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650 से अधिक प्रतिमाएं, डिजिटल तकनीक और बलिदान की अनसुनी गाथाएं – आखिर इस संग्रहालय में ऐसा क्या है, जो लोगों को खींच ला रहा है?

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009


अंग्रेजों से लोहा लेने वाले जनजातीय वीरों का इतिहास अब डिजिटल तकनीक से होगा जीवंत, नवा रायपुर में बना देश का अनूठा शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय।


रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ की धरती ने देश की आजादी के लिए ऐसे अनेक वीर सपूतों को जन्म दिया, जिन्होंने अंग्रेजी हुकूमत के सामने कभी घुटने नहीं टेके। जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए अपने प्राणों तक की आहुति देने वाले इन जनजातीय वीरों की शौर्यगाथाएं लंबे समय तक इतिहास के पन्नों में अपेक्षित पहचान के लिए संघर्ष करती रहीं। लेकिन अब इन गुमनाम और अमर बलिदानियों की वीरता को नई पहचान मिल रही है। नवा रायपुर अटल नगर में निर्मित शहीद वीर नारायण सिंह स्मारक सह जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय आज जनजातीय स्वाभिमान, ऐतिहासिक विरासत और आधुनिक डिजिटल तकनीक के अनूठे संगम के रूप में अपनी अलग पहचान बना रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व और जनजातीय कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में निर्मित यह भव्य संग्रहालय छत्तीसगढ़ के गौरवशाली इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की महत्वपूर्ण पहल है। छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना की रजत जयंती के अवसर पर 1 नवंबर 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने इस संग्रहालय को राष्ट्र को समर्पित किया था। लगभग 50 से 55 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस संग्रहालय में जनजातीय स्वतंत्रता संग्राम की ऐतिहासिक घटनाओं को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
संग्रहालय में प्रवेश करते ही दर्शकों को उन संघर्षों और बलिदानों की दुनिया देखने को मिलती है, जिनकी कहानियां आज भी छत्तीसगढ़ की मिट्टी में जीवित हैं। यहां 650 से अधिक जीवंत मूर्तिशिल्पों के माध्यम से जनजातीय वीरों के संघर्ष और अंग्रेजी शासन के विरुद्ध हुए विद्रोहों का चित्रण किया गया है। हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह और सोनाखान विद्रोह जैसी ऐतिहासिक घटनाओं को यहां विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया है। इसके अलावा झंडा सत्याग्रह और जंगल सत्याग्रह से जुड़ी दीर्घाएं भी स्वतंत्रता आंदोलन में छत्तीसगढ़ के योगदान को सामने लाती हैं।
सोनाखान के अमर शहीद वीर नारायण सिंह का संघर्ष इस संग्रहालय की ऐतिहासिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। अंग्रेजी शासन के अन्याय और शोषण के विरुद्ध उनका विद्रोह केवल सत्ता के खिलाफ लड़ाई नहीं था, बल्कि गरीबों, वंचितों और आम लोगों के अधिकारों की रक्षा का भी प्रतीक था। उनके साथ उन तमाम जनजातीय योद्धाओं की गाथाओं को भी यहां स्थान दिया गया है, जिन्होंने मातृभूमि की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।
इस संग्रहालय की खास बात यह है कि यहां इतिहास केवल तस्वीरों और लिखित जानकारियों तक सीमित नहीं है। अत्याधुनिक वीएफएक्स तकनीक, डिजिटल प्रोजेक्शन, दृश्य-श्रव्य प्रस्तुतियों और जीवंत मूर्तिशिल्पों के माध्यम से ऐतिहासिक घटनाओं को इस तरह प्रदर्शित किया गया है कि दर्शक स्वयं को उस दौर का हिस्सा महसूस करते हैं। युद्धभूमि का वातावरण, वीर सेनानियों का संघर्ष और जनजातीय समाज की जीवनशैली आधुनिक तकनीक के जरिए जीवंत दिखाई देती है।
हर दीर्घा में डिजिटल बोर्ड और क्यूआर कोड की व्यवस्था की गई है। मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन कर दर्शक संबंधित ऐतिहासिक घटनाओं और स्वतंत्रता सेनानियों के बारे में विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। प्रशिक्षित गाइड भी आगंतुकों को संग्रहालय के विभिन्न ऐतिहासिक प्रसंगों से परिचित कराते हैं। इस तरह यह स्थान विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और इतिहास में रुचि रखने वाले लोगों के लिए ज्ञान और अध्ययन का महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है।
आगंतुकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए परिसर में स्वच्छ पेयजल, पार्किंग, सीसीटीवी सुरक्षा, प्राथमिक उपचार, दिव्यांगजनों के लिए व्हीलचेयर और शिशुवती माताओं के लिए शिशु देखभाल कक्ष जैसी व्यवस्थाएं भी की गई हैं। इससे बच्चों, बुजुर्गों और परिवारों के लिए संग्रहालय का भ्रमण सुविधाजनक बनता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार संग्रहालय में सामान्य दिनों में एक से दो हजार और अवकाश के दिनों में चार से पांच हजार तक दर्शक पहुंच रहे हैं। शुभारंभ से अब तक तीन लाख से अधिक लोग इसका अवलोकन कर चुके हैं। सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, अंतरराष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त मुक्केबाज मैरीकॉम सहित विभिन्न राज्यों के प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों, सैन्य जवानों तथा विदेशी पर्यटकों ने भी यहां प्रदर्शित जनजातीय इतिहास और शौर्यगाथाओं का अवलोकन किया है।
यह संग्रहालय केवल बीते समय की यादों को संजोने वाला स्थान नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को यह समझाने का माध्यम भी है कि देश की आजादी में दूर-दराज के वनांचलों और जनजातीय समाज का योगदान कितना महत्वपूर्ण रहा है। आजादी की लड़ाई केवल बड़े शहरों या चर्चित आंदोलनों तक सीमित नहीं थी, बल्कि जंगलों और पहाड़ों के बीच रहने वाले जनजातीय वीरों ने भी अंग्रेजी हुकूमत को चुनौती देने में अहम भूमिका निभाई थी।
इसके साथ ही संग्रहालय छत्तीसगढ़ में पर्यटन की संभावनाओं को भी बढ़ावा दे रहा है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के कारण स्थानीय रोजगार, पर्यटन सेवाओं और आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलने की संभावनाएं बढ़ रही हैं। नवा रायपुर अब आधुनिक प्रशासनिक राजधानी के साथ जनजातीय इतिहास और सांस्कृतिक पर्यटन के केंद्र के रूप में भी अपनी पहचान बना रहा है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में साकार यह संग्रहालय जनजातीय समाज की ऐतिहासिक विरासत, सांस्कृतिक पहचान और पुरखों के बलिदान को सम्मान देने की पहल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। जनजातीय कल्याण मंत्री श्री रामविचार नेताम के मार्गदर्शन में तैयार यह स्मारक इतिहास और आधुनिक तकनीक के बीच एक मजबूत सेतु बनकर उभरा है।
नवा रायपुर में खड़ा यह डिजिटल स्मारक आने वाली पीढ़ियों को उन वीरों की याद दिलाता रहेगा, जिन्होंने अपनी संस्कृति, अस्मिता, स्वाभिमान और मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया। यहां की प्रत्येक दीर्घा और प्रत्येक मूर्तिशिल्प इतिहास के उन पन्नों को सामने लाने का प्रयास करता है, जिन्हें लंबे समय तक पर्याप्त स्थान नहीं मिल पाया था।
यह केवल एक संग्रहालय नहीं, बल्कि उन जनजातीय पुरखों के बलिदान की कहानी है, जिनके संघर्ष के बिना देश की आजादी का इतिहास अधूरा है। आधुनिक तकनीक के माध्यम से उनकी शौर्यगाथाओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाना ही इस स्मारक की सबसे बड़ी पहचान है।

लेखक: डॉ. ओम डहरिया, सहायक जनसंपर्क अधिकारी।


प्रदीप मिश्रा
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