दो बार ग्राम सभा निरस्त, भूमि अधिग्रहण पर चर्चा से पहले ही विराम! पताढ़ी में आखिर माजरा क्या है?
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
कोटवार रहते दूसरे व्यक्ति से मुनादी कराने पर सवाल, 2 और 13 अक्टूबर को नहीं हो सकी ग्राम सभा; भूमि अधिग्रहण पर चर्चा करना चाहते हैं ग्रामीण।
कोरबा ACGN:- ग्राम सभा ग्रामीणों के अधिकारों और गांव के विकास से जुड़े मुद्दों पर चर्चा का महत्वपूर्ण मंच है, लेकिन ग्राम पंचायत पताढ़ी में लगातार दो बार ग्राम सभा नहीं हो पाने से ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों का सवाल है कि आखिर बार-बार ग्राम सभा निरस्त क्यों हो रही है? मामला अडानी समूह के कोरबा पावर प्लांट से जुड़े प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण पर चर्चा का भी है, जिस पर ग्रामीण अपनी बात रखना चाहते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, शासन के निर्देशानुसार 2 अक्टूबर को ग्राम सभा आयोजित होनी थी, लेकिन उसी दिन सुबह करीब 11:12 बजे गांव में मुनादी कराई गई। ग्रामीणों का आरोप है कि देर से सूचना मिलने के कारण कई लोग सभा में नहीं पहुंच सके और बैठक नहीं हो पाई। ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया कि गांव में नियुक्त कोटवार होने के बावजूद किसी अन्य व्यक्ति से मुनादी क्यों कराई गई? इस पर पंचायत से स्पष्टीकरण मांगा जा रहा है।
इसके बाद 13 अक्टूबर को पूर्व निर्धारित समय पर ग्रामीण ग्राम सभा में शामिल होने पहुंचे, लेकिन बताया गया कि प्रभारी सचिव की तबीयत खराब होने के कारण बैठक निरस्त कर दी गई। ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत में दो सचिव उपलब्ध होने की बात कही जा रही है, ऐसे में वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? बार-बार बैठक निरस्त होने से ग्रामीणों को बिना अपनी बात रखे लौटना पड़ा।
भूमि अधिग्रहण पर चर्चा नहीं, तो ग्रामीणों के सवालों का जवाब कौन देगा?
ग्रामीण ग्राम विकास और प्रस्तावित भूमि अधिग्रहण से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं। उनका कहना है कि जब जमीन और गांव के भविष्य से जुड़े महत्वपूर्ण विषय सामने हैं, तब ग्राम सभा का बार-बार निरस्त होना संदेह और आशंका पैदा कर रहा है। ग्रामीणों को आशंका है कि कहीं कोई गड़बड़ी तो नहीं, जिसके कारण उन्हें अपनी बात रखने का अवसर नहीं मिल पा रहा है। हालांकि, जानबूझकर बैठक निरस्त करने या किसी साजिश का अभी कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।
ग्राम सभा की सूचना, गणपूर्ति और बैठक संचालन की प्रक्रिया लागू कानून एवं नियमों के अनुसार होनी चाहिए। प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि बैठकें किन कारणों से निरस्त हुईं, अगली ग्राम सभा कब आयोजित होगी और भूमि अधिग्रहण के विषय पर ग्रामीणों की बात रखने के लिए क्या व्यवस्था की जाएगी।
अब ग्रामीणों की मांग है कि मुनादी कराने की प्रक्रिया की जांच हो, बैठक निरस्त करने के कारण सार्वजनिक किए जाएं और अगली ग्राम सभा की तारीख व एजेंडा समय रहते बताया जाए। पताढ़ी में सवाल यही है—जब ग्रामीण अपने गांव और जमीन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं, तो ग्राम सभा बार-बार क्यों रुक रही है? प्रशासन की स्पष्टता ही ग्रामीणों की आशंकाओं को दूर कर सकती है।
प्रदीप मिश्रा
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