खुले गड्ढे बन रहे बेजुबानों की मौत का जाल, फिर गड्ढे में गिरा सांड
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ब्रह्मपुर, ओड़िशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
रिपोर्ट – अनिल कुमार चौधरी, गंजाम
हरिडाखंडी तालाब के पास निर्माणाधीन अपार्टमेंट में हादसा, फायर ब्रिगेड ने कड़ी मशक्कत के बाद सांड को निकाला बाहर; पहले भी गाय और पिल्लों की मौत का दावा
ब्रह्मपुर ACGN:- ब्रह्मपुर शहर में निर्माणाधीन इमारतों के आसपास खुले छोड़े जा रहे गहरे गड्ढे अब बेजुबान जानवरों के लिए जानलेवा साबित होते दिखाई दे रहे हैं। हरिडाखंडी तालाब के पास शनि मंदिर के निकट स्थित एक आधे-अधूरे अपार्टमेंट कॉम्प्लेक्स में बने गहरे और असुरक्षित गड्ढे में गिरकर एक सांड गंभीर रूप से घायल हो गया। काफी देर तक पानी भरे गड्ढे में फंसे रहने के बाद उसकी हालत बिगड़ गई। सूचना मिलने पर फायर ब्रिगेड की टीम मौके पर पहुंची और काफी मशक्कत के बाद सांड को सुरक्षित बाहर निकाला।
बताया गया कि निर्माणाधीन परिसर में गड्ढा काफी गहरा और खतरनाक है। सांड के उसमें गिरने के बाद स्थानीय युवकों ने उसे बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन गड्ढे की गहराई और परिस्थितियां इतनी जोखिमभरी थीं कि वे सफल नहीं हो सके। इसके बाद फायर ब्रिगेड को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही एस.के. लेकां, एस. धल, विजय बेहरा, कान्हु चरण गोचायत और दुष्मंत माझी सहित फायरफाइटर्स मौके पर पहुंचे और बचाव कार्य शुरू किया। काफी प्रयास के बाद सांड को गड्ढे से बाहर निकाला गया।
इस घटना ने एक बार फिर निर्माणाधीन भवनों के आसपास सुरक्षा इंतजामों और जिम्मेदार विभागों की निगरानी पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह गड्ढा काफी समय से खुला पड़ा है और इसके आसपास जानवरों को रोकने के लिए पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं है। उनका दावा है कि इससे पहले भी कई जानवर हादसों का शिकार हो चुके हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार, एक गाय और 20 से अधिक पिल्लों की गड्ढे में गिरने से मौत भी हो चुकी है। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि खुले गड्ढों की जानकारी पहले भी मीडिया और सामाजिक माध्यमों के जरिए सामने लाई जा चुकी है, लेकिन इसके बावजूद निर्माण स्थल पर स्थायी सुरक्षा व्यवस्था नहीं किए जाने से नाराजगी बढ़ रही है। सवाल यह भी है कि यदि किसी निर्माण स्थल पर गहरे गड्ढे लंबे समय तक खुले रहते हैं तो वहां सुरक्षा घेरा, चेतावनी संकेत या अन्य बचाव उपाय क्यों नहीं किए जाते?

पशुप्रेमी एवं पत्रकार लालतेंदू चौधरी ने कहा कि निर्माणाधीन अपार्टमेंट और अन्य भवनों में नींव, तहखाने तथा लिफ्ट के लिए खोदे गए गहरे गड्ढों को सुरक्षित तरीके से बंद या घेराबंदी नहीं किए जाने के कारण बेजुबान जानवर बार-बार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से निर्माणाधीन स्थलों का नियमित निरीक्षण कराने तथा असुरक्षित तरीके से गड्ढे खुले छोड़ने वाले भवन मालिकों और निर्माणकर्ताओं के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग की।
अब सवाल सिर्फ एक सांड के गड्ढे में गिरने का नहीं, बल्कि उन तमाम बेजुबान जानवरों की सुरक्षा का है जो शहर की सड़कों और खाली जगहों के बीच विचरण करते हैं। क्या किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार किया जाएगा या प्रशासन निर्माणाधीन स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच कर खुले गड्ढों को सुरक्षित कराने की दिशा में ठोस कदम उठाएगा? यह सवाल हादसे के बाद एक बार फिर शहर के सामने खड़ा है।
प्रदीप मिश्रा
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