स्कूल में शिक्षक के कथित नशे में मिलने का आरोप, मिड-डे मील के इंतजार में बैठे रहे मासूम; शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संतोष यादव सूरजपुर
करवां प्राथमिक शाला का कथित वीडियो वायरल होने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग; वायरल वीडियो की पुष्टि जांच के बाद ही संभव।
सूरजपुर ACGN:- सूरजपुर जिले के ओड़गी विकासखंड अंतर्गत करवां प्राथमिक शाला से शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े करने वाला मामला सामने आया है। आरोप है कि स्कूल परिसर में प्रधान पाठक कथित रूप से नशे की हालत में बेहोश मिले, जबकि स्कूल में पढ़ने वाले करीब 15 बच्चे मिड-डे मील के इंतजार में बैठे रहे। घटना से संबंधित वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी की बात सामने आ रही है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराए जाने और आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
कथित वीडियो वायरल होने के बाद मामला चर्चा में
बताया जा रहा है कि करवां प्राथमिक शाला से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है, जिसमें प्रधान पाठक के स्कूल परिसर में कथित रूप से नशे की हालत में होने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो वायरल होने के बाद यह मामला स्थानीय स्तर पर चर्चा में आ गया है।
मिड-डे मील के इंतजार में बैठे रहे बच्चे
मामले में दूसरा महत्वपूर्ण सवाल स्कूल में मौजूद बच्चों की स्थिति को लेकर उठ रहा है। आरोप है कि करीब 15 बच्चे मिड-डे मील मिलने के इंतजार में बैठे रहे। यदि निर्धारित समय पर बच्चों को भोजन नहीं मिला या स्कूल की व्यवस्था किसी कारण से प्रभावित हुई, तो इसकी भी जांच की आवश्यकता है।
बच्चों की नियमित पढ़ाई के साथ उन्हें समय पर मध्यान्ह भोजन उपलब्ध कराना स्कूल व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही की शिकायत सामने आने पर संबंधित विभाग द्वारा वास्तविक स्थिति की पड़ताल किया जाना जरूरी है।
ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच की मांग की
घटना सामने आने के बाद ग्रामीणों की ओर से मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय करने की मांग की जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल बच्चों के भविष्य से जुड़ा स्थान है और वहां शिक्षकों की नियमित उपस्थिति, पढ़ाई तथा बच्चों के लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था सुनिश्चित होनी चाहिए।
यदि जांच में प्रधान पाठक के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो विभागीय नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग भी उठ रही है। वहीं, यदि वायरल वीडियो या आरोपों में कोई तथ्यात्मक अंतर सामने आता है तो प्रशासन की जांच से वास्तविक स्थिति भी स्पष्ट हो सकेगी।
शिक्षा व्यवस्था के दावों के बीच उठ रहा बड़ा सवाल
सरकार की ओर से शिक्षा व्यवस्था में सुधार और स्कूलों के बेहतर संचालन को लेकर लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे में किसी सरकारी स्कूल से इस तरह की शिकायत सामने आना व्यवस्था की निगरानी और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार केवल योजनाओं और दावों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। बच्चों को नियमित पढ़ाई, सुरक्षित वातावरण और समय पर भोजन मिलना उनकी बुनियादी जरूरत है। स्कूल में किसी शिक्षक की कथित लापरवाही से यदि इन व्यवस्थाओं पर असर पड़ता है तो संबंधित विभाग को इसकी गंभीरता से जांच करनी चाहिए।
अब प्रशासन की जांच पर टिकी नजर
फिलहाल इस मामले में वायरल वीडियो और ग्रामीणों की शिकायत के आधार पर आरोप सामने आए हैं। आरोपों की वास्तविकता और प्रधान पाठक की स्थिति की आधिकारिक पुष्टि प्रशासनिक जांच के बाद ही हो सकेगी। अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग इस मामले में जांच कराता है या नहीं और जांच के बाद क्या तथ्य सामने आते हैं।
यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई होना जरूरी होगा, वहीं जांच में आरोपों की पुष्टि नहीं होने पर वास्तविक स्थिति भी सार्वजनिक की जानी चाहिए, ताकि पूरे मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट हो सके।
प्रदीप मिश्रा
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