट होगा। वहीं कलेक्टर के 15 दिनों में काम शुरू कराने के आश्वासन के बाद ग्रामीणों का अगला रुख प्रशासन की कार्रवाई पर निर्भर करेगा।


प्रदीप मिश्रा
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