साइबर संवाद में खुला डिजिटल ठगी का खेल: 17 दिन तक डिजिटल अरेस्ट! पीड़ित ने सुनाई ठगी की पूरी कहानी
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साइबर संवाद
बिलासपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
साइबर संवाद में पुलिस अधिकारियों ने समझाई ठगों की चाल, पीड़ितों ने साझा की आपबीती, 1930 पर तत्काल शिकायत की अपील
बिलासपुर ACGN:- साइबर अपराध के बढ़ते मामलों के बीच बिलासपुर पुलिस ने आम लोगों को जागरूक करने के लिए लाल बहादुर शास्त्री सभागार में ‘साइबर संवाद’ कार्यक्रम आयोजित किया। 29 सितंबर 2026 को आयोजित कार्यक्रम में पुलिस अधिकारियों के साथ नागरिकों, बैंक अधिकारियों, व्यापारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों और स्कूली छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज रामगोपाल गर्ग और उप पुलिस महानिरीक्षक एवं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक बिलासपुर रजनेश सिंह ने की।

साइबर जागृति अभियान के तहत आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग तरीकों, साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली और ठगी होने के बाद तत्काल उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी देना था। कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सीधे पुलिस अधिकारियों से सवाल पूछने और अपनी शंकाओं का समाधान जानने का अवसर भी मिला।
कार्यक्रम के दौरान पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने साइबर अपराधियों के तौर-तरीकों और उनकी कार्यप्रणाली के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर ठग अक्सर लोगों की परिस्थितियों और कमजोरियों को समझकर उन्हें विश्वास में लेते हैं और इसके बाद आर्थिक ठगी को अंजाम देते हैं। बातचीत के दौरान व्यक्ति से ऐसी जानकारी हासिल की जाती है, जिसका इस्तेमाल बाद में उसे दबाव में लेने या रकम ट्रांसफर कराने के लिए किया जा सकता है।

वहीं वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने साइबर ठगी के दौरान ठगों द्वारा अपनाए जाने वाले मनोवैज्ञानिक दबाव के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि ठग फोन पर इस तरह बातचीत करते हैं कि सामने वाला घबरा जाए और जल्दबाजी में कोई निर्णय ले बैठे। इसी दबाव के बीच कई बार पीड़ित स्वयं अपने बैंक खाते से रकम ट्रांसफर कर देता है। उन्होंने नागरिकों से संदिग्ध फोन कॉल, लिंक, ओटीपी और व्यक्तिगत जानकारी को लेकर सतर्क रहने तथा किसी भी परिस्थिति में जल्दबाजी नहीं करने की अपील की।
‘साइबर संवाद’ की खास बात यह रही कि इसमें उन लोगों को भी बुलाया गया, जिन्होंने खुद साइबर अपराध की शिकायत दर्ज कराई थी और पुलिस के प्रयासों से उनकी ठगी गई रकम वापस कराई गई। ऐसे पीड़ितों ने कार्यक्रम में अपनी आपबीती साझा की और बताया कि साइबर अपराधियों ने किस तरह उन्हें अपने जाल में फंसाया।

एक पीड़ित ने बताया कि उसे करीब 17 दिनों तक ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर मानसिक दबाव में रखा गया। साइबर ठगों ने भय और दबाव का माहौल बनाकर उसे अपने प्रभाव में रखने की कोशिश की। पीड़ित ने पूरी घटना कार्यक्रम में साझा की। पुलिस के अनुसार वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर सरकंडा थाना प्रभारी द्वारा कार्रवाई करते हुए पीड़ित की सहायता की गई और उसे साइबर अपराधियों के चंगुल से बाहर निकाला गया।
कार्यक्रम में अन्य साइबर अपराध पीड़ितों ने भी ऑनलाइन फ्रॉड और फर्जी कॉल के माध्यम से हुई ठगी की घटनाओं को साझा किया। इन वास्तविक घटनाओं के माध्यम से उपस्थित लोगों को साइबर ठगों की कार्यप्रणाली को करीब से समझने का अवसर मिला। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऐसी घटनाओं में घबराने के बजाय तत्काल पुलिस को सूचना देना जरूरी है।

बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा पर भी हुई चर्चा
कार्यक्रम में बिलासपुर व्यापारी संघ के एक सदस्य ने बच्चों और बच्चियों के साथ होने वाली साइबर बुलीइंग से जुड़ा सवाल पुलिस अधिकारियों के सामने रखा। इस पर अधिकारियों ने अभिभावकों को बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के प्रति सजग रहने और उन्हें साइबर सुरक्षा के बुनियादी नियमों की जानकारी देने की जरूरत बताई। व्यापारी संघ के सदस्य ने भी बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर अपने सुझाव अधिकारियों के समक्ष रखे।
कार्यक्रम में एक मीडियाकर्मी ने भी साइबर अपराध की मौजूदा परिस्थितियों और उससे जुड़े मुद्दों पर अपने विचार रखे। इस पर पुलिस अधिकारियों ने चर्चा करते हुए आवश्यक सुझाव और जानकारी साझा की।

विद्यार्थियों से सतर्क रहने की अपील
कार्यक्रम के समापन अवसर पर पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग ने स्कूली छात्र-छात्राओं से इंटरनेट और सोशल मीडिया का इस्तेमाल सावधानी से करने की अपील की। उन्होंने कहा कि किसी अनजान व्यक्ति, लिंक, मैसेज या ऑनलाइन ऑफर पर बिना सत्यापन के भरोसा नहीं करना चाहिए। विद्यार्थियों से खुद जागरूक रहने और अपने परिवार तथा आसपास के लोगों को भी साइबर अपराधों से बचाव के प्रति जागरूक करने की अपील की गई।
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह ने नागरिकों से कहा कि साइबर ठगी होने पर घबराने के बजाय तत्काल साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें। उन्होंने बताया कि समय पर शिकायत मिलने से ठगी गई रकम को होल्ड या रिकवर कराने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए घटना के बाद शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए।

सोशल मीडिया पर भी पहुंचा साइबर संवाद
‘साइबर संवाद’ को सभागार तक सीमित नहीं रखते हुए बिलासपुर पुलिस के आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज पर कार्यक्रम की ऑनलाइन लाइव स्ट्रीमिंग भी की गई। इससे सोशल मीडिया के माध्यम से जुड़े नागरिक भी कार्यक्रम की जानकारी और पुलिस अधिकारियों की बात सुन सके।
कार्यक्रम के अंतिम चरण में मौजूद मीडियाकर्मियों ने पुलिस महानिरीक्षक रामगोपाल गर्ग और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक रजनेश सिंह से साइबर अपराध से जुड़े विभिन्न सवाल पूछे। अधिकारियों ने सवालों के जवाब देते हुए साइबर अपराध से बचाव और नागरिकों की सुरक्षा से संबंधित आवश्यक जानकारी साझा की।
कार्यक्रम में शहर के प्रमुख न्यूज़ और प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया प्रतिनिधियों के अलावा बैंक अधिकारी, गणमान्य नागरिक, सामाजिक संगठन, एनजीओ, चेतना ग्रुप/मित्र, ‘आओ संवारें कल अपना’ ग्रुप, खेल जगत से जुड़े लोग, सराफा व्यापारी और व्यापारी संघ के प्रतिनिधि मौजूद रहे। लाल बहादुर शास्त्री विद्यालय के छात्र-छात्राओं और शिक्षकगण ने भी कार्यक्रम में भाग लिया।
इस अवसर पर अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शहरी पंकज पटेल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ग्रामीण मधुलिका सिंह, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक ट्रैफिक रामकुमार करियारे, नगर पुलिस अधीक्षक सिविल लाइन परमेश्वर तिलकवार, रक्षित निरीक्षक भूपेंद्र कुमार गुप्ता, थाना प्रभारी कोतवाली देवेश सिंह, निरीक्षक गोपाल सतपति सहित पुलिस अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
साइबर संवाद के जरिए पुलिस ने आमजन को यह संदेश दिया कि ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए सतर्कता सबसे जरूरी है। किसी भी संदिग्ध कॉल, लिंक, मैसेज या डिजिटल दबाव की स्थिति में जल्दबाजी में पैसा ट्रांसफर करने के बजाय पहले संबंधित व्यक्ति या संस्था की वास्तविकता की पुष्टि करें और ठगी होने की स्थिति में तत्काल 1930 पर शिकायत करें।
प्रदीप मिश्रा
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