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सड़क हादसों पर सरकार का फोकस, ‘जीरो फेटेलिटी’ के लिए मिशन मोड

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

मुख्यमंत्री साय ने परिवहन विभाग की समीक्षा में ब्लैक स्पॉट सुधार, त्वरित उपचार और ग्रामीण बस सेवा विस्तार पर दिए निर्देश

रायपुर ACGN:- प्रदेश में सड़क दुर्घटनाओं और उनमें होने वाली जनहानि को कम करने के लिए सरकार ने सड़क सुरक्षा से जुड़े विभागों को मिलकर काम करने पर जोर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंगलवार को मंत्रालय महानदी भवन में परिवहन विभाग के कामकाज की उच्चस्तरीय समीक्षा की। उन्होंने परिवहन, पुलिस, स्वास्थ्य, लोक निर्माण विभाग और नगरीय निकायों को ‘जीरो फेटेलिटी’ के लक्ष्य की दिशा में विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं को कम करने के लिए केवल हादसे के बाद की व्यवस्था मजबूत करना पर्याप्त नहीं है। दुर्घटना से पहले रोकथाम, सुरक्षित सड़क संरचना, यातायात नियमों का पालन, वाहनों की फिटनेस, प्रशिक्षित चालक और हादसे के बाद घायल को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने पर एक साथ काम करना जरूरी है।
बैठक में बताया गया कि राज्य के 23 ब्लैक स्पॉट में सुधार की कार्रवाई फिलहाल प्रक्रियाधीन है। मुख्यमंत्री ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर वहां जरूरी सुधारात्मक और सुरक्षात्मक कार्य तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने दुर्घटनाओं के कारणों का नियमित विश्लेषण करने और उसके आधार पर आवश्यक सुधार करने को भी कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। घायल तक समय पर सहायता, एंबुलेंस और अस्पताल की सुविधा पहुंचाने के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए।
दुर्घटना पीड़ितों की मदद के लिए नागरिकों को किया जाएगा जागरूक
मुख्यमंत्री ने पीएम-राहत और राहवीर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने के निर्देश दिए। बैठक में बताया गया कि पीएम-राहत योजना के तहत पात्र सड़क दुर्घटना पीड़ितों को दुर्घटना की तारीख से अधिकतम सात दिनों तक 1.50 लाख रुपये तक कैशलेस उपचार की सुविधा का प्रावधान है। वहीं राहवीर योजना दुर्घटना में घायल व्यक्ति की समय पर मदद करने वाले नागरिकों को प्रोत्साहित करने से जुड़ी है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि आम लोगों तक इन योजनाओं की जानकारी पहुंचाना जरूरी है, ताकि सड़क हादसे के समय लोग पीड़ित की सहायता के लिए आगे आ सकें।
              दूरस्थ इलाकों में बढ़ेगी ग्रामीण बस सेवा
मुख्यमंत्री ग्रामीण बस योजना की समीक्षा के दौरान उन्होंने उन ग्रामीण, वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों को प्राथमिकता से चिन्हित करने के निर्देश दिए, जहां अभी नियमित सार्वजनिक परिवहन की सुविधा नहीं है। बैठक में बताया गया कि योजना के तहत वर्तमान में 13 जिलों के 106 मार्गों पर 107 बसों का संचालन किया जा रहा है।
कोंटा-जगरगुंडा क्षेत्र में शुरू हुई बस सेवा का उदाहरण भी बैठक में सामने आया। अधिकारियों के अनुसार पहले इस मार्ग की यात्रा में करीब छह घंटे तक लगते थे, जबकि बस सेवा शुरू होने के बाद यह सफर लगभग 45 मिनट में पूरा हो रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सार्वजनिक परिवहन से दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बाजार जैसी जरूरी सुविधाओं तक पहुंचने में मदद मिलती है।
            पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने पर्यटन स्थलों तक बेहतर और सुरक्षित परिवहन सुविधा विकसित करने पर भी जोर दिया। उन्होंने परिवहन विभाग को पर्यटन मिशन से जोड़कर प्रमुख पर्यटन स्थलों की कनेक्टिविटी बढ़ाने की संभावनाओं पर काम करने के निर्देश दिए। उनका कहना है कि बेहतर आवागमन से पर्यटन गतिविधियों के साथ स्थानीय रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
फिटनेस, एचएसआरपी और ड्राइविंग टेस्ट में तकनीक का इस्तेमाल
बैठक में वाहनों की फिटनेस जांच व्यवस्था को अधिक प्रभावी और तकनीक आधारित बनाने पर चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशनों की व्यवस्था को मजबूत करने और 15 वर्ष की अवधि पूरी कर चुके वाहनों के नियमानुसार नवीनीकरण एवं फिटनेस संबंधी प्रावधानों का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
उन्होंने वाहनों में हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट यानी एचएसआरपी लगाने के अभियान में तेजी लाने और लंबित चालानों की वसूली के लिए आधुनिक चालान प्रणाली का प्रभावी उपयोग करने को कहा।
ड्राइविंग लाइसेंस के लिए विकसित की जा रही ई-ट्रैक व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। इसमें सीसीटीवी कैमरों और सेंसर आधारित तकनीक से कंप्यूटराइज्ड ड्राइविंग टेस्ट की व्यवस्था विकसित की जा रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया में आधुनिक तकनीक का उपयोग बढ़ाया जाए, ताकि आवश्यक दक्षता रखने वाले लोगों को ही ड्राइविंग लाइसेंस मिल सके।
बैठक में इलेक्ट्रिक वाहन नीति और पर्यावरण अनुकूल परिवहन को बढ़ावा देने के प्रयासों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि परिवहन व्यवस्था में आम नागरिक की सुरक्षा और सुविधा को केंद्र में रखते हुए ग्रामीण क्षेत्रों तक सार्वजनिक परिवहन, सुरक्षित वाहन, प्रशिक्षित चालक, तकनीक आधारित व्यवस्था और दुर्घटना के बाद त्वरित उपचार – इन सभी पहलुओं पर एक साथ काम किया जाना चाहिए।
बैठक में परिवहन मंत्री केदार कश्यप, मुख्य सचिव विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव राहुल भगत, परिवहन विभाग के सचिव एस. प्रकाश, परिवहन आयुक्त डी. रविशंकर, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव प्रभात मलिक सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।


प्रदीप मिश्रा
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