वेदांता हादसा : तकनीकी लापरवाही से बायलर फटा और बुझ गई 20 जिंदगियां : निदेशक अनिल अग्रवाल समेत कई पर FIR
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सक्ती छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
वेदांता पावर प्लांट ब्लास्ट : 20 श्रमिकों की मौत के बाद बड़ा एक्शन, निदेशक अनिल अग्रवाल समेत जिम्मेदार अधिकारियों पर FIR, लापरवाही से हुई त्रासदी
सक्ती। जिले के थाना डभरा अंतर्गत ग्राम सिंघीतराई स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में 14 अप्रैल को दोपहर लगभग ढाई बजे हुए भीषण बायलर विस्फोट ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया। इस दर्दनाक हादसे में 20 श्रमिकों की मौत हो गई, जबकि 15 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं और उनका उपचार विभिन्न अस्पतालों में जारी है। घटना के बाद पुलिस ने कंपनी प्रबंधन की लापरवाही को गंभीरता से लेते हुए कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल सहित अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
विस्फोट से कांप उठा पूरा प्लांट
घटना 14 अप्रैल को दोपहर करीब 2:30 बजे की है, जब बायलर नंबर-01 में अचानक भीषण धमाका हुआ। धमाका इतना तेज था कि पूरा प्लांट हिल गया और आसपास के क्षेत्र में दहशत फैल गई। विस्फोट के समय ड्यूटी पर मौजूद कई श्रमिक इसकी चपेट में आ गए और गंभीर रूप से झुलस गए।
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी राजेश पटेल पुलिस टीम के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे और राहत व बचाव कार्य शुरू कराया। घायलों को तत्काल रायगढ़ जिले के मेडिकल कॉलेज अस्पताल, अपेक्स अस्पताल और मेट्रो अस्पताल सहित अन्य उपचार केंद्रों में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान 20 श्रमिकों की मौत हो गई।
तकनीकी रिपोर्ट में खुली लापरवाही की परत
प्रारंभिक जांच में बायलर मुख्य निरीक्षक की तकनीकी रिपोर्ट में सामने आया कि बायलर फर्नेस के भीतर अत्यधिक मात्रा में ईंधन जमा हो जाने से असामान्य दबाव उत्पन्न हो गया था। इस दबाव को बायलर झेल नहीं पाया और उसका निचला पाइप अपनी स्थिति से हट गया, जिसके बाद भीषण विस्फोट हो गया।
फोरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) सक्ती की रिपोर्ट ने भी पुष्टि की है कि ईंधन के अत्यधिक संचय और दबाव नियंत्रण में विफलता ही इस भयावह विस्फोट का मुख्य कारण बनी।
सुरक्षा मानकों की अनदेखी बनी मौत का कारण
जांच में यह भी सामने आया है कि वेदांता कंपनी और एनजीएसएल द्वारा मशीनरी के रख-रखाव और संचालन संबंधी सुरक्षा मानकों का समुचित पालन नहीं किया गया। उपकरणों की निगरानी में गंभीर लापरवाही और संचालन में बरती गई उपेक्षा के कारण बायलर के दबाव में अचानक उतार-चढ़ाव हुआ और यह हादसा घटित हो गया।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया जाता और समय रहते दबाव को नियंत्रित किया जाता, तो इस बड़ी जनहानि को टाला जा सकता था।
निदेशक समेत कई अधिकारियों पर मामला दर्ज
उपलब्ध साक्ष्यों और तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर के निर्देश पर थाना डभरा में अपराध क्रमांक 119/2026 दर्ज किया गया है। प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106(1), 289 और 3(5) के तहत कंपनी के निदेशक अनिल अग्रवाल, प्रबंधक देवेंद्र पटेल और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर विवेचना प्रारंभ कर दी गई है।
विशेष जांच टीम गठित
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल कुमार ठाकुर ने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पंकज पटेल के नेतृत्व में विशेष जांच दल गठित किया है। टीम में एसडीओपी सुमित गुप्ता, फोरेंसिक अधिकारी सृष्टि सिंह और थाना प्रभारी राजेश पटेल शामिल हैं। यह टीम तकनीकी विशेषज्ञों के साथ मिलकर घटना के सभी पहलुओं की विस्तृत जांच कर रही है।
अस्पतालों में जारी जंग, परिजनों में आक्रोश
हादसे में घायल श्रमिकों का उपचार रायगढ़ के विभिन्न अस्पतालों में जारी है। दूसरी ओर मृतकों के परिजनों और श्रमिक संगठनों में गहरा आक्रोश देखा जा रहा है। प्रशासन द्वारा प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर ने स्पष्ट कहा है कि सुरक्षा मानकों में लापरवाही के पुख्ता साक्ष्य मिले हैं और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा
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प्रदीप मिश्रा
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