आजादी के 79 साल बाद भी सड़क को तरस रहा आदिवासी गांव! देवस्थल से बांगों तक बदहाली, प्रशासन से उठी बड़ी मांग
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने कलेक्टर से की चार प्रमुख विकास कार्यों की मांग, नरसिंग गंगा देवस्थल में सड़क, पेयजल और आश्रय भवन के साथ औंराभाठा व पोड़ी उपरोड़ा-बांगों मार्ग के निर्माण की उठाई आवाज।
कोरबा ACGN:- देश आजादी के 79 वर्ष पूरे कर विकास के नए आयाम स्थापित कर रहा है, लेकिन कोरबा जिले के आदिवासी अंचलों में बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याएं अब भी चिंता का विषय बनी हुई हैं। कहीं ग्रामीण पक्की सड़क की प्रतीक्षा कर रहे हैं, तो कहीं जर्जर मार्ग से आवागमन करने को मजबूर हैं। वहीं, आदिवासी समाज के पारंपरिक आस्था स्थलों पर भी आवश्यक सुविधाओं की कमी का मुद्दा सामने आया है। इन समस्याओं को लेकर छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद, जिला शाखा कोरबा ने जिला प्रशासन का ध्यान आकर्षित करते हुए कलेक्टर से आवश्यक निर्माण कार्यों के लिए राशि स्वीकृत करने और समयबद्ध कार्रवाई की मांग की है।
परिषद के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद वीर साय धनुहार ने जिला प्रशासन के समक्ष रखे गए मांग पत्रों के माध्यम से आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, ग्रामीण आवागमन और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। परिषद का कहना है कि विकास का वास्तविक लाभ तभी सुनिश्चित होगा, जब दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी सड़क, पेयजल और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

नरसिंग गंगा देवस्थल तक सड़क, पेयजल और आश्रय भवन की मांग
विकासखंड पाली अंतर्गत ग्राम पंचायत इरफ स्थित आदिवासी समाज के पारंपरिक आस्था स्थल नरसिंग गंगा में बुनियादी सुविधाओं के विकास की मांग की गई है। परिषद के अनुसार, यह स्थल आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण केंद्र है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं, ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों को सुविधाओं के अभाव में परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
परिषद ने मुख्य मार्ग से देवस्थल तक गुणवत्तापूर्ण पक्की सड़क बनाने, परिसर में बोरवेल, सोलर आधारित जल पंप, पानी की टंकी और नल कनेक्शन के माध्यम से स्थायी पेयजल व्यवस्था करने की मांग की है। इसके साथ ही धार्मिक और सामाजिक आयोजनों के दौरान श्रद्धालुओं के बैठने एवं विश्राम के लिए प्रकाश, पंखे, पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाओं से युक्त सामुदायिक आश्रय भवन बनाने का प्रस्ताव रखा गया है।
देवस्थल परिसर की साफ-सफाई, समतलीकरण, प्रकाश व्यवस्था और आवश्यक बुनियादी सुविधाओं के विकास पर भी जोर दिया गया है। परिषद का कहना है कि पारंपरिक देवस्थलों का संरक्षण केवल निर्माण कार्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और आने वाली पीढ़ियों की पहचान को सुरक्षित रखने से भी जुड़ा है।
औंराभाठा में पक्की सड़क का अभाव, ग्रामीणों की परेशानी का मुद्दा उठा
परिषद ने विकासखंड पोड़ी उपरोड़ा अंतर्गत ग्राम पंचायत रामपुर के आश्रित ग्राम औंराभाठा में पक्की पहुंच सड़क नहीं होने की समस्या भी उठाई है। परिषद के अनुसार, आजादी के 79 वर्ष बाद भी गांव तक पक्की सड़क का अभाव ग्रामीण विकास के सामने गंभीर चुनौती है।
सड़क के अभाव में विशेषकर बरसात के दिनों में ग्रामीणों, स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और बीमार व्यक्तियों को आवागमन में कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस तथा अन्य आवश्यक वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित होने की आशंका रहती है। ऐसे में औंराभाठा को मुख्य मार्ग से जोड़ने के लिए पक्की सड़क का निर्माण प्राथमिकता से कराने की मांग की गई है।

पोड़ी उपरोड़ा से बांगों बस्ती तक जर्जर सड़क के नए निर्माण की मांग
परिषद ने पोड़ी उपरोड़ा से बांगों बस्ती तक सड़क की खराब स्थिति पर भी चिंता जताई है। मांग पत्र में कहा गया है कि जर्जर सड़क के कारण लोगों को रोजमर्रा के कामकाज, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य आवश्यक गतिविधियों के लिए आवागमन में परेशानी होती है। सड़क की खराब स्थिति से दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है।
परिषद ने केवल अस्थायी मरम्मत के बजाय मार्ग का तकनीकी परीक्षण कर गुणवत्तापूर्ण नवीन सड़क निर्माण कराने की मांग की है, ताकि ग्रामीणों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन मिल सके।
DMF और अन्य योजनाओं से राशि स्वीकृत करने का आग्रह
छत्तीसगढ़ आदिवासी विकास परिषद ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि संबंधित विभागों के अधिकारियों का संयुक्त दल गठित कर नरसिंग गंगा देवस्थल का स्थल निरीक्षण एवं तकनीकी सर्वेक्षण कराया जाए। इसी तरह औंराभाठा की पहुंच सड़क और पोड़ी उपरोड़ा से बांगों बस्ती तक के मार्ग की स्थिति का परीक्षण कर आवश्यक प्राक्कलन तैयार किया जाए।
परिषद ने जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF), आदिवासी विकास विभाग अथवा अन्य उपयुक्त शासकीय योजनाओं के अंतर्गत नियमानुसार आवश्यक राशि स्वीकृत करने की मांग की है। साथ ही निर्माण कार्यों को जिला प्रशासन की प्राथमिकता में शामिल कर समयबद्ध तरीके से पूरा कराने के लिए संबंधित अधिकारियों को निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
अब इन मांगों पर जिला प्रशासन की पहल और संबंधित विभागों की कार्रवाई महत्वपूर्ण होगी। यदि प्रस्तावित कार्यों का तकनीकी परीक्षण कर आवश्यक स्वीकृति मिलती है, तो इससे आदिवासी समाज के आस्था स्थल पर सुविधाओं के विकास के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन की समस्याओं को दूर करने की दिशा में भी मदद मिल सकती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि उनकी बुनियादी जरूरतों से जुड़े इन मुद्दों पर गंभीरता से विचार कर ठोस कार्रवाई की जाएगी।
प्रदीप मिश्रा
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